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और भी कई बड़े गेंदबाज नहीं बच पाए 'शर्मसार' होने से
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Wed, 10 Sep 2014 03:51 PM IST
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आईसीसी ने पाकिस्तान के नंबर वन गेंदबाज सईद अजमल पर गेंदबाजी करने से रोक लगा दी है। अजमल पर रोक लगाने के बाद विवादित गेंदबाजी एक्शन पर फिर से सवाल उठने लगे हैं। संदिग्ध गेंदबाजी एक्शन के कारण प्रतिबंध झेलने वाले अजमल दुनिया के पहले गेंदबाज नहीं हैं।
क्रिकेट में संदिग्ध गेंदबाजी एक्शन विवाद की शुरुआत आज से सवा सौ साल पहले यानी 1877 में हुई थी। तब से लेकर दुनिया के कई गेंदबाजों को उनकी गेंदबाजी एक्शन के कारण प्रतिबंधित किया जा चुका है।
आईसीसी नियम के अनुसार किसी भी गेंदबाज का हाथ गेंदबाजी के दौरान 15 डिग्री से ज्यादा नहीं मुड़ना चाहिए। आइए, जानते हैं कि 1999 के बाद से कौन-कौन से बड़े गेंदबाजों को उनकी गेंदबाजी एक्शन के कारण मशीनों के सामने कड़े परीक्षण से गुजरना पड़ा और बैन का दंश झेलना पड़ा।
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क्रिकेट में संदिग्ध गेंदबाजी एक्शन विवाद की शुरुआत आज से सवा सौ साल पहले यानी 1877 में हुई थी। तब से लेकर दुनिया के कई गेंदबाजों को उनकी गेंदबाजी एक्शन के कारण प्रतिबंधित किया जा चुका है।
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आईसीसी नियम के अनुसार किसी भी गेंदबाज का हाथ गेंदबाजी के दौरान 15 डिग्री से ज्यादा नहीं मुड़ना चाहिए। आइए, जानते हैं कि 1999 के बाद से कौन-कौन से बड़े गेंदबाजों को उनकी गेंदबाजी एक्शन के कारण मशीनों के सामने कड़े परीक्षण से गुजरना पड़ा और बैन का दंश झेलना पड़ा।
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एक्शन को लेकर विवादों में रहे मुरलीधरन
श्रीलंका के करिश्माई गेंदबाज मुथैया मुरलीधरन को भी अपने गेंदबाजी एक्शन के कारण परीक्षण के दौर से गुजरना पड़ा है। 1995 में मेलबर्न में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट मैच के दौरान मुरलीधरन की एक अयोग्य गेंद को अंपायर डेरेल हायर ने नो बॉल करार दिया। इसके बाद से दोनों टीमो के बीच विवाद बढ़ता चला गया।
मुरलीधरन की गेंद को नो बॉल करार देने का सिलसिला आगे भी चला। इसी दौरे के दौरान ब्रिसबेन वनडे में अंपायर रॉस इमर्सन ने भी उनकी एक गेंद को नो बॉल दे दिया। तीन साल बाद श्रीलंका के ऑस्ट्रेलियाई दौरे के दौरान इमर्सन ने एक बार फिर मुरली की गेंद को नो बॉल कर दिया, इस घटना से कप्तान अर्जुन रणतुंगा बेहद नाराज हो गए और उन्होंने मैच को रद कराने की धमकी देने लगे।
विवादों के बावजूद मुरलीधरन को 19 साल के करियर में कभी भी गेंदबाजी करने से प्रतिबंधित नहीं किया गया। हालांकि उन्हें गेंदबाजी के लिए ऑस्ट्रेलिया में कड़े परीक्षण से गुजरना पड़ा।
मुरलीधरन की गेंद को नो बॉल करार देने का सिलसिला आगे भी चला। इसी दौरे के दौरान ब्रिसबेन वनडे में अंपायर रॉस इमर्सन ने भी उनकी एक गेंद को नो बॉल दे दिया। तीन साल बाद श्रीलंका के ऑस्ट्रेलियाई दौरे के दौरान इमर्सन ने एक बार फिर मुरली की गेंद को नो बॉल कर दिया, इस घटना से कप्तान अर्जुन रणतुंगा बेहद नाराज हो गए और उन्होंने मैच को रद कराने की धमकी देने लगे।
विवादों के बावजूद मुरलीधरन को 19 साल के करियर में कभी भी गेंदबाजी करने से प्रतिबंधित नहीं किया गया। हालांकि उन्हें गेंदबाजी के लिए ऑस्ट्रेलिया में कड़े परीक्षण से गुजरना पड़ा।
हरभजन के एक्शन पर था विवाद
भारतीय फिरकी गेंदबाज और 'टर्बनेटर' के नाम से मशहूर हरभजन सिंह की गेंदबाजी एक्शन को अंपायर डेरेल हायर ने अपनी कितबा में गलत करार दिया था। यह वही हायर हैं जिन्होंने मुरलीधरन की एक गेंद को नो बॉल करार दिया था।
हरभजन को भी अपने एक्शन के कारण लंबे परीक्षण से गुजरना पड़ा था। मार्च, 2005 में पाकिस्तान के खिलाफ कोलकाता टेस्ट में उनकी गेंदबाजी एक्शन पर सवाल उठाए गए थे। इस मैच में उन्होंने 145 रन देकर 4 विकेट झटके थे।
इससे पहले 1998 में भी उनके एक्शन पर सवाल उठे थे लेकिन तब भी प्रतिबंध से बच गए थे।
हरभजन को भी अपने एक्शन के कारण लंबे परीक्षण से गुजरना पड़ा था। मार्च, 2005 में पाकिस्तान के खिलाफ कोलकाता टेस्ट में उनकी गेंदबाजी एक्शन पर सवाल उठाए गए थे। इस मैच में उन्होंने 145 रन देकर 4 विकेट झटके थे।
इससे पहले 1998 में भी उनके एक्शन पर सवाल उठे थे लेकिन तब भी प्रतिबंध से बच गए थे।
शोएब अख्तर पर लगा था प्रतिबंध
मुरलीधरन और हरभजन सिंह तो गलत गेंदबाजी एक्शन के आरोप लगने के बावजूद प्रतिबंध से बच गए, लेकिन ऐसे कई गेंदबाज हैं जो प्रतिबंध की मार से बचा नहीं सके।
दुनिया के सबसे तेज गेंदबाजों में शुमार शोएब अख्तर भी संदिग्ध गेंदबाजी एक्शन की मार झेल चुके हैं। दिसंबर, 1999 में पर्थ में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट मैच के दौरान उनकी गेंदबाजी एक्शन गलत पाया गया और उन पर एक महीने का बैन लग गया।
एक्शन में सुधार के बाद वापसी करने के बावजूद जनवरी, 2001 में भी बैन लगा। हालांकि बाद में फिर मैदान पर लौटने में कामयाब हो गए।
दुनिया के सबसे तेज गेंदबाजों में शुमार शोएब अख्तर भी संदिग्ध गेंदबाजी एक्शन की मार झेल चुके हैं। दिसंबर, 1999 में पर्थ में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट मैच के दौरान उनकी गेंदबाजी एक्शन गलत पाया गया और उन पर एक महीने का बैन लग गया।
एक्शन में सुधार के बाद वापसी करने के बावजूद जनवरी, 2001 में भी बैन लगा। हालांकि बाद में फिर मैदान पर लौटने में कामयाब हो गए।
2005 में शब्बीर अहमद पर लगा पहली बार बैन
पाकिस्तान के ही तेज गेंदबाज शब्बीर अहमद भी गलत गेंदबाजी एक्शन के कारण प्रतिबंध का दंश झेल चुके हैं। दिसंबर, 2005 में उनकी गेंदबाजी शैली के कारण 12 महीने का बैन लगा दिया गया।
कुछ समय बाद एक बार फिर उनके एक्शन की जांच हुई, जिसमें आईसीसी ने उनके सुधरे हुए एक्शन को सही माना, लेकिन वह फिर कभी टेस्ट मैच नहीं खेल सके। हालांकि बाद में वह लंबे समय तक पाकिस्तान में घरेलू क्रिकेट खेलते रहे।
कुछ समय बाद एक बार फिर उनके एक्शन की जांच हुई, जिसमें आईसीसी ने उनके सुधरे हुए एक्शन को सही माना, लेकिन वह फिर कभी टेस्ट मैच नहीं खेल सके। हालांकि बाद में वह लंबे समय तक पाकिस्तान में घरेलू क्रिकेट खेलते रहे।
इंग्लैंड ने अपने ही गेंदबाज पर लगा दिया बैन
इंग्लैंड के तेज गेंदबाज जेम्स कर्टले पर अक्टूबर, 2005 में गेंदबाजी करने से बैन लगा। हालांकि यह बैन आईसीसी के बजाए इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) ने लगाया था।
बाद में उनके एक्शन को सही मान लिया गया, लेकिन उनके एक्शन पर हमेशा सवाल उठते रहे। उन्होंने अक्टूबर, 2001 में जिम्बाब्वे के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत की थी लेकिन शुरू से ही उनके एक्शन पर सवाल उठते रहे।
एक्शन के कारण लगातार विवादों में रहने के कारण कर्टले ने 2010 में क्रिकेट से संन्यास ले लिया।
बाद में उनके एक्शन को सही मान लिया गया, लेकिन उनके एक्शन पर हमेशा सवाल उठते रहे। उन्होंने अक्टूबर, 2001 में जिम्बाब्वे के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत की थी लेकिन शुरू से ही उनके एक्शन पर सवाल उठते रहे।
एक्शन के कारण लगातार विवादों में रहने के कारण कर्टले ने 2010 में क्रिकेट से संन्यास ले लिया।
जोहान बोथा पर भी लगा था प्रतिबंध
दक्षिण अफ्रीकी टीम के ऑफ स्पिनर जोहान बोथा को उनके एक्शन के कारण फरवरी, 2006 में अंतरराष्ट्रीय मैचों में गेंदबाजी से बैन कर दिया गया था। यह फैसला सिडनी में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट मैच में उनके एक्शन को देखते हुए लिया गया था।
आईसीसी ने उन्हें सुझाव दिया कि वह एक्शन में सुधार के साथ गेंदबाजी के लिए अनुमति हासिल कर सकते हैं। जांच करने वाली स्वतंत्र टीम ने पाया था कि उनकी गेंदबाजी तय मानकों के अनुरूप नहीं है।
2007 में उन्होंने अपने एक्शन में सुधार के साथ अपना परीक्षण कराया जिसे आईसीसी ने ओके कर दिया। 2009 में वह उस समय फिर से चर्चा में आए जब आईसीसी ने उनको 'दूसरा' डालने से रोक दिया। जांच में पाया गया कि बोथा की ऑफ-ब्रेक और ऑर्म बॉल डालने के दौरान उनकी कुहनी 15 डिग्री से ज्यादा मुड़ती है।
आईसीसी ने एक बार फिर उन्हें अपनी गेंदबाजी एक्शन में सुधार के साथ टेस्ट दे सकते हैं या फैसले के खिलाफ 14 दिन के अंदर अपील कर सकते हैं। लेकिन उन्होंने तय सीमा में अपना सुधार कर लिया।
आईसीसी ने उन्हें सुझाव दिया कि वह एक्शन में सुधार के साथ गेंदबाजी के लिए अनुमति हासिल कर सकते हैं। जांच करने वाली स्वतंत्र टीम ने पाया था कि उनकी गेंदबाजी तय मानकों के अनुरूप नहीं है।
2007 में उन्होंने अपने एक्शन में सुधार के साथ अपना परीक्षण कराया जिसे आईसीसी ने ओके कर दिया। 2009 में वह उस समय फिर से चर्चा में आए जब आईसीसी ने उनको 'दूसरा' डालने से रोक दिया। जांच में पाया गया कि बोथा की ऑफ-ब्रेक और ऑर्म बॉल डालने के दौरान उनकी कुहनी 15 डिग्री से ज्यादा मुड़ती है।
आईसीसी ने एक बार फिर उन्हें अपनी गेंदबाजी एक्शन में सुधार के साथ टेस्ट दे सकते हैं या फैसले के खिलाफ 14 दिन के अंदर अपील कर सकते हैं। लेकिन उन्होंने तय सीमा में अपना सुधार कर लिया।
सैमुअल्स पर 2008 में लगा पहली बार बैन
फरवरी, 2008 में कैरेबियाई गेंदबाज मार्लोन सैमुअल्स पर डरबन में खेले गए दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट मैच में उनकी गेंदबाजी एक्शन को देखते हुए बैन लगा दिया गया था। जांच में पाया गया कि जब वह ऑफ-ब्रेक डालते हैं तो 27 डिग्री और जब तेज गेंद डालने की कोशिश करते हैं तो उनकी कुहनी 35 डिग्री तक मुड़ जाती है।
हालांकि वह बतौर बल्लेबाज टीम के साथ जुड़े रहे, लेकिन गेंदबाजी करने की इजाजत नहीं मिली। बाद में एक्शन में सुधार के साथ गेंदबाजी की अनुमति मिली।
लेकिन दिसंबर, 2013 में भारत के खिलाफ टेस्ट सीरीज में जल्दी-जल्दी गेंदबाजी करने की शिकायत मिलने के कारण उनको एक बार फिर गेंदबाजी से प्रतिबंधित कर दिया गया।
हालांकि वह बतौर बल्लेबाज टीम के साथ जुड़े रहे, लेकिन गेंदबाजी करने की इजाजत नहीं मिली। बाद में एक्शन में सुधार के साथ गेंदबाजी की अनुमति मिली।
लेकिन दिसंबर, 2013 में भारत के खिलाफ टेस्ट सीरीज में जल्दी-जल्दी गेंदबाजी करने की शिकायत मिलने के कारण उनको एक बार फिर गेंदबाजी से प्रतिबंधित कर दिया गया।
बांग्लादेश के रज्जाक पर लगा था बैन
2008 में एक स्वतंत्र जांच करने वाली कमिटी ने बांग्लादेश के ऑफ स्पिनर अब्दुर रज्जाक की गेंदबाजी एक्शन को गलत पाया जिस कारण्ा आईसीसी ने उन पर गेंदबाजी से बैन लगा दिया।
बाद में मार्च, 2009 में आईसीसी ने उनका निलंबन रद कर दिया क्योंकि उन्होंने अपने गेंदबाजी एक्शन में काफी सुधार किया था।
बाद में मार्च, 2009 में आईसीसी ने उनका निलंबन रद कर दिया क्योंकि उन्होंने अपने गेंदबाजी एक्शन में काफी सुधार किया था।
'दूसरा' नहीं डाल सकते शिलिंगफोर्ड
विंडीज टीम के ऑफ स्पिनर शेन शिलिंगफोर्ड पर 2010 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पोर्ट ऑफ स्पेन में पहले टेस्ट मैच में उनकी गेंदबाजी एक्शन गलत पाए जाने के बाद गेंदबाजी करने से रोक लगा दी गई थी।
मई, 2011 में एक्शन में सुधार के साथ परीक्षण कराया जिस पर आईसीसी ने उन्हें अनुमति दे दी। हालांकि उनकी गेंदबाजी एक्शन पर कई बार परीक्षण किया गया।
दिसंबर, 2013 में एक बार फिर उनको न्यूजीलैंड दौरे के दौरान अंतरराष्ट्रीय मैचों में गेंदबाजी करने से रोक दिया गया। आईसीसी ने अपने बयान में कहा था कि ऑफ-ब्रेक गेंदबाजी के दौरान उनकी कुहनी तय मानकों के आधार पर मुड़ती है लेकिन 'दूसरा' डालने के दौरान उनकी कुहनी 15 डिग्री से ज्यादा मुड़ जाती है।
हालांकि मार्च, 2014 में सुधार के साथ टेस्ट देने के बाद उनके एक्शन को सही मान लिया गया। लेकिन अभी भी उनके 'दूसरा' डालने पर प्रतिबंध लगा हुआ है।
मई, 2011 में एक्शन में सुधार के साथ परीक्षण कराया जिस पर आईसीसी ने उन्हें अनुमति दे दी। हालांकि उनकी गेंदबाजी एक्शन पर कई बार परीक्षण किया गया।
दिसंबर, 2013 में एक बार फिर उनको न्यूजीलैंड दौरे के दौरान अंतरराष्ट्रीय मैचों में गेंदबाजी करने से रोक दिया गया। आईसीसी ने अपने बयान में कहा था कि ऑफ-ब्रेक गेंदबाजी के दौरान उनकी कुहनी तय मानकों के आधार पर मुड़ती है लेकिन 'दूसरा' डालने के दौरान उनकी कुहनी 15 डिग्री से ज्यादा मुड़ जाती है।
हालांकि मार्च, 2014 में सुधार के साथ टेस्ट देने के बाद उनके एक्शन को सही मान लिया गया। लेकिन अभी भी उनके 'दूसरा' डालने पर प्रतिबंध लगा हुआ है।
श्रीलंका के सचित्रा सेनानायके
श्रीलंका के फिरकी गेंदबाज सचित्रा सेनानायके पर जुलाई, 2014 में आईसीसी ने गेंदबाजी करने से बैन लगा दिया था। कार्डिफ में बायो-मैकेनिकल लैब में उनकी गेंदबाजी एक्शन का परीक्षण के दौरान आईसीसी के नियमों के अनुरूप गेंदबाजी नहीं करने के कारण गेंदबाजी से बैन लगा दिया गया।
सेनानायके पर इस साल 31 मई को इंग्लैंड के खिलाफ वनडे मैच में उनकी गेंदबाजी शैली को गलत माना गया। जिस पर जून में उनकी परीक्षण किया गया। टेस्ट के दौरान उनकी सभी चारों शैलियों को 15 डिग्री मोड़ के अंदर डालने को कहा गया, जिसमें वह सफल नहीं रहे।
इसके बाद पर्थ में अपने एक्शन में सुधार के लिए प्रयास कर रहे हैं। उनका लक्ष्य नवंबर में इंग्लैंड में होने वाले 7 मैचों की वनडे सीरीज के लिए श्रीलंका टीम में वापसी करने पर है।
सेनानायके पर इस साल 31 मई को इंग्लैंड के खिलाफ वनडे मैच में उनकी गेंदबाजी शैली को गलत माना गया। जिस पर जून में उनकी परीक्षण किया गया। टेस्ट के दौरान उनकी सभी चारों शैलियों को 15 डिग्री मोड़ के अंदर डालने को कहा गया, जिसमें वह सफल नहीं रहे।
इसके बाद पर्थ में अपने एक्शन में सुधार के लिए प्रयास कर रहे हैं। उनका लक्ष्य नवंबर में इंग्लैंड में होने वाले 7 मैचों की वनडे सीरीज के लिए श्रीलंका टीम में वापसी करने पर है।
प्रतिबंध के बावजूद अंतरराष्ट्रीय मैच खेल सकते हैं केन
न्यूजीलैंड के पार्ट टाइम गेंदबाज केन विलियम्सन पर इसी साल पर गेंदबाजी से बैन लगाया गया। विंडीज के खिलाफ त्रिनिदाद में खेले गए टेस्ट मैच के दौरान उनके एक्शन को गलत माना गया।
बाद में लैब परीक्षण में भी उनके एक्शन तय मानकों से काफी खराब रहा जिस कारण आईसीसी ने अंतरराष्ट्रीय मैचों में गेंदबाजी से रोक लगा दी। हालांकि वह बतौर बल्लेबाज न्यूजीलैंड के लिए खेल सकते हैं।
हालांकि आईसीसी ने उन्हें गेंदबाजी एक्शन में सुधार करके टेस्ट परीक्षण करवाने के बाद गेंदबाजी करने की अनुमति हासिल करने का मौका दे दिया है।
बाद में लैब परीक्षण में भी उनके एक्शन तय मानकों से काफी खराब रहा जिस कारण आईसीसी ने अंतरराष्ट्रीय मैचों में गेंदबाजी से रोक लगा दी। हालांकि वह बतौर बल्लेबाज न्यूजीलैंड के लिए खेल सकते हैं।
हालांकि आईसीसी ने उन्हें गेंदबाजी एक्शन में सुधार करके टेस्ट परीक्षण करवाने के बाद गेंदबाजी करने की अनुमति हासिल करने का मौका दे दिया है।