BCCI को झटका, मुद्गल समिति ही करेगी 13 दागियों की जांच
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एन श्रीनिवासन को शुक्रवार को उस समय तगड़ा झटका लगा जब सुप्रीम कोर्ट ने आईपीएल में सट्टेबाजी और स्पॉट फिक्सिंग प्रकरण में उनकी और 12 अन्य प्रमुख खिलाड़ियों के खिलाफ जांच का आदेश दिया।
सर्वोच्च अदालत ने बीसीसीआई की ओर से प्रस्तावित समिति से जांच कराने के प्रस्ताव को ठुकराते हुए जस्टिस मुकुल मुद्गल समिति को जांच की जिम्मेदारी सौंपी है।
मुकुल मुद्गल समिति ने इससे पहले भी फिक्सिंग प्रकरण की जांच करके सीलबंद लिफाफे में अपनी रिपोर्ट अदालत को सौंपी थी जिसमें श्रीनिवासन और 12 खिलाड़ियों के नामों का उल्लेख है।
कोर्ट ने जांच समिति में किया बदलाव
इस समिति में अतिरिक्त सालिसीटर जनरल एल नागेश्वर राव और वकील निलय दत्ता भी शामिल हैं।
सीबीआई विशेष निदेशक एमएल शर्मा के स्थान पर वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी बीबी मिश्रा के नेतृत्व में जांच अधिकारियों के समूह को शीर्षस्थ अदालत ने मुद्गल समिति की जांच में सहयोग करने को कहा है। साथ ही इस समिति को जांच करने, तलाशी लेने तथा संबंधित दस्तावेज जब्त करने और साक्ष्य दर्ज करने का अधिकार होगा।
किसी को गिरफ्तार नहीं कर सकती समिति
पीठ ने कहा कि जांच समिति को किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करने का अधिकार नहीं होगा। इस समिति की जांच में दिल्ली, मुंबई और चेन्नई पुलिस भी सहयोग करेगी।
देश की सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि श्रीनिवासन और बीसीसीआई के अध्यक्ष पद से हटने के बाद अंतरिम अध्यक्ष के रूप में सुनील गावस्कर और शिवलाल यादव अगले आदेश तक इस पद पर काम करते रहेंगे।
पीठ ने कहा कि श्रीनिवासन समेत 13 लोगों के खिलाफ आरोपों पर गौर करने के बाद हमारी राय में जस्टिस मुद्गल समिति को आगे जांच करनी चाहिए।
13 लोगों के नामों का खुलासा न होने पाए
शीर्षस्थ अदालत ने बीसीसीआई को जांच दल के चेयरमैन और उसके सदस्यों के सभी खर्च उठाने का आदेश भी दिया है।
साथ ही हरेक कार्य दिवस के लिए प्रत्येक को एक लाख रुपए का भुगतान करने का निर्देश दिया है।