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चंद्रमा का ग्रहण योग बढ़ाता है मानसिक परेशानी, जानिए बचने के उपाय
ज्योतिष में नवग्रह बताए गए हैं। हर ग्रह का अपना प्रभाव और फल होता है। ये ग्रह जब अपना स्थान परिवर्तन करते हैं या किसी दूसरे ग्रह के साथ मिलकर युति बनाते हैं तब शुभ या अशुभ योग का निर्माण होता है। जिसका प्रभाव जातक के निजी जीवन और कार्यक्षेत्र दोनों पर पड़ता है। ज्योतिशास्त्र में चंद्रमा को मन का कारक बताया गया है। चंद्रमा की शुभ अशुभ स्थिति व्यक्ति को मानसिकतौर पर प्रभावित करती है। ज्योतिष में कई योग बताए गए हैं जिनमें से चंद्रमा का ग्रहण योग भी होता है। चंद्रमा का ग्रहण योग लगने से व्यक्ति की मानसिक स्थिति पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। तो चलिए जानते हैं कि क्या होता है चंद्रमा का ग्रहण योग और क्या है इसके प्रभाव एवं उपाय
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(प्रतीकात्मक तस्वीर)
कब बनता है चंद्रमा का ग्रहण योग
ज्योतिष के अनुसार कुंडली में यदि चंद्रमा और राहु का संबंध हो तो इससे चंद्र ग्रहण योग का निर्माण होता है। इससे व्यक्ति पर मानसिक रूप से प्रभाव पड़ता है। चंद्रमा के साथ राहु के संबंध से चंद्रमा दूषित हो जाता है जिससे व्यक्ति को मन में नकारात्मक, काल्पनिक ख्याल आने लगते हैं। व्यक्ति को मानसिक समस्याएं होने लगती हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
पारिवारिक जीवन और कार्यक्षेत्र पर भी पड़ता है प्रभाव
कुंडली में चंद्रमा और राहु का योग बनने पर व्यक्ति की नींद में बाधा पड़ने लगती है। उसे बुरे ख्याल और सपने आने लगते हैं। इसके साथ ही ये लोग हर कार्य को लेकर आशंकित होने लगते हैं चाहें वह नौकरी, व्यापार का हो या फिर पारिवारिक जीवन का। इस योग के कारण व्यक्ति के मन में अपने जीवनसाथी को लेकर शक और वहम पैदा होने लगता है।
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शिव जी की पूजा करें (प्रतीकात्मक तस्वीर)
चंद्रमा के ग्रहण योग से मुक्ति का उपाय
यदि किसी जातक की कुंडली में चंद्रमा और राहु का योग हो तो उसे नियमित रूप से भगवान शिव की उपासना करनी चाहिए। सोमवार के दिन शिवलिंग पर गंगाजल से अभिषेक करना चाहिए और शिवमंत्रों का जाप करना चाहिए। सोमवार के दिन भगवान शिव को खीर का भोग लगाकर इसे प्रसाद के रूप में स्वयं भी ग्रहण करना चाहिए। चंद्रमा की मजबूती के लिए पूर्णिमा का व्रत रखना भी शुभफलदायी रहता है।
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