कोहली की अगुवाई में कितनी सफल होगी टीम इंडिया!
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विराट कोहली को बतौर बल्लेबाज चुनौतियां पसंद हैं। चुनौतियों में वह हमेशा कुंदन की तरह निखरे हैं। उनके जीवट का जवाब नहीं है। वह भारतीय क्रिकेट के सबसे काबिल युवा तुर्क हैं। उनकी ताकत उनका खुद पर भरोसा है। देश के साथ विदेश में वह कामयाब रहे हैं।
अब भारतीय क्रिकेट टीम की रीढ़ बन चुके हैं। लक्ष्य का पीछा करते हुए तो वह और भी लाजवाब हैं। भारत के सबसे कामयाब वनडे कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की मांसपेशी में खिंचाव से विराट कोहली को एशिया कप जैसे महाद्वीप के सबसे बड़े टूर्नामेंट में टीम की कप्तानी का मौका मिला है।
चुनौतियों की कसौटी ने उन्हें घिस कर खालिस कुंदन बना दिया। धोनी यूं भी दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड में भारतीय टीम की टेस्ट और वनडे दोनों में दुर्गत बनने के बाद आलोचकों के निशाने पर थे। धोनी की जिद्दी रवैये की भारत खासी महंगी कीमत चुका है। ऐसे में भले ही संयोग से दोनों को 'आराम' से विराट को टीम इंडिया की कमान मिल गई है।
खिताबी 'छक्के' के इंतजार में टीम इंडिया
टीम इंडिया (1984, 1988, 1990-91, 1995 और 2010) ने सबसे ज्यादा पांच बार खिताब जीता है। ऐसे में विराट की कप्तानी में भारतीय टीम एशिया कप में खिताबी जीत का 'छक्का' जड़ सकती है।
यह खिताब चार बार श्रीलंका (1986, 1997, 20104, 2008) ने और दो बार पाकिस्तान (2002 और 2012) में जीता है। इस बार एशिया कप में भारत, पाकिस्तान, मेजबान बांग्लादेश, श्रीलंका और अफगानिस्तान यानी कुल पांच टीमें शिरकत करेंगी।
सभी टीमें एक दूसरे के खिलाफ खेलेंगी और दो टॉप टीमें फाइनल में खेलेंगी। कोहली के सामने चुनौती भले विराट है लेकिन 25 बरस के इस युवा तुर्क का चुनौतियां के बीच से राह बनाना खूब आता है। विराट कोहली दरअसल हर लिहाज से एकदम कंपलीट बल्लेबाज हैं। उनकी बल्लेबाजी में द्रविड़ की तकनीकी दक्षता, वीरेंद्र सहवाग जैसी आक्रामकता के साथ-साथ सचिन तेंदुलकर का सा विश्वास दिखाई देता है। विराट की बतौर कप्तानी सबसे बड़ी ताकत यह है कि वह खुद मैदान पर एकदम मुस्तैद दिखते हैं।
अंडर-19 वर्ल्ड कप जिता चुके हैं कोहली
विराट कोहली मिजाज से आक्रामक कप्तान तो हैं ही। टीम इंडिया के लिए खेलने के अनुभव ने विराट को और ज्यादा परिपक्व तथा जिम्मेदार बना दिया है।
वह प्रतिद्वंद्वी बल्लेबाज का विकेट लेने के लिए बल्लेबाज के गलती करने का इंतजार करने की बजाय उस पर दबाव बनाकर उसे गलती करने पर मजबूर करते हैं। मैच के मिजाज के मुताबिक तुरंत फैसला लेने और जोखिम उठाने से भी विराट को परहेज नहीं है। विराट भारत की वनडे वर्ल्ड कप के तो अहम सदस्य तो रहे ही हैं अपनी कप्तानी में भारत को अंडर-19 वर्ल्ड कप जिता चुके हैं।
विराट को अपने से सीनियर को भी साथ लेकर चलना खूब आता है। यही कारण है कि वह सीनियर्स से भी बेस्ट प्रदर्शन करने में कामयाब रहते हैं। पिछले संस्करण में उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ सेंचुरी जड़ी थी। वह क्रिकेट के हर फॉर्मेट में अपना सिक्का जमा चुके हैं। चाहे टेस्ट क्रिकेट हो, वनडे या टी-20 सभी में विराट ने अपने करीब पांच बरस के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर में खुद को साबित किया है।
उनकी सबसे बड़ी ताकत यह है कि क्रिकेट में मैच के मिजाज के मुताबिक गियर बदलना उन्हें खूब आता है। वह आगाज जरूर प्रतिद्वंद्वी टीम की बॉलिंग और पिच के मिजाज की थाह लेने के साथ करते हैं। इसके बाद वह प्रतिद्वंद्वी टीम की गेंदबाजी की बखिया ही उधेड़ देते हैं।
श्रीलंका-पाक से मिलेगी भारत को चुनौती
बांग्लादेश में पिचों का मिजाज बहुत कुछ भारत की पिचों का रहेगा। ऐसे में मेजबान बांग्लादेश के खिलाफ बुधवार को अपने अभियान का आगाज करने वाले भारत और उसके कप्तान विराट को पूरी तरह चौकस रहना होगा। बांग्लादेश और श्रीलंका ने यहां सीरीज खेली है।
ऐसे में बांग्लादेश अपनी पिचों पर कमजोर नहीं कहा जा सकता है। दरअसल भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका ही खिताब जीतने के दावेदार हैं। पिछले यानी 2012 के संस्करण में बांग्लादेश की टीम महज दो रन से पाकिस्तान से हार गई थी। इस बार वह खिताब जीतने की हसरत को पूरा करने के ख्वाब को पूरा करने मे कसर नहीं छोड़ेगी।
पिछली बार भारत बांग्लादेश से हारकर सेमीफाइनल में पहुंचने में नाकाम रहा था। धोनी की अब तक की कामयाबियों के चलते उनकी जिद कहें या पूर्वाग्रहों पर चर्चा होती ही नहीं थी। धोनी की पसलियों में चोट के कारण बाहर हैं। ऐसे में विराट के पास अपने सभी संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल कर खिताब जीतने की कोशिश करेंगे।
खासतौर पर विराट ने जिस तरह से जिंबाब्वे सीरीज में धोनी की गैर मौजूदगी में लेग स्पिनर अमित मिश्रा का इस्तेमाल किया था। वह काबिलेतारीफ है। धोनी ने तो अपनी जिद के चलते अमित मिश्रा को 'पैसेंजर' ही बना दिया। विराट ने अमित को मौका दिया तो यह भी साफ हो जाएगा कि वह धोनी की जिद के चलते ही टीम से बाहर हैं। यहां तक भारत के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली तक कह चुके हैं कि अमित फिलहाल भारत के सबसे काबिल लेग स्पिनर हैं।
फिनिशर का रोल विराट को निभाना होगा
धोनी की बतौर कप्तान भले आलोचना हो रही है। बावजूद इसके एक बात साफ है कि धोनी अभी भी बतौर बल्लेबाज मिडलऑर्डर में बेस्ट
फिनिशिर हैं। इन दोनों के साथ युवराज सिंह और सुरेश रैना जैसे फिनिशर टीम में नहीं हैं। खासतौर पर भारतीय उपमहाद्वीप में इनका रिकॉर्ड शानदार रहा है। धोनी ने वनडे में कुल नौ में से एक शतक एशिया कप में जड़ा है। सुरेश रैना ने अब तक अपनी तीन वनडे शतक में से दो एशिया कप में जड़ी हैं।
धोनी में दरअसल मैच के मिजाज के मुताबिक गियर बदलना की कला खूब है। धोनी को मैच में टीम को खासतौर पर अंजाम तक पहुंचाना खूब आता है। ऐसे में मिडलऑर्डर में फिनिशर की जिम्मेदारी खुद विराट के साथ दिनेश कार्तिक, चेतेश्वर पुजारा, अजिंक्य रहाणे और अंबाती रायडू को निभानी होगी।
भारत को अगले विश्व कप में चेतेश्वर पुजारा को बराबर मौका देना है तो तब उन्हें वनडे में बराबर मौके की शुरुआत एशिया कप से करनी होगी। यह भी एक संयोग ही है कि जहां वनडे के लिए धोनी पुजारा पर भरोसा नहीं करते वहीं उन्होंने अब तक अपने दोनों वनडे मैच विराट की कप्तानी में ही खेले हैं। भारत को एशिया कप में कामयाब होने के लिए शिखर धवन और रोहित शर्मा की सलामी जोड़ी को दमदार प्रदर्शन करना होगा। अच्छी बात यह है कि धवन ने टेस्ट सीरीज में ही सही अपनी खोई रंगत पा ली है।
एशिया कप में बेहद सफल रहे हैं कोहली
विराट अब तक वनडे में 18 शतक जड़ चुके हैं। इनमें से 10 लक्ष्य का पीछा करते हुए जड़ी हैं। वह एशिया कप में भी भारत के लिए
सचिन तेंदुलकर और सुरेश रैना की तरह सबसे ज्यादा दो-दो शतक जड़ चुके हैं। सबसे काबिलेतारीफ बात यह है एशिया कप में सर्वाधिक 183 रन का व्यक्तिगत स्कोर भी विराट के नाम है। वह एशिया कप में सात मैचों में दो सेंचुरी सहित 424 रन बना चुके हैं।
भारत के लिए एशिया कप में सबसे ज्यादा 23 मैच और सबसे ज्यादा 971 रन सचिन ने बनाए हैं। एशिया कप में बतौर कप्तान सबसे ज्यादा 13-13 मैच धोनी और श्रीलंका के अर्जुन रणतुंगा ने जीते हैं। दोनों ने समान रूप से 9-9 मैच जीते हैं और चार चार मैच हारे हैं।
विराट अब धोनी के अलग-अलग कारणों से टीम इंडिया से हटने के कारण तीसरी बार कप्तानी संभालेंगे।
भारत के लिए अब तक विराट ने आठ मैचों में कप्तानी की है और इनमें से वह केवल एक ही मैच हारे और बाकी सात जीते हैं। विराट ने इनमें से दो वेस्ट इंडीज के खिलाफ और लगातार पांच जिम्बाब्वे के खिलाफ उसी की धरती पर जीते हैं। यानी बतौर कप्तान पिछले आठ में सात मैच लगातार विदेशी धरती पर जीते हैं।
कोहली को देना होगा अमित को चांस
मोहम्मद शमी, भुवनेश्वर कुमार और स्टुअर्ट बिन्नी के रूप में भारत का पेस अटैक संतुलित नजर आता है। हालांकि टीम में वरुण एरोन और ईश्वर पांडे के रूप में दो और पेसर हैं लेकिन टीम के संयोजन के चलते बतौर ऑलराउंडर बिन्नी का रोल अहम होगा।
विराट को रविचंद्रन अश्विन को टीम से बाहर रखने का दम दिखाना होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि वह बतौर ऑफ स्पिनर अपनी धार नहीं
दिखा पाए हैं। ऐसे में उनकी जगह लेग स्पिनर ब को लेफ्ट ऑर्म स्पिनर रवींद्र जडेजा के साथ उतारना होगा। अमित मिश्रा पर विराट का भरोसा भारत के लिए तुरुप चाल साबित हो सकता है।
अमित मिश्रा विकेट चटकाने वाले बॉलर तो हैं ही साथ ही 30-40 रन बनाने की भी कूवत रखते हैं। कुल मिलाकर यह एशिया कप यह तय करेगा कि विराट कप्तानी के लिए कितने तैयार हैं। एक से तो कतई इनकार नहीं किया जा सकता है यह विराट के लिए बतौर
क्रिकेटर अपना कद और उंचा करने का मौका है।