अर्जुन विजेताओं के चयन में बदलाव नहीं
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खेल मंत्रालय ने विवादों के बाद अर्जुन अवॉर्ड के चयन को दोबारा बैठक बुला तो ली लेकिन कपिल देव की अगुवाई वाली कमेटी ने अपने पुराने फैसले पर कायम रहते हुए इसमें किसी तरह के बदलाव से इंकार कर दिया। इससे अर्जुन अवॉर्ड पर और ज्यादा विवाद गहराने की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
खास बात यह है कि कमेटी ने यह स्वीकार किया कि दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स के गोल्ड मेडलिस्ट मनोज कुमार के बारे में गलत जानकारी दी गई लेकिन बॉक्सर जय भगवान को अर्जुन अवॉर्ड के लिए चुने जाने पर उनका फैसला अंतिम है।
मनोज ने इस अन्याय की कहानी पीएम नरेंद्र मोदी को बताने का फैसला लिया है। साथ ही वह अदालत का दरवाजा भी खटखटाएंगे। वहीं हॉकी इंडिया के सेक्रेटरी जनरल नरेंद्र बत्रा ने सूचना के अधिकार कानून के तहत कुछ विवादित जानकारियां खेल मंत्रालय से मांग ली हैं।
कमेटी पुराने फैसले पर कायम
अर्जुन अवॉर्ड के लिए नहीं चुने जाने पर मनोज कुमार ने खेल मंत्री सर्वानंद सोनोवाल से मुलाकात कर कहा था कि उन्हें कमेटी की बैठक में डोप पॉजिटिव बताया गया है जबकि उनके साथ ऐसा कभी नहीं हुआ।
जांच में उनका आरोप सही पाया गया। तभी खेल मंत्री ने दोबारा बैठक बुलाने के आदेश दिए थे। सूत्रों के अनुसार बैठक में जब निर्णय नहीं बदला गया तो एक जानी मानी एथलीट ने यहां तक कहा कि वह सिर्फ चाय पीने यहां आई थीं। यह चाय तो एक लाख रुपये से भी अधिक की पड़ी।
बाद में कपिल देव ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अवॉर्ड केरल राज्य के लोगों को नहीं बल्कि भारत के खिलाड़ियों को दिया गया है। इसमें कोई कोताही नहीं बरती गई है।
वहीं मनोज के भाई राजेश ने बताया कि वह दोनों पीएम से मुलाकात करने की कोशिश करेंगे। अदालत भी जाएंगे वरना क्या गारंटी है कि अगले वर्ष भी उन्हें यह अवॉर्ड मिलेगा भी या नहीं। साथ ही उन्हें डोप में घसीटकर नाम बदनाम करने की भी कोशिश की गई।
पीएम मोदी से करेंगे शिकायत
प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कारों को लेकर इस वर्ष विरोध और असंतोष के स्वर लगातार बुलंद होते जा रहे हैं।
अब अखिल भारतीय कैरम महासंघ ने अपने दो खिलाड़ियों रश्मि कुमारी और योगेश परदेशी को इन पुरस्कारों के लिए नजरअंदाज किए जाने पर गहरा असंतोष जताया है।
रश्मि मौजूदा विश्व चैंपियन और राष्ट्रीय चैंपियन हैं जबकि परदेशी एक बार विश्व चैंपियन, तीन बार राष्ट्रीय चैंपियन, दो बार विश्व कप विजेता, पांच बार सार्क चैंपियन और एक बार आईसीएफ कप विजेता रह चुके हैं।
महासंघ ने एक बयान जारी कर कहा, "आखिरी बार 1996 में कैरम खिलाड़ी मारिया इरूदयम को अर्जुन पुरस्कार मिला था लेकिन उसके बाद से कैरम खिलाड़ी हर वर्ष इन पुरस्कारों के लिए भेदभाव का शिकार होते हैं।"