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73 साल बाद इतिहास रचने का मौका चूक गई टीम

Mon, 03 Feb 2014 03:52 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
अमर उजाला, दिल्ली Updated Mon, 03 Feb 2014 03:52 PM IST
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mahrastra lost to chance to lift ranji trophy after 73 years

कर्नाटक ने शानदार प्रदर्शन करते हुए महाराष्ट्र को रणजी ट्रॉफी फाइनल के पांचवें और अंतिम दिन रविवार को सात विकेट से हराकर सातवीं बार घरेलू चैंपियन बनने का गौरव हासिल कर लिया।

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हालांकि मैच की पहली पारी में बनाए 515 रन के विशाल स्कोर के बाद कर्नाटक की जीत मैच के चौथे दिन ही तय हो गई थी जब उसने पहली पारी के आधार पर 210 रन की महत्वपूर्ण बढ़त हासिल कर ली थी।
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हैदराबाद के उप्पल स्थित राजीव गांधी इंटरनेशनल स्टेडियम में महाराष्ट्र ने अंतिम दिन छह विकेट पर 272 रन से आगे खेलना शुरू किया और उसकी दूसरी पारी 366 रन पर सिमट गई। कर्नाटक को जीत के लिए 157 रन का मामूली लक्ष्य मिला और उसने संभलकर खेलते हुए 40.5 ओवर में तीन विकेट खोकर जीत हासिल कर ली।

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खत्म हुआ 14 साल का खिताबी सूखा

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इस तरह कर्नाटक ने 14 साल बाद खिताबी सूखा खत्म करते हुए रणजी खिताब जीत लिया और महाराष्ट्र का 73 साल बाद पहली बार रणजी चैंपियन बनने का सपना तोड़ दिया।

कर्नाटक ने 2009-10 में भी फाइनल में जगह बनाई थी लेकिन तब उसे मुंबई के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। इससे पहले कर्नाटक ने 11 बार फाइनल में जगह बनाई और उसने 1973-74, 1977-78, 1982-83, 1995-96, 1997-98 और 1998-99 में रणजी खिताब जीते थे।

मुंबई के पास सर्वाधिक 40 बार रणजी ट्रॉफी जीतने का रिकॉर्ड है। इसके बाद दूसरे स्‍थान पर दिल्‍ली सात खिताब जीतकर थी लेकिन कर्नाटक ने सातवीं बार यह खिताब जीतकर इस मामले में संयुक्त रूप से दूसरे स्‍थान पर आ गई है।

आखिरी बार 1940-41 में बने थे चैंपियन

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महाराष्ट्र की टीम रणजी ट्रॉफी के ग्रुप ‘सी’ में अपराजेय रही थी और फिर उसने क्वार्टर फाइनल में 40 बार की चैंपियन टीम मुंबई को शिकस्त दी थी। इसके बाद महाराष्ट्र ने इंदौर में खेले गए सेमीफाइनल में बंगाल को 10 विकेट से हराया था।

महाराष्ट्र की टीम 1940-41 के बाद पहली बार खिताब जीतने का सपना लेकर मैदान में उतरी थी। लेकिन पहली पारी में बल्लेबाजों के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद उसकी इतिहास दोहराने की उम्मीदें धूमिल हो गईं थी।

हालांकि महाराष्ट्र ने दूसरी पारी में गेंद और बल्ले से वापसी करने की कोशिश की लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। इससे पहले महाराष्ट्र को 1992-93 में फाइनल में पंजाब के हाथों हार का सामना करना पड़ा था।

जीत में विनय का 'तिहारा शतक' भी

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जीत हासिल करते ही कर्नाटक टीम के खिलाड़ी खुशी से झूम उठे और उन्होंने एक-दूसरे को गले से लगा लिया। कर्नाटक के लिए पहली पारी में शतक जड़ने वाले ओपनर लोकेश राहुल को ‘मैन ऑफ द मैच’ दिया गया। कर्नाटक के कप्तान आर विनय कुमार ने दूसरी पारी में चार विकेट झटके और प्रथम श्रेणी क्रिकेट में अपने 300 विकेट पूरे किए।

इससे पहले जीत के लिए 157 रन के मामूली रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी कर्नाटक की टीम के लिए रोबिन उथप्पा (36) और लोकेश राहुल (29) ने पहले विकेट के लिए 65 रन जोड़कर टीम को ठोस शुरुआत दिलाई। उथप्पा 47 गेंदों में छह चौकों की मदद से 36 रन बनाकर अक्षय दाडेकर की गेंद पर चिराग खुराना के हाथों लपके गए।

पहली पारी के शतकवीर लोकेश राहुल 66 गेंदों में तीन चौकों और दो छक्कों की मदद से 29 रन बनाकर श्रीकांत मुंडे की गेंद पर चिराग खुराना को कैच थमा बैठे। अमित वर्मा (38) और मनीष पांडे (नाबाद 28) के ने तीसरे विकेट के लिए 33 रन की साझेदारी कर टीम को जीत के करीब पहुंचाया। अमित 49 गेंदों में छह चौकों और एक छक्के की मदद से 38 रन बनाकर आउट हुए। आखिर में मनीष और करुण नायर (नाबाद 20) ने कर्नाटक को जीत की मंजिल पर पहुंचा दिया। नायर ने चिराग खुराना की लगातार गेंदों पर चौका और छक्का जड़कर कर्नाटक को चैंपियन बना दिया। महाराष्ट्र की ओर से दाडेकर खुराना और मुंडे ने एक-एक विकेट लिया।

'व्यक्तिगत उपलब्धि से कही बड़ी है यह ट्रॉफी'

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तेज गेंदबाज विनय कुमार की अगुवाई में कर्नाटक ने रणजी ट्रॉफी पर सातवीं बार कब्जा जमाया है। खिताब के बाद विनय ने ट्रॉफी अपनी पत्‍नी रिचा के साथ साझा दी।

खिताबी जीत के बाद कर्नाटक के कप्तान विनय ने कहा, "रणजी ट्रॉफी व्यक्तिगत उपलब्धि से कही ज्यादा बड़ी है। हम सभी ने इस खिताब के लिए कड़ी मेहनत की थी। यह खिताब टीम के एकजुट प्रदर्शन का नतीजा है। टीम के ज्यादातर खिलाड़ियों की उम्र 25-26 साल है और सभी का सपना बड़ा है और सभी अच्छा कर रहे हैं। रणजी ट्रॉफी उठाना वास्तव में सम्मान की बात है।"

हार के बाद महाराष्ट्र के कप्तान रोहित मोटवानी ने कहा, "मुझे अपनी टीम पर गर्व है। कैच विन मैच, हमने कुछ अहम कैच टपकाए। यदि हम ये कैच पकड़ लेते तो ज्यादा अच्छी तरह से टक्कर दे पाते। हम पहले दिन अच्छी बल्लेबाजी नहीं कर सके और इसके बाद चीजें हमारे अनुरूप नहीं हुईं।"

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