अमित मिश्रा को क्यों नापसंद करते हैं कप्तान धोनी?
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लेग स्पिनर अमित मिश्रा एक ऐसे गेंदबाज हैं जिन्हें बेहतरीन फिरकी गेंदबाज माना जाता है। लेकिन उनके साथ दुर्भाग्य यह है कि वह टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के कभी खास गेंदबाज नहीं बन सके हैं।
10 साल से ज्यादा का वक्त हो गया उन्हें अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत किए हुए, लेकिन आज तक वह कभी भी टीम इंडिया के लिए नियमित खिलाड़ी नहीं बन सके हैं। धोनी की चलती तो वह कभी भी अमित को टीम में नहीं रखते लेकिन मिश्रा के खेल के आगे उन्हें मजबूरी में टीम में शामिल करना पड़ जाता है।
पाक के खिलाफ की थी जबर्दस्त गेंदबाजी
ऐसे में धोनी के पास और कोई चारा नहीं था कि लेग स्पिनर अमित मिश्रा को टीम में शामिल न करें। मजबूरी में ही सही धोनी ने टूर्नामेंट में अपने पहले मुकाबले में पाकिस्तान जैसी टीम के खिलाफ उन्हें शामिल कर मौका दिया।
अमित ने सातवें ओवर से अपनी गेंदबाजी स्पेल शुरू की और पहले ओवर में 6 रन दिए। अमित ने शानदार गेंदबाजी करते हुए अहमद शहजाद और शोएब मलिक के विकेट लिए। चार ओवर में उन्होंने एक मेडन के साथ 22 रन देकर 2 विकेट झटके। उन्हें शानदार गेंदबाजी के लिए मैन ऑफ द मैच चुना गया।
धोनी को रास नहीं आई अमित की गेंदबाजी!
धोनी ने एक बार फिर अमित का स्पेल सातवें ओवर से शुरू करवाया और वह अपनी गेंदबाजी से विपक्षी टीम को खूब परेशान किया और बड़ा स्कोर बनाने का मौका नहीं दिया। चार ओवर में 18 रन देकर दो बड़े विकेट फिर निकाले और मैन ऑफ द मैच का पुरस्कार लगातार दूसरी बार जीत लिया।
अमित के करियर में महज तीन टी-20 मैचों में दो में मैन ऑफ द मैच का पुरस्कार जीतना शायद कप्तान धोनी को रास नहीं आया और उन्हें लगा कि मिश्रा तेजी से अपनी जगह बना रहे हैं जिसका घाटा अश्विन को उठाना पड़ सकता है।
अमित को रोकने को धोनी की यह रणनीति
ऐसे में चतुर कप्तान ने एक ऐसी रणनीति बनाई कि अमित को मैच में रखने के बावजूद ज्यादा कारगर साबित नहीं होने देंगे और मौका हाथ लगते ही टीम से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा। टूर्नामेंट में टीम का तीसरा मैच मेजबान बांग्लादेश के खिलाफ था और भारत इस बार भी पहले गेंदबाजी कर रहा था।
धोनी ने अपने खास गेंदबाज अश्विन को पहले मौका दिया और सुरेश रैना जैसे पार्टटाइम गेंदबाजों को पहले गेंद थमा दी लेकिन अमित मिश्रा को 10वें ओवर में जाकर गेंदबाजी का मौका दिया। मिश्रा अंतिम ओवर में लगातार दो विकेट झटकने में कामयाब रहे। उन्होंने 26 रन देकर तीन विकेट जरूर झटक लिए। लेकिन मैन ऑफ द मैच के रेस से बाहर हो गए और इस बार यह पुरस्कार अश्विन की झोली में चला गया।
धोनी ने चौथे मैच में तो हद ही कर दी
तीन मैचों में दो बार हैट्रिक का मौका गंवाने वाले फिरकी गेंदबाज अमित मिश्रा को अपने कप्तान का ही साथ नहीं मिला।
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारतीय कप्तान ने अमित को जल्द गेंदबाजी करने का मौका फिर नहीं दिया। एक ओर अश्विन को चौथे ओवर में ही मौका दे दिया गया जबकि अमित को अपने पहले ओवर के लिए 11 ओवर तक इंतजार कना पड़ा।
लेकिन इस बार भी उन्होंने धोनी की रणनीति को कामयाब नहीं होने दिया और तीन ओवर में 13 रन देकर दो विकेट झटक लिया। अश्विन इस मैच में भी मैन ऑफ द मैच बने पर अमित ने भी प्रभावशाली गेंदबाजी की।
कोहली की कप्तानी में जमकर मिला मिश्रा को मौका
महेंद्र सिंह धोनी ने भले ही अमित मिश्रा को ज्यादा पसंद नहीं करते हो लेकिन विराट कोहली जब भी टीम इंडिया के कप्तान बने उन्होंने इस गेंदबाज को मौका दिया।
पिछले साल जिंबाब्वे दौरे के दौरान कोहली ने पांच मैचों की वनडे सीरीज में अमित को सभी मैचों में मौका दिया और उन्होंने कुल 18 विकेट झटककर एक सीरीज में सबसे ज्यादा विकेट लेने के वर्ल्ड रिकॉर्ड की बराबरी कर ली।
इसके बाद पिछले महीने कोहली की ही अगुवाई में भारतीय टीम जब एशिया कप खेलने बांग्लादेश आई तो उन्हें पाकिस्तान और अफगानिस्तान के खिलाफ मैच में खेलने का मौका मिला। मिश्रा ने इस मौके का भरपूर फायदा उठाया और टीम एकादश के लिए अपनी दावेदारी ठोक दी।