ज्योतिष शास्त्र में सभी नौ ग्रहों और 12 राशियों की विशेष भूमिका होती है। नौ ग्रहों और 12 राशियों की गणना के आधार पर किसी जातक के भविष्य के बारे में अध्ययन किया जाता है। जब भी कोई शिशु इस संसार में जन्म लेता है तो उसी समय उसकी एक राशि तय हो जाती है। ग्रहों और राशि की गणना के आधार पर ही व्यक्ति की कुंडली उसके बारे में बहुत कुछ जानकारी देती है। कुंडली के अध्ययन के आधार पर व्यक्ति के ऊपर पड़ने वाले अच्छे और बुरे ग्रहों का विश्लेषण किया जाता है। जैसे अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में मंगल भारी होता है या अशुभ भाव में आकर विराजमान होता है तब उस पर मंगल दोष का प्रभाव होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली के पहले, चौथे, सातवें, आठवें और बाहरवें भाव में मंगल आकर बैठे हों तो वह व्यक्ति मांगलिक कहलाता है। जातक की कुंडली में मंगल दोष होने पर उसके विवाह में अड़चनें आती है। जातक को ज्यादा गुस्सा आता है। व्यक्ति का दांपत्य जीवन में परेशानियों के साथ बीतता है।
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ज्योतिष: कुंडली में मंगल दोष होने पर आती हैं ऐसी परेशानियां, जानिए मंगल दोष से मुक्ति के उपाय
Thu, 08 Jul 2021 12:22 PM IST
विनोद शुक्ला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Thu, 08 Jul 2021 12:22 PM IST
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जातक की कुंडली में मंगल दोष होने पर उसके विवाह में अड़चनें आती है। जातक को ज्यादा गुस्सा आता है। व्यक्ति का दांपत्य जीवन में परेशानियों के साथ बीतता है।
- फोटो : अमर उजाला
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मंगलदोष और प्रभाव
कुंडली में मंगल ग्रह के भारी होने पर जातकों पर मंगल ग्रह का विशेष प्रभाव रहता है। कुंडली में मंगल का प्रभाव अधिक होने पर ऐसे जातकों में कामुकता ज्यादा होती है। मांगलिक व्यक्तियों में काम की इच्छा अधिक होने के कारण इनका विवाह मांगलिक से किया जाता है। मांगलिक का विवाह मांगलिक से करने पर यह एक दूसरे की इच्छा और साथ अच्छी तरह से निभाते हैं।
कुंडली में मंगल ग्रह के भारी होने पर जातकों पर मंगल ग्रह का विशेष प्रभाव रहता है। कुंडली में मंगल का प्रभाव अधिक होने पर ऐसे जातकों में कामुकता ज्यादा होती है। मांगलिक व्यक्तियों में काम की इच्छा अधिक होने के कारण इनका विवाह मांगलिक से किया जाता है। मांगलिक का विवाह मांगलिक से करने पर यह एक दूसरे की इच्छा और साथ अच्छी तरह से निभाते हैं।
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
मंगल दोष का जातकों पर प्रभाव
मंगल दोष के प्रभाव से विवाह में देरी होती है, शादी टूट सकती है, यदि विवाह हो भी जाता है तो जीवनसाथी से तालमेल का अभाव रहता है। इसके पीछे का कारण यह है कि वहीं कुंडली में सातवाँ भाव विवाह या वैवाहिक जीवन को दर्शाता है और इस भाव में मंगल का होना अशुभ होता है। यहां मंगल की स्थिति पति और पत्नी के बीच अहम के टकराव, तनाव, झगड़ा, तलाक आदि का कारण बनती है।
मंगल दोष के प्रभाव से विवाह में देरी होती है, शादी टूट सकती है, यदि विवाह हो भी जाता है तो जीवनसाथी से तालमेल का अभाव रहता है। इसके पीछे का कारण यह है कि वहीं कुंडली में सातवाँ भाव विवाह या वैवाहिक जीवन को दर्शाता है और इस भाव में मंगल का होना अशुभ होता है। यहां मंगल की स्थिति पति और पत्नी के बीच अहम के टकराव, तनाव, झगड़ा, तलाक आदि का कारण बनती है।
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मंगल के उपाय
उपाय
मंगल के प्रभाव को कम करने के लिए मांगलिक लोगों को भगवान शिव और हनुमान जी की आराधना करनी चाहिए। मंगल के अशुभ प्रभाव को करने के लिए ज्योतिष में कुछ उपाय बताए गए हैं। जिनमें मुख्य रूप से मूंगे को धारण करना और गेहूं, मसूर की दाल, तांबा, सोना, लाल फूल, लाल वस्त्र, लाल चंदन, केशर, कस्तुरी, लाल बैल, भूमि आदि का दान करें।
मंगल के प्रभाव को कम करने के लिए मांगलिक लोगों को भगवान शिव और हनुमान जी की आराधना करनी चाहिए। मंगल के अशुभ प्रभाव को करने के लिए ज्योतिष में कुछ उपाय बताए गए हैं। जिनमें मुख्य रूप से मूंगे को धारण करना और गेहूं, मसूर की दाल, तांबा, सोना, लाल फूल, लाल वस्त्र, लाल चंदन, केशर, कस्तुरी, लाल बैल, भूमि आदि का दान करें।
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मंगल
मांगलिक लोगों का स्वभाव
मंगल ग्रह का प्रभाव ज्यादा होने से इन्हें बात-बात में जल्दी गुस्सा आता है। कार्य के प्रति काफी जुनूनी स्वभाव के होते हैं। इनकी वाणी कठोर होती है। इन जातकों के लड़ाई-झगड़ों से डर नहीं लगता।
मंगल ग्रह का प्रभाव ज्यादा होने से इन्हें बात-बात में जल्दी गुस्सा आता है। कार्य के प्रति काफी जुनूनी स्वभाव के होते हैं। इनकी वाणी कठोर होती है। इन जातकों के लड़ाई-झगड़ों से डर नहीं लगता।