इशांत की गाली के बाद धोनी ने भी जहीर को खूब नचाया!
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न्यूजीलैंड के कप्तान और धाकड़ बल्लेबाज ब्रैंडन मैकुलम ने तिहरा शतक लगाने के साथ ही कई रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया है। वह एक पारी में तीन सौ रनों का आंकड़ा पार करने वाले पहले कीवी बल्लेबाज बन गए हैं।
उन्होंने अपने तिहरे शतक के साथ हमवतन मार्टिन क्रो के सर्वाधिक 299 रनों के रिकॉर्ड को तोड़ दिया। मैकुलम सबसे बड़ी पारी खेलने वाले न्यूजीलैंड के पहले बल्लेबाज बन गए हैं। साथ ही वह दुनिया के ऐसे आठवें कप्तान बन गए हैं जिन्होंने बतौर कप्तान तिहरा शतक लगाया है।
मैकुलम टेस्ट इतिहास में मैच की दूसरी पारी में तिहरा शतक लगाने वाले दुनिया के दूसरे बल्लेबाज बने। इससे पहले पाकिस्तान के बल्लेबाज हनीफ मोहम्मद ने 1957-58 में खेले गए ब्रिजटाउन टेस्ट मैच में 970 मिनट तक बल्लेबाजी करते हुए तिहरा शतक लगाने का कारनामा किया था। हनीफ ने उस समय मैराथन पारी खेलकर अपनी टीम की हार का टाला था उसी तरह मैकुलम ने भी यह पारी खेलकर अपनी टीम की संभावित हार को टाला।
दूसरी पारी में कोहली का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन
विराट कोहली ने टीम इंडिया के न्यूजीलैंड के दौरे के अंतिम दिन के अंतिम सत्र में लाजवाब बल्लेबाजी करते हुए शतक लगाया है। भारत ने एक समय 10 रन पर दो विकेट गंवा दिए थे और टीम पर हार का संकट मंडरा रहा था लेकिन कोहली ने नाजुक समय पर बल्लेबाजी करते हुए मैच को बराबरी पर खत्म करा दिया। कोहली 105 रन बनाकर नाबाद रहे।
कोहली की टेस्ट करियर में यह छठी शतकीय पारी है जिसमें दूसरी पारी में उनका यह पहला शतक है। कोहली ने 24 टेस्ट मैच में 46.51 की औसत से 1721 रन बनाए हैं।
वहीं न्यूजीलैंड की ओर से इस सीरीज में पांच शतक लगे हैं। कीवी टीम के बल्लेबाजों ने 2013-14 के सत्र में अब तक 12 शतक ठोक चुके हैं जो इस टीम की ओर से किसी भी सीजन में सबसे बढ़िया प्रदर्शन है। चार साल पहले टीम इंडिया के न्यूजीलैंड दौरे पर मेजबान ने छह शतक लगाए थे।
वनडे मैच से भी ज्यादा ओवर फेंक डाले जहीर ने
टीम इंडिया के अनुभवी तेज गेंदबाज जहीर खान ने ब्रैंडन मैकुलम और जेम्स नीशाम की जोड़ी तोड़ने के चक्कर में खासी मशक्कत करनी पड़ी और कप्तान धोनी ने उन्हें 51 ओवर तक करा डाले। न्यूजीलैंड की दूसरी पारी में 51 ओवर फेंकने वाले जहीर भारत के ऐसे 11वें तेज गेंदबाज बन गए हैं जिन्होने एक पारी में तीन सौ से ज्यादा गेंदें डाली।
हालांकि उनकी मेहनत बेकार नहीं गई और उन्होंने पांच कीवी बल्लेबाजों को पवेलियन की राह दिखाई। उन्होंने अपने करियर में 11वीं बार और न्यूजीलैंड के खिलाफ चौथी बार पांच विकेट के आंकड़े को छुआ है। जहीर से पहले एक पारी में 50 ओवर से ज्यादा गेंद डालने का रिकॉर्ड कपिल देव के नाम था जिन्होंने 1991-92 में एडिलेड में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 51 ओवर डाले थे।
जहीर ने 51 ओवर में 170 रन खर्च कर डाले। वह एक पारी में सबसे ज्यादा रन लुटाने वाले भारत के दूसरे तेज गेंदबाज बन गए हैं। इससे पहले यह अनचाहा रिकॉर्ड कपिल देव के ही नाम था जिन्होंने 1983 में फैसलाबाद में पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट मैच की एक पारी में 220 रन लुटाए थे।
भारतीय तेज गेंदबाजों की लगी इस मैच में वाट!
टीम इंडिया के तेज गेंदबाजों के लिए वेलिंग्टन टेस्ट बहुत खास नहीं रहा। हालांकि पहली पारी में न्यूजीलैंड की पूरी टीम 192 रनों पर सिमट गई थी, लेकिन दूसरी पारी में मेजबान बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजों की जमकर क्लास ली।
भारत के तेज गेंदबाजों ने न्यूजीलैंड की दूसरी पारी में 146 ओवर डाले जो टीम इंडिया की ओर से एक पारी में दूसरी बार सबसे ज्यादा ओवर डाले गए। इससे पहले टीम इंडिया ने 2002 में एंटीगा में वेस्ट इंडीज के खिलाफ टेस्ट मैच में 163 ओवर डलाने का रिकॉर्ड बनाया था।
और यह तब है जब टीम इंडिया के तेज गेंदबाजों ने न्यूजीलैंड की पहली पारी 52.5 ओवर में 192 रनों पर समेट दिया था। सभी 10 विकेट इशांत शर्मा (6) और मोहम्मद शमी (4) ने आपस में बांट लिए थे। दूसरी पारी में भारत ने 210 ओवर डाले फिर भी न्यूजीलैंड की पूरी टीम आउट नहीं कर सके। कीवी टीम ने अपनी पारी आठ विकेट पर 680 रन बनाकर घोषित कर दी।
टीम इंडिया को यहां भी नहीं मिली जीत
महेंद्र सिंह धोनी की अगुवाई वाली टीम इंडिया को विदेशी धरती पर पिछले ढाई साल से पहली जीत का इंतजार न्यूजीलैंड की धरती पर भी खत्म नहीं हुआ। टीम इंडिया विदेश में लगातार 14 टेस्ट मैचों में एक भी जीत हासिल नहीं कर सकी है।
जून 2011 में वेस्ट इंडीज में तीन मैचों की टेस्ट सीरीज का पहला मैच जीतने के बाद भारत को अगले दो मैच ड्रॉ कराने पड़े। इसके बाद उसे इंग्लैड और ऑस्ट्रेलिया में लगातार आठ मैचों में हार का सामना करना पड़ा। पिछले साल के अंत में दक्षिण अफ्रीका ने अपनी धरती पर तीन मैचों की सीरीज 2-0 से जीत ली थी। जबकि जोहानिसबर्ग में खेला गया टेस्ट मैच ड्रॉ पर खत्म हुआ था।
हालांकि भारत के लिए विदेशी धरती पर जीत का यह इंतजार सबसे लंबा इंतजार नहीं है। इससे पहले उसे विदेश में जीत के लिए एक समय सात साल का लंबा इंतजार करना पड़ा था। जुलाई 1986 से जुलाई 1993 के बीच भारत ने 26 टेस्ट मैच खेले और उसे एक भी जीत नहीं मिली।