बहुत हो गया, अब तो कड़े फैसले लो धोनी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
न्यूजीलैंड के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के वनडे करियर की यह सबसे शर्मनाक हार है। उनकी कप्तानी में पहली बार भारतीय टीम ने वनडे सीरीज 0-4 से गंवाई है।
भारत को क्रिकेट में दो वर्ल्ड कप दिलाने वाले धोनी की युवा टीम विदेशी धरती पर लगातार दूसरी बार फेल हुई है। पिछले दो महीने में टीम इंडिया ने 10 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं और उसमें एक में भी जीत नहीं मिली है। दक्षिण अफ्रीका में हार के बाद न्यूजीलैंड जैसी निचले क्रम की टीम के हाथों हार ने वर्ल्ड चैंपियन की प्रतिष्ठा को धूमिल कर दिया है।
हर हार के बाद धोनी अपनी टीम के खराब प्रदर्शन पर कुछ न कुछ कहते ही हैं। साथ ही खराब खेल दिखाने वाले क्रिकेटरों पर जमकर बरसते भी हैं। लेकिन उनके साथ मैदान पर उतरने वाले अन्य 10 खिलाड़ियों में कई ऐसे हैं जो अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा रहे या वे इसे सही तरीके से कर पाने में नाकाम साबित हो रहे हैं।
सफाई पर सफाई देने को मजबूर हैं धोनी
न्यूजीलैंड के हाथों 4-0 से सीरीज गंवाने के बाद भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने कहा कि हमारी टीम लगातार अच्छा कर ही है लेकिन कीवी टीम के खिलाफ हालात से तालमेल नहीं बिठा सकी जिस कारण टीम को सीरीज में हार का सामना करना पड़ा।
धोनी ने कहा, "पूरी सीरीज के दौरान न्यूजीलैंड ने अच्छा प्रदर्शन किया। नई गेंद से गेंदबाजी करने वाली उनकी जोड़ी अच्छी है, लेकिन मध्यक्रम के उनके बल्लेबाजों ने भी हमसे मैच दूर किया। मध्यक्रम के बल्लेबाजों ने अंतिम ओवरों में आक्रामक बल्लेबाजी के लिए उनके लिए मंच तैयार किया जिस पर उन्होंने लगातार 80-90 रन जुटाए।"
धोनी से जब अपनी टीम के प्रदर्शन के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "कहीं भी जरूरी होता है कि आप हालात से जल्द से जल्द सामंजस्य बिठाएं जो कि हम नहीं कर सके। जहां तक प्रतिभा की बात है तो हमारी टीम में ऐसे खिलाड़ी जिन्होंने पूर्व में काफी अच्छा किया है और चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब जीता है।"
पर आंकड़े तो कुछ और कहते हैं
बतौर कप्तान धोनी भले ही अपनी टीम का बचाव करें, लेकिन इस सीरीज में कई भारतीय बल्लेबाजों ने जिस तरह का प्रदर्शन किया है वो वाकई में निराशाजनक है।
गौतम गंभीर और युवराज सिंह जैसे अनुभवी बल्लेबाजों के बजाए धोनी ने कीवी दौरे के लिए युवा बल्लेबाजों को मौका देना ज्यादा फायदेमंद समझा। लेकिन रोहित शर्मा, शिखर धवन और अजिंक्य रहाणे के साथ-साथ लंबे समय से टीम में जगह बनाने वाले सुरेश रैना पूरी सीरीज में संघर्ष करते नजर आए।
2013 में टीम इंडिया के लिए ओपनिंग की नई भूमिका संभालने वाले रोहित ने पांच मैचों में 145 रन बनाए। जबकि शिखर धवन भी सीरीज में संघर्ष करते नजर आए और चार मैचों में 81 रन ही टीम के लिए बना सके। कभी टीम इंडिया के मैच जिताऊ बल्लेबाज माने जाने वाले सुरेश रैना भी लंबे समय से कोई कमाल नहीं दिखा पाएं हैं और तीन मैचों में महज 84 रन ही बना सके। यही कारण है कि अंतिम दो मैचों से उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया।
रहाणे ने भी खोया टीम का भरोसा
अजिंक्य रहाणे को टीम इंडिया का एक उभरता हुआ बल्लेबाज माना जा रहा है। लेकिन दक्षिण अफ्रीका में खेले गए डरबन टेस्ट मैच की दूसरी पारी में उन्होंने जिस अंदाज में बल्लेबाजी की, उससे यही लगा कि वह दुनिया में किसी भी पिच पर बड़ी पारी खेल सकते हैं और मझंधार में फंसी टीम इंडिया की नैया पार लगा सकते हैं।
अब तक रहाणे के बारे में कहा जाता था कि उन्हें भरपूर मौका नहीं दिया गया। हालांकि न्यूजीलैंड के खिलाफ उन्हें सभी पांचों मैच में शामिल किया गया। लेकिन वह सीरीज में सबसे असफल शीर्ष भारतीय बल्लेबाज साबित हुए।
दाएं हाथ के बल्लेबाज रहाणे ने पांच मैचों की पांच पारियों में महज 51 रन बनाए। उनके पास टीम में अपनी जगह पुख्ता करने का यह बेहतरीन मौका था पर उन्होंने खराब शॉट खेलकर यह मौका गंवा दिया। 51 रनों में से एक मैच में उन्होंने 36 रन बनाए। इस लिहाज से देखा जाए तो अन्य चार मैचों में वह महज 15 रन ही बना पाए।
धोनी के 'खास' भी नहीं कर सके कोई कमाल
रविचंद्रन अश्विन को कप्तान धोनी को बेहद खास गेंदबाज माना जाता है। रोहित शर्मा की तरह लगातार असफल होने के बावजूद टीम में जगह बनाने वाले अश्विन इस सीरीज में भी बेहद नाकाम रहे।
घरेलू धरती पर अश्विन सफल भी रहते हैं लेकिन विदेशी धरती पर वह अब तक कोई कमाल नहीं कर सके हैं। विदेश में उनकी नाकामी का सिलसिला न्यूजीलैंड में भी जारी रहा। हालांकि उन्होंने ऑकलैंड में हुए सीरीज के तीसरे मैच में बल्लेबाजी से कमाल दिखाते हुए टीम इंडिया की हार को टाल दिया था।
लेकिन गेंदबाजी में वह बुरी तरह से असफल रहे। पांच मैचों में उन्होंने कुल 44 ओवर डाले और 227 रन लुटाने के बाद महज एक विकेट ही हासिल कर पाए। धोनी ने अश्विन पर इस कदर भरोसा कायम किया कि उन्होंने एक अन्य फिरकी गेंदबाज अमित मिश्रा को मौका तक नहीं दिया। ये वही अमित मिश्रा हैं जिन्होंने पिछले साल जिम्बाब्वे दौरे में एक सीरीज में सर्वाधिक 17 विकेट लेने के वर्ल्ड रिकॉर्ड की बराबरी की थी।
तेज गेंदबाजी में भी टीम को मिला 'धोखा'
फिरकी गेंदबाजी में जहां धोनी के 'खास' गेंदबाज ने सब कुछ बिगाड़ कर रख दिया। वहीं तेज गेंदबाजी विभाग ने टीम इंडिया को सबसे ज्यादा निराश किया। भुवनेश्वर कुमार, इशांत शर्मा और वरुण आरोन बिल्कुल ही बोथरे साबित हुए।
मोहम्मद शमी को छोड़ दिया जाए तो अन्य तेज गेंदबाज सीरीज में खुद को सिर्फ पिटते हुए देखते रहे। हालांकि भुवी ने बीच-बीच में सधी गेंदबाजी लेकिन उसे लगातार बनाने में नाकाम रहे। भुवी पांच मैचों में 239 ओवर में चार विकेट ही झटक पाए। जबकि लगभग दो साल बाद टीम में वापसी करने वाले वरुण आरोन ने तीन मैच में सात रन प्रति ओवर की हिसाब से रन लुटाए।
अनुभवी और तेज गेंदबाज इशांत शर्मा के बारे में कुछ भी कहना ही बेकार है। टीम इंडिया के पूर्व क्रिकेटरों ने इस गेंदबाज के बारे में कह भी दिया है कि उन्होंने अब सीखना ही बंद कर दिया है। दो मैचों में लगभग आठ रन प्रति ओवर के हिसाब से रन लुटाए और दो ही सफलता हासिल कर सके। गेंदबाजों के लचर प्रदर्शन ने भारत की सीरीज के हर मैच में वापसी की उम्मीद को खत्म कर दी थी।