टीम में यह बदलाव का वक्त, अमित-पुजारा को मिले मौके
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कभी दुनिया में भारतीय स्पिन की तूती बोलती थी। तब बिशन सिंह बेदी, इरापल्ली प्रसन्ना, भागवत चंद्रशेखर और एस. वेंकटराघवन की चौकड़ी ने दुनिया के धुरंधर बल्लेबाजों को अपनी स्पिन और फ्लॉइट से खूब नचाया।
मनिंदर सिंह, शिवरामकृष्णन, रवि शास्त्री, नरेंद्र हिरवानी ने स्पिन की इस परंपरा को आगे बढ़ाया। इसके बाद लेग स्पिनर अनिल कुंबले और ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह की जोड़ी भारत के स्पिन आक्रमण की धुरी रही। कुंबले के रिटायर होने के बाद उनके वारिस के रूप में लेग स्पिनर अमित मिश्रा ने ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम के खिलाफ बेहतरीन ढंग से अपने टेस्ट करियर का आगाज किया।
उनकी बदकिस्मती यह रही कि वह महेंद्र सिंह धोनी का विश्वास नहीं जीत पाए और ज्यादातर समय अंतिम एकादश से बाहर रहे। खासतौर पर विदेशी धरती पर खेली गई पिछली दो सीरीज और एशिया कप में भारत की नाकामी का बड़ा कारण अमित मिश्रा को टेस्ट और वनडे तथा चेतेश्वर पुजारा को वनडे में अंतिम एकादश से बाहर रखना ही रहा।
टीम चयन में ज्यादा चलती है धोनी की
धोनी की पहली पसंद बतौर स्पिनर रविचंद्रन अश्विन और लेफ्ट आर्म स्पिनर रवींद्र जडेजा रहे। एशिया कप में धोनी भले खुद नहीं खेले लेकिन टीम के चयन में चयनकर्ताओं में उनकी राय को ही ज्यादा तवज्जो दी। ऐसे में विराट कोहली के पास बतौर कप्तान विकल्प सीमित ही रह गए। विराट कोहली ने अमित मिश्रा को पाकिस्तान के खिलाफ अहम लीग मैच सहित दो मैचों में जगह दी तो उन्होंने किफायती और धारदार गेंदबाजी कर कुल तीन विकेट चटका अपनी उपयोगिता साबित कर दी।
शाहिद अफरीदी ने अश्विन की आखिरी ओवर में धुनाई कर भारत के हाथ से एक लगभग निश्चित जीत छीन ली। यदि विराट ने अमित मिश्रा और पुजारा को श्रीलंका के खिलाफ भी उतारा होता तो भारत उसके खिलाफ करीबी मैच जीत सकता था। वनडे में कप्तान चाहे विराट हों या धोनी, जरूरत अमित मिश्रा और पुजारा पर ज्यादा भरोसा दिखाकर बराबर मौका देने की है।
धोनी ने भज्जी के लय खोने के बाद बतौर अश्विन और जडेजा पर भरोसा करना ज्यादा मुनासिब समझा। धोनी ने अश्विन और जडेजा को टीम में ऑलराउंडर के रूप में रखने की ही दुहाई ज्यादा दी। यहां तक कि धोनी लेफ्ट आर्म स्पिनर प्रज्ञान ओझा तक को भूल गए।
लगातार नाकामी के बावजूद अश्विन को मिले मौके
देश और विदेश में अश्विन की नाकामी के बावजूद उन्हें मौका दिया जाता रहा। धोनी की जिद ने अमित मिश्रा और पुजारा को टीम इंडिया में ′पैसेंजर′ बना दिया। मांसपेशी में खिंचाव के कारण धोनी भले ही एशिया कप में नहीं खेले पर उनके पसंदीदा खिलाड़ी अंतिम 11 में जगह बनाने में कामयाब रहे।
भारत के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली का यह कहना सही साबित हुआ कि चयनकर्ता टीम इंडिया में धोनी के पसंदीदा क्रिकेटरों को ही चुनते हैं। बेचारे कोहली को भी धोनी के पसंदीदा खिलाड़ियों से काम चलाना पड़ा। सुनील गावस्कर ने तो यह सवाल तक खड़ा कर दिया कि क्या पुजारा और ईश्वर पांडे के कामयाब होने पर अपने चहेतों के वनडे एकादश से बाहर होने के डर से दोनों को मौका नहीं दिया गया।
संयोग से जिम्बाब्वे दौरे पर धोनी के आराम करने के कारण कार्यवाहक कप्तान विराट कोहली ने अमित मिश्रा को मौका दिया तो उन्होंने वहां 18 विकेट लेकर अपनी स्पिन का जादू दिखा दिया। एशिया कप में पाकिस्तान के खिलाफ जैसे ही मौका मिला अमित ने दो विकेट चटका कर फिर अपनी धार दिखाई।
अफरीदी ने बनाया आउट ऑफ फॉर्म अश्विन को 'विलेन'
अश्विन ने एशिया कप में भले ही दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड में खेली सीरीज से बेहतर गेंदबाजी की लेकिन वह खुद से जूझते दिखे। वह भारत को जरूरत के समय विकेट दिलाने में नाकाम रहे। पाक के खिलाफ मैच में उन्होंने तीन विकेट जरूर चटकाए लेकिन शाहिद अफरीदी ने अंतिम ओवर में उन्हें खलनायक बना दिया।
अश्विन ने एशिया कप में बांग्लादेश के खिलाफ मैच में जब रहस्यमय स्पिनर सुनील नारायण के एक्शन से गेंदबाजी की तो सभी हैरान रह गये। यह इस बात का सबूत था कि वह बतौर स्पिनर खुद की काबिलियत पर भरोसा खो चुके थे।
सवाल उठता है कि क्या ऐसे में उनकी टीम में जगह बनती थी? दरअसल बल्लेबाजी पर फोकस करने के कारण वह अपनी गेंदबाज वाली भूमिका से दूर हो गए। गेंदबाजी में भी उन्होंने ‘कैरम बॉल’ और ‘दूसरा’ करने के चक्कर में जरूरत से ज्यादा प्रयोग कर दिए पर हासिल कुछ नहीं हुआ।
पूर्व दिग्गजों से सलाह लें फिरकी गेंदबाज
यहां एक बात समझनी होगी कि रविंद्र जडेजा बैटिंग-ऑलराउंडर हैं। जडेजा की गेंदबाजी में भले ही बहुत ज्यादा विविधता नहीं है लेकिन वह अपनी सीमा में रहकर विकेट टू विकेट गेंदबाजी कर ज्यादा प्रयोग नहीं करते हैं। वह बतौर बल्लेबाज निम्न मध्यक्रम में ठीक हैं और टीम के बेहतरीन फील्डरों में से एक हैं। इस कारण वह टीम के लिए ज्यादा उपयोगी साबित होते हैं।
ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या विराट कोहली ने धोनी की नाराजगी से बचने के लिए अश्विन को अंतिम एकादश में शामिल किया? अश्विन के गेंदबाजी में जरूरत से ज्यादा प्रयोग करने पर पूर्व स्पिनर मनिंदर सिंह ने कड़ी टिप्पणी की कि क्या अब वह मीडियम पेस गेंदबाजी करेंगे। मनिंदर ने तो बड़ा सवाल यह उठाया कि बॉलिंग कोच जो डावेस और चीफ कोच डंकन फ्लेचर ने उन्हें ऐसा करने की इजाजत कैसे दी।
अश्विन मिडल और लेग स्टंप पर ज्यादा गेंद कर रहे हैं और ऐसे में एलबीडब्ल्यू मिलने के अवसर खत्म ही हो गए हैं। अश्विन के सभी प्रयोग अपनी स्टॉक बॉल के इर्द-गिर्द ही रहने चाहिए। विकेट लेने के लिए उनको अपनी स्टॉक बॉल पर भरोसा करने की जरूरत है। सच तो यह है कि अश्विन को प्रसन्ना, वेंकटराघवन, शिव लाल यादव जैसे पूर्व टेस्ट स्पिनरों से सलाह लेनी चाहिए।
बल्लेबाजी के बाद कप्तानी में भी दिखाया साहस
विराट कोहली ने एशिया कप में संयम और दबाव में धैर्य दिखाकर सभी का दिल जीता। उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ अपने मन की कर लेग स्पिनर अमित मिश्रा को टीम में शामिल किया।
अमित मिश्रा ने बीच के ओवरों में सबसे किफायती गेंदबाजी करने के साथ दो विकेट हासिल कर दिखा दिया कि अब भी उनमें दम बाकी है।
वहीं जिस तरह से अफरीदी ने आखिरी ओवर में अश्विन की गेंदों पर लगातार दो छक्के जड़ कर पाक को जीत दिलाई उससे साफ हो गया कि अब उन्हें आराम देने का वक्त आ गया है। उन्होंने सीमित साधनों के साथ बतौर कप्तान होश के साथ जोश भी दिखाया। यदि किस्मत ने थोड़ा साथ दिया होता तो वह कामयाबी की नई कहानी लिख सकते थे। एशिया कप में कप्तान कोहली ने चार में से दो मैचों में जीत हासिल की।