जानिए, कुलदीप यादव की ‘चाइनामैन’ शैली के बारे में
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अंडर-19 वर्ल्ड कप की शुरुआत से पहले भारत को अभ्यास मैच में हार का सामना करना पड़ा था। तब लगने लगा था कि युवा टीम इंडिया को अपना वर्ल्ड कप खिताब बचाने में खासा संघर्ष करना पड़ेगा। टूर्नामेंट का पहला मुकाबला चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के साथ था।
लेकिन भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जीत से शुरुआत की और इसके बाद टीम के नए दीपक बनकर उभरे कुलदीप यादव ने ऐसी गजब की गेंदबाजी की वो अचानक चर्चा का विषय बन गए। वर्ल्ड कप से पहले भी अंडर-19 मैच में भारत के लिए शानदार प्रदर्शन कर चुके हैं।
कानपुर के फिरकी गेंदबाज कुलदीप यादव ने अंडर-19 वर्ल्ड कप में स्कॉटलैंड के खिलाफ मुकाबले में हैट्रिक सहित चार विकेट झटके और इसके साथ ही उनकी चाइनामैन गेंदबाजी शैली अचानक सुर्खियों में आ गई। उन्होंने अंडर-19 वर्ल्ड कप में हैट्रिक लेने वाले पहले भारतीय गेंदबाज बनने का गौरव भी हासिल किया।
इसके बाद पापुआ न्यु गिनी के खिलाफ भी जबर्दस्त गेंदबाजी करते हुए चार विकेट झटके थे। हालांकि वर्ल्ड कप के अपने पहले मैच में पाकिस्तान के खिलाफ कुलदीप ज्यादा सफल नहीं रहे थे और 10 ओवर में 53 रन लुटाने के बाद भी एक सफलता हासिल नहीं कर सके।
गेंदबाजी की अनोखी शैली है 'चाइनामैन गेंदबाजी'
गेंदबाजी में चाइनामैन शैली बेहद अनोखी शैली है। लेफ्ट ऑर्म स्पिनर की लेग स्पिन गेंदबाजी है जो टप्पा पड़ने के बाद अंदर की ओर आती है। इसमें गेंदबाज अपनी कलाइयों का इस्तेमाल कर गेंद को स्पिन कराता है जिसके कारण वह लेफ्ट स्पिन गेंदबाज से अलग होता है।
आईपीएल में मुंबई इंडियंस के लिए खेल चुके कुलदीप यादव पहले बाएं हाथ के तेज गेदबाज बनना चाहते थे लेकिन उनके कोच ने उन्हें स्पिन गेंदबाजी में करियर बनाने की सलाह दी जो अब इस युवा गेंदबाज के लिए बिल्कुल सटीक साबित हो रही है।
कुलदीप को चाइनामैन गेंदबाजी में लय हासिल करने के लिए खासा संघर्ष करना पड़ा। अब वह जिस तरह से गेंदबाजी कर रहे हैं उससे वह सीनियर टीम इंडिया की नई किरण बनकर उभरे हैं और उम्मीद की जानी चाहिए कि वह जल्द ही महेंद्र सिंह धोनी की युवा ब्रिगेड का हिस्सा बनकर उभरे।
क्रिकेट में कुछ ही हुए इस शैली के गेंदबाज
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में ‘चाइनामैन’ गेंदबाज यदा कदा ही नजर आते हैं तो ऐसे में भारतीय स्पिन गेंदबाजी की नई सनसनी कानपुर के कुलदीप यादव ने इस अनूठी कला से पूरी दुनिया का ध्यान बरबस अपनी तरफ खींच लिया है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यदि इतिहास में नजर डाली जाए तो मुश्किल से आठ-दस ‘चाइनामैन’ गेंदबाज ही याद आ पाएंगे।
दक्षिण अफ्रीका के पॉल एडम्स, ऑस्ट्रेलिया के माइकल बेवन, ब्रैड हॉग और साइमन काटिच तथा वेस्टइंडीज के दिग्गज आलराउंडर गैरी सोबर्स कुछ ऐसे गेंदबाज थे जो चाइनामैन शैली की गेंदबाजी किया करते थे।
जानते हैं कैसे पड़ा 'चाइनामैन' गेंदबाजी का नाम
यूं तो क्रिकेट में चीन की भागीदारी बिल्कुल जीरो है, पिछले कुछ समय पहले तक क्रिकेट को इस देश में कोई जानता भी नहीं था। लेकिन पिछले एक दशक में भारत, पाकिस्तान और आईसीसी के प्रयास के बाद चीन में कुछ क्रिकेट खेले जाने लगे हैं।
लेकिन क्रिकेट में चाइनामैन गेंदबाजी का नाम एक चाइनीज क्रिकेटर के नाम से आज से आठ दशक पहले ही पड़ गया था। माना जाता है कि गेंदबाजी में इस शैली की गेंदबाजी का जन्म 1933 में ओल्ड ट्रेफर्ड में वेस्टइंडीज और इंग्लैंड के बीच खेले गए मैच के दौरान हुआ था।
चीनी मूल के खिलाड़ी एलिस पस एचोंग लेफ्ट आर्म स्पिनर थे और उस समय वेस्टइंडीज की ओर से खेला करते थे। कहा जाता है कि एचोंग ने अपनी एक गेंद पर दाहिने हाथ के बल्लेबाज वाल्टर राबिंस को इस कदर चौंकाया था कि वह स्टंप हो गए थे। पवेलियन लौटते समय राबिंस ने अंपायर से कहा था कि इस ‘चाइनामैन’ ने उन्हें छका दिया। उसके बाद से ही ऐसी गेंदबाजी को चाइनामैन कहा जाने लगा।