मैरीकॉम के मुक्के से कांस्य पक्का

Vikrant Chaturvedi Updated Tue, 14 Aug 2012 12:44 PM IST
mary kom has confirmed olympic bronze
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मैरीकॉम के ताबड़तोड़ मुक्कों ने भारत के लिए गोल्ड की राह खोल दी है। पांच बार की वर्ल्ड चैंपियन ने इतिहास रचते हुए लंदन ओलंपिक में भारत का चौथा पदक पक्का कर दिया है। उन्होंने ट्यूनीशिया की मारुआ रहाली को 15-6 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई। अब इस स्पर्धा में भारत को कम से कम कांस्य पदक तो मिलेगा ही। साथ ही मैरीकॉम स्वर्ण पदक की दौड़ में भी अभी बरकरार है।
पदकों के मामले में ओलंपिक खेलों के 116 सालों के इतिहास में यह भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। इससे पहले बीजिंग ओलंपिक में भारत ने एक स्वर्ण, दो कांस्य सहित कुल तीन पदक अपने नाम किए थे। उल्लेखनीय है कि महिला मुक्केबाजी को पहली बार ओलंपिक में शामिल किया गया है।

राउंड--1--2--3--4--कुल स्कोर
मैरीकॉम--2--3--6--4--15
रहाली--1--2--2--6

सेमीफाइनल मुकाबला कल
फाइनल में जगह पक्की करने के लिए अब मैरीकॉम की भिड़ंत बुधवार को दूसरी वरीयता प्राप्त ब्रिटेन की निकोला एडम्स से होगी। मुकाबला भारतीय समयानुसार शाम 6 बजे शुरू होगा।

मैरीकॉम प्रोफाइल
-क्लब का नाम : मैरीकॉम बॉक्सिंग एकेडमी
-कोच : चार्ल्स एटकिंसन, अनूप कुमार
-2 बच्चों रेचुंगवार और खुपनीवार की मां हैं मैरीकॉम
-51 किग्रा. भारवर्ग में विश्व की चौथे नंबर की महिला मुक्केबाज
-सभी 6 वर्ल्ड चैंपियनशिप में पदक जीतने वाली विश्व की एकमात्र महिला मुक्केबाज

एथलीट से मुक्केबाज तक
स्कूली स्तर पर मैरीकॉम अच्छी एथलीट थीं। वह 400 मीटर दौड़ और जेवलिन थ्रो की स्पर्धाओं में हिस्सा लेती थीं। मगर किस्मत उनके लिए महिला मुक्केबाजी का शिखर तय कर चुकी थी। ऐसे में आठवीं क्लास के बाद खेलों के प्रति रुझान और डिंको सिंह की प्रेरणा से उनका लगाव बॉक्सिंग से बढ़ता गया। तब मैरीकॉम के हाथों में किताबों की जगह बॉक्सिंग ग्लव्स ने ले ली।

सब इंस्पेक्टर मैरीकॉम
खेलों के प्रति प्रतिबद्धता और कड़ी मेहनत को देखते हुए मणिपुर सरकार ने 2005 में उन्हें सब इंस्पेक्टर बना दिया। 2008 में उन्हें इंस्पेक्टर और फिर 2010 में उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) के पद पर पदोन्नत कर दिया गया।

उपलब्धियां
-महिला विश्व एमेच्योर बॉक्सिंग चैंपियनशिप
-स्वर्ण, 2010 ब्रिजटाउन (बारबडोस)
-स्वर्ण, 2008 निंगबो (चीन)
-स्वर्ण, 2006 नई दिल्ली (भारत)
-स्वर्ण, 2005 पोडोल्सक (रूस)
-स्वर्ण, 2002 अंताल्या (टर्की)
-रजत, 2001 पेनसिल्वेनिया (अमेरिका)

एशियाई महिला मुक्केबाजी चैंपियनशिप
-स्वर्ण, 2012
-स्वर्ण, 2010, अस्ताना (कजाखस्तान)
-स्वर्ण 2005 ताइवान
-स्वर्ण, 2003 हिसार (भारत)
-रजत, 2008 गुवाहाटी (भारत)

एशियन गेम्स
कांस्य, 2010 गुआंगझू (चीन)

इंडोर एशियन गेम्स
-स्वर्ण 2009 हनोई (वियतनाम)
-राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में 28 स्वर्ण सहित 35 से ज्यादा पदक

सम्मान व पुरस्कार
-सुपरमॉम का सम्मान
-राजीव गांधी खेल रत्न
-अर्जुन पुरस्कार
-पद्मश्री पुरस्कार

फर्श से अर्श तक का सफर
मणिपुर के बेहद गरीब परिवार में 1 मार्च 1983 को जन्मीं मैरीकॉम को परेशानी और तकलीफें विरासत में मिलीं। मगर इरादों की पक्की मैरीकॉम ने न इसका रोना रोया और न ही कभी इनसे हार मानी। दिन में माता-पिता के साथ लकड़ियां काटने, चारकोल बनाने और मछलियां पकड़ने में उनकी मदद करतीं तो शाम को दोनों छोटी बहनों और एक भाई की देखभाल करतीं। इन्हीं जिम्मेदारियों के बीच महिला मुक्केबाजी की दुनिया पर राज करने का सपना भी मन के एक कोने में मजबूती से पलता रहा।

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