{"_id":"aea4cfefd57a9bdd10b37ea86a0c6959","slug":"wrong-decisions-in-asian-games-hindi-news-sv","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"फैसले से नाराज सरिता ने कांस्य पदक लेने से किया इनकार","category":{"title":"Sports Archives","title_hn":"खेल आर्काइव","slug":"sports-archives"}}
फैसले से नाराज सरिता ने कांस्य पदक लेने से किया इनकार
हेमंत रस्तोगी/अमर उजाला, दिल्ली
Updated Wed, 01 Oct 2014 06:39 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एशियाई खेलों में पक्षपातपूर्ण फैसले से बेहद नाराज भारतीय मुक्केबाज सरिता देवी ने कांस्य पदक लेने से इनकार कर दिया। मंगलवार को 60 किलो भार वर्ग के सेमीफाइनल मुकाबले में ताबड़तोड़ मुक्के बरसाने के बाद अपनी जीत के प्रति आश्वस्त सरिता देवी के बजाय रेफरी ने जैसे कोरियाई पार्क जीना का हाथ उठाया स्टेडियम में मौजूद हर गैर मेजबान सन्न रह गया। वहीं सरिता बेहद भावुक हो गई थी।
विवादित फैसले से नाराज सरिता ने आज साहसिक फैसला लेते हुए कांस्य पदक लेने से मना कर दिया। सरिता के अप्रत्याशित ढंग से मना करने पर आयोजक और दर्शक भौचक्के हो गए। पोडियम के पास जाकर उन्होंने पदक लेने से मना कर दिया।
सेमीफाइनल मुकाबले के बाद परिणाम से सरिता बेहद दुखी हो गई। पति थोयबा सिंह को इस परिणाम पर विश्वास नहीं हो रहा था। मैरीकॉम और उनके पति ओनलर कॉम भी फैसले का विरोध कर रहे थे। तभी थोयबा ने आपा खो दिया वह मेजबानों को बुरा भला कहने लगे, लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं था। उन्हें बाद में स्टेडियम से ही बाहर निकाल दिया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
विवादित फैसले से नाराज सरिता ने आज साहसिक फैसला लेते हुए कांस्य पदक लेने से मना कर दिया। सरिता के अप्रत्याशित ढंग से मना करने पर आयोजक और दर्शक भौचक्के हो गए। पोडियम के पास जाकर उन्होंने पदक लेने से मना कर दिया।
विज्ञापन
सेमीफाइनल मुकाबले के बाद परिणाम से सरिता बेहद दुखी हो गई। पति थोयबा सिंह को इस परिणाम पर विश्वास नहीं हो रहा था। मैरीकॉम और उनके पति ओनलर कॉम भी फैसले का विरोध कर रहे थे। तभी थोयबा ने आपा खो दिया वह मेजबानों को बुरा भला कहने लगे, लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं था। उन्हें बाद में स्टेडियम से ही बाहर निकाल दिया गया।
विज्ञापन
विवादित परिणाम पर कोरियाई कोच ने मांगी माफी
मंगलवार को सरिता देवी की हार का बदला लेने उतरे देवेंद्रो सिंह को भी कोरियाई शिन जांगहिन के हाथों इसी तरह हराया गया।
मुक्केबाज सरिता की आंखों से आंसुओं की धार बह रही थी। उनके मुंह से यही निकला उनके साथ ऐसा क्यों होता है, वह अपने दुधमुंहे बच्चे को घर छोड़कर यहां आई और साल भर प्रैक्टिस की। इससे बढ़िया उनसे बाउट से पहले कह देते तुम्हें कोरिया को जिताना है तो वह ऐसे ही अपने ग्लव्स उतार कर दे देती। बावजूद इसके कोई भारतीय ऑफिशियल परिणाम को चुनौती देने आगे नहीं आया। उस वक्त डिप्टी चेफ डि मिशन कुलदीप वत्स वहीं मौजूद थे।
सरिता अपने पति से मिली तो उनसे गले लगकर फूट-फूटकर रोनी लगीं। क्यूबाई कोच बीआई फर्नांडीज से तो दक्षिण कोरियाई कोच पार्क जी सुन ने आकर परिणाम के लिए माफी मांगी।
मुक्केबाज सरिता की आंखों से आंसुओं की धार बह रही थी। उनके मुंह से यही निकला उनके साथ ऐसा क्यों होता है, वह अपने दुधमुंहे बच्चे को घर छोड़कर यहां आई और साल भर प्रैक्टिस की। इससे बढ़िया उनसे बाउट से पहले कह देते तुम्हें कोरिया को जिताना है तो वह ऐसे ही अपने ग्लव्स उतार कर दे देती। बावजूद इसके कोई भारतीय ऑफिशियल परिणाम को चुनौती देने आगे नहीं आया। उस वक्त डिप्टी चेफ डि मिशन कुलदीप वत्स वहीं मौजूद थे।
सरिता अपने पति से मिली तो उनसे गले लगकर फूट-फूटकर रोनी लगीं। क्यूबाई कोच बीआई फर्नांडीज से तो दक्षिण कोरियाई कोच पार्क जी सुन ने आकर परिणाम के लिए माफी मांगी।
भारत के बाद मंगोलियाई मुक्केबाज के साथ हुआ ऐसा
मुक्केबाज सरिता बोली यह पहली बार उनके साथ नहीं हुआ है। पिछले एशियाई खेलों के ट्रायल में भी उनके साथ यही हुआ था और अब यहां। पता नहीं भगवान उन्हें किस बात की सजा दे रहा है।
साथी मुक्केबाज एमसी मैरीकॉम ने भी कहा, "इससे अधिक साफ सुथरी जीती हुई बाउट और कोई नहीं हो सकती।" इस अफरातफरी के बीच थोयबा सिंह ने खुद शिकायत लिखकर चीफ कोच जीएस संधू के हस्ताक्षर कराए इसके बाद उन्होंने प्रोटेस्ट दाखिल किया। हालांकि टेक्निकल कमीशन ने प्रोटेस्ट स्वीकार तो कर लिया लेकिन बाद में इसे यह कहकर खारिज कर दिया गया कि जजों के निर्णय पर आपत्ति दर्ज नहीं कराई जा सकती है।
कोरियाई बॉक्सरों के पक्ष में किस तरह नाजायज फैसले दिए जा रहे हैं। इसका अगला उदाहरण 56 किलो में ओलंपिक व वर्ल्ड चैंपियनशिप रजत पदक विजेता मंगोलियाई बॉक्सर नयामबयार तुगसाट पर कोरियाई झांग जियावेई को विजेता घोषित कर दिया गया। तुगसाट ने रिंग से बाहर जाने से मना कर दिया। उनके चेफ डि मिशन ने आकर प्रोटेस्ट दाखिल किया। उसे भी खारिज किया गया।
साथी मुक्केबाज एमसी मैरीकॉम ने भी कहा, "इससे अधिक साफ सुथरी जीती हुई बाउट और कोई नहीं हो सकती।" इस अफरातफरी के बीच थोयबा सिंह ने खुद शिकायत लिखकर चीफ कोच जीएस संधू के हस्ताक्षर कराए इसके बाद उन्होंने प्रोटेस्ट दाखिल किया। हालांकि टेक्निकल कमीशन ने प्रोटेस्ट स्वीकार तो कर लिया लेकिन बाद में इसे यह कहकर खारिज कर दिया गया कि जजों के निर्णय पर आपत्ति दर्ज नहीं कराई जा सकती है।
कोरियाई बॉक्सरों के पक्ष में किस तरह नाजायज फैसले दिए जा रहे हैं। इसका अगला उदाहरण 56 किलो में ओलंपिक व वर्ल्ड चैंपियनशिप रजत पदक विजेता मंगोलियाई बॉक्सर नयामबयार तुगसाट पर कोरियाई झांग जियावेई को विजेता घोषित कर दिया गया। तुगसाट ने रिंग से बाहर जाने से मना कर दिया। उनके चेफ डि मिशन ने आकर प्रोटेस्ट दाखिल किया। उसे भी खारिज किया गया।
गोल्ड मेडलिस्टर जैसा मिले सम्मान
भारतीय कोच जीएस संधू ने कहा कि देश में सरिता देवी को एक स्वर्ण पदक विजेता का सम्मान मिलना चाहिए। उसी तरह जब 1986 के एशियाई खेलों में शाइनी अब्राहम को 800 मीटर में स्वर्ण जीतने के बाद भी डिसक्वालीफाई कर दिया गया था।
लेकिन देश में उन्हें स्वर्ण विजेता का सम्मान मिला था।
थोयबा सिंह जब प्रोटेस्ट करने को पत्र लिख रहे थे। उस दौरान किसी के पास इसे दाखिल करने के लिए दिए जाने वाले पांच सौ डॉलर नहीं निकले। इस राशि वहां मौजूद कुछ लोगों से एकत्र किया गया तब जाकर प्रोटेस्ट किया जा सका।
आईओए सेक्रेटरी जनरल राजीव मेहता ने कहा यह राशि उन्हें बाद में दे दी जाएगी। थोयबा ने तो पहले ही कह दिया था अगर उनकी पत्नी को न्याय नहीं मिला तो वह यह पदक लेने ही नहीं जाएंगी। लेकिन उन्हें ऐसा नहीं करने के लिए समझाया गया लेकिन वह नहीं मानी और पदक लेने से मना कर दिया।
लेकिन देश में उन्हें स्वर्ण विजेता का सम्मान मिला था।
थोयबा सिंह जब प्रोटेस्ट करने को पत्र लिख रहे थे। उस दौरान किसी के पास इसे दाखिल करने के लिए दिए जाने वाले पांच सौ डॉलर नहीं निकले। इस राशि वहां मौजूद कुछ लोगों से एकत्र किया गया तब जाकर प्रोटेस्ट किया जा सका।
आईओए सेक्रेटरी जनरल राजीव मेहता ने कहा यह राशि उन्हें बाद में दे दी जाएगी। थोयबा ने तो पहले ही कह दिया था अगर उनकी पत्नी को न्याय नहीं मिला तो वह यह पदक लेने ही नहीं जाएंगी। लेकिन उन्हें ऐसा नहीं करने के लिए समझाया गया लेकिन वह नहीं मानी और पदक लेने से मना कर दिया।