53 साल पुराना इतिहास नहीं दोहरा पाए डेल स्टेन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जोहानिसबर्ग टेस्ट में बेहद खराब प्रदर्शन के कारण साथी गेंदबाज वर्नोन फिलेंडर से नंबर वन का ताज गंवाने वाले तेज गेंदबाज डेल स्टेन डरबन टेस्ट के दूसरे दिन फॉर्म में लौट आए।
स्टेन की घातक गेंदबाजी का सामना करने से दुनियाभर के बल्लेबाज डरते हैं लेकिन दो मैचों की टेस्ट सीरीज में अब तक यह तेज गेंदबाज अपना कमाल नहीं दिखा पाए थे।
लेकिन आज बारिश के बाद खेल जब शुरू हुआ तो स्टेन ने अपनी लय हासिल कर ली थी और बल्लेबाजों को डराते हुए महज 18 गेंदों में तीन भारतीय बल्लेबाजों को पवेलियन की राह दिखा दी।
53 साल बाद था इतिहास दोहराने का मौका
डेल स्टेन ने 69वें ओवर में लगातार दो गेंदों पर मुरली विजय (97) और रोहित शर्मा (0) को आउट करने के बाद वह हैट्रिक लेने से महज एक विकेट दूर थे, लेकिन उन्होंने यह दोनों विकेट पांचवीं और छठी गेंद पर लिया था।
इसलिए उन्हें हैट्रिक के लिए अगले ओवर का इंतजार करना पड़ा और जब वह मौका आया तो सामने विराट कोहली थे। कोहली ने पिछले मैच में दो सौ से ज्यादा रन बनाए थे और उनमें आत्मविश्वास कूट-कूट कर भरा था। यही कारण है कि स्टेन की हैट्रिक बॉल को उन्होंने चौके के लिए खेल दिया।
अगर स्टेन आज हैट्रिक ले लेते तो वह 1960 के बाद टेस्ट क्रिकेट में हैट्रिक लेने वाले पहले दक्षिण्ा अफ्रीकी बल्लेबाज होते। जून 1960 में इंग्लैंड के खिलाफ ज्यॉफ ग्रिफिन ने यह उपलब्धि हासिल की थी। ग्रिफिन दक्षिण अफ्रीका के एकमात्र गेंदबाज हैं जिन्होंने टेस्ट में हैट्रिक बनाई है।
2 दिन में 2 उपलब्धि से चूक गए मुरली विजय
टीम इंडिया के ओपनर मुरली विजय ने भले ही डरबन टेस्ट में फॉर्म हासिल कर ली हो लेकिन वह अपनी 97 रनों की पारी खेलने के बावजूद बेहद अनलकी खिलाड़ी साबित हुए।
दूसरे टेस्ट मैच के दोनों दिन मुरली विजय दो कारनामा करने से रह गए। 'बाक्सिंग डे' टेस्ट मैच के पहले दिन मुरली 91 रन पर खेल रहे थे लेकिन खराब रोशनी के कारण मैच जब रोका गया तब वह अपने शतक से नौ रन दूर थे। और वह अगर पहले दिन शतक लगा देते तो 'बाक्सिंग डे' टेस्ट में वह वीरेंद्र सहवाग और मोहम्मद अजहरुद्दीन के बाद तीसरे भारतीय हो जाते।
वहीं दूसरे दिन महज तीन रन से चूक जाने वाले मुरली विजय बतौर ओपनर दक्षिण अफ्रीका में शतक लगाने वाले दूसरे भारतीय बनने से भी रह गए। इससे पहले वसीम जाफर ने 2007 में केपटाउन टेस्ट मैच में 116 रनों की पारी खेली थी।
सबसे तेज हुए चेतेश्वर पुजारा
चेतेश्वर पुजारा ने यहां तक पहुंचने के लिए महज 27 पारियां खेली हैं। उन्होंने 70 से ज्यादा की औसत से रन बनाए हैं।
पुजारा ने पूर्व कप्तान राहुल द्रविड़ और सौरव गांगुली ने सबसे तेज 32 पारियों में 1500 रनों का आंकड़ा छूने के रिकॉर्ड को तोड़ा था।
लगातार दूसरे साल भी 80 के पार रहा औसत
ऑस्ट्रेलिया के डॉन ब्रेडमैन के बाद पुजारा ही बल्लेबाजी औसत (15 टेस्ट से ज्यादा मैच) में दूसरे नंबर पर आते हैं। पुजारा ने लगातार दूसरे साल 80 से ज्यादा की औसत से बल्लेबाजी करने का कारनामा कर दिखाया है।
2012 में पुजारा ने 81.75 की औसत से रन बनाया था जबकि इस साल उनकी बल्लेबाजी औसत लगभग 87.22 है।
जब लौटे फॉर्म में सहम गए भारतीय बल्लेबाज
डेल स्टेन पहले टेस्ट मैच में बुरी तरह से असफल साबित हुए और वह उस मैच में महज एक विकेट ही झटक सके थे।
जोहानिसबर्ग टेस्ट के बाद डरबन टेस्ट के पहले दिन भी कमाल नहीं दिखा सके लेकिन जब वह फॉर्म में लौटे तो भारत के शीर्ष क्रम के बल्लेबाज नतमस्तक हो गए।
स्टेन इस सीरीज में एक विकेट के लिए 416 गेंद (69.2 ओवर) डाले लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। लेकिन उस असफलता को भूलते हुए स्टेन ने 10 गेंदों के अंदर महज एक रन देकर तीन बल्लेबाजों को पवेलियन की राह दिखाई। आज खेल शुरू होने के छठे ओवर में ही दक्षिण अफ्रीका को पहली सफलता दिलाई।