..और फेडरर भी हो गए शोर, समर्थन से हैरान
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यह ऐसा माहौल था जिसकी कल्पना खुद रोजर फेडरर ने नहीं की थी। वाकई यह समां फेडरर को हैरान कर रहा था। उनके मुंह से खुद यही निकला, वह इतने प्रशंसकों और शोर के बीच खेलने के आदी नहीं हैं लेकिन अब उन्हें इसकी आदत डालनी होगी। जी हां फेडरर को मसाला टेनिस आईपीटीएल भा गई है और यही कारण है कि वह इसमें आगे भी खेलने को तैयार हैं।
फेडरर खुलासा करते हैं कि हालांकि इस मसाला टेनिस के यह शुरुआती दिन हैं लेकिन यह बेहद मनोरंजक है। खासतौर पर खिलाड़ियों से बातचीत का मौका मिलना। उन्हें यह अंदाज बेहद पसंद आया है। फेडरर यह भी साफ करते हैं कि फिलहाल उनके एजेंडे में एटीपी ही है और वह अपनी ट्रेनिंग और छुट्टियों को वरीयता देंगे।
भूपति से किए वादे को निभाया
फेडरर खुलासा करते हैं कि आईपीटीएल में खेलना उनके लिए मुश्किल भरा निर्णय था लेकिन उन्होंने महेश भूपति से वादा किया था और यही कारण है कि वह दिल्ली में दो दिनों के लिए खेलने को तैयार हुए। यह पहली बार है जब फेडरर भारत आए हैं। वह बताते हैं कि इस यात्रा को लेकर वह बेहद उत्साहित थे और यहां आकर बेहद खुश हैं। हालांकि फेडरर यह भी कहते हैं कि वह चीन की तरह भारत को अपना एटीपी टूर्नामेंट खेलने वाला देश नहीं बनाने जा रहे हैं। फेडरर कहते हैं कि वह फिलहाल चेन्नई में होने वाले एटीपी टूर्नामेंट में खेलने का कार्यक्रम नहीं बना रहे हैं।
इस दौरान वह ब्रिसबेन में खेलते हैं और उनकी पत्नी और बच्चों को यह जगह भाती है। इसका मतलब हुआ कि फिलहाल फेडरर के लिए भारत सिर्फ एक मसाला टेनिस खेलने की जगह ही रहेगी। हालांकि यह मसाला टेनिस थी जरूर लेकिन फेडरर ने जिस तरह का खेल दिखाया उससे यह साफ था कि उन्होंने इसे बेहद गंभीरता से लिया। फेडरर ने कहा भी कि यह बहुत कठिन था और वह बेहद थके हुए हैं। आईपीटीएल उन्हें इस वजह से भी पसंद आया कि एटीपी टूर के दौरान उन्हें साल भर अकेले रहना पड़ता है। इस दौरान किसी से बात नहीं होती है लेकिन यहां ऐसा नहीं है, यह बेहद मनोरंजक है।
और फेडरर ने दिखाया यूं ही नहीं कहते उन्हें बादशाह
मरने से पहले मैं अपनी एक ख्वाहिश पूरी करना चाहूंगी, रोजर फेडरर को अपनी आंखों के सामने खेलते हुए देखना। फेडरर की दीवानी टेनिस प्रेमी के हाथों में यह वाक्य लिखा हुआ पोस्टर महज एक उदाहरण है। इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में दीवानगी और पागलपन का आलम यह था कि कोई उनके हाथों में फोटो लिए हुए था तो कोई फेडरर-फेडरर चिल्ला रहा था। फेडरर के हर स्ट्रोक पर तालियां बजा रहे उनके मुरीदों में अमिताभ बच्चन, सुनील गावस्कर और खेल मंत्री सर्वानंद सोनोवाल भी थे। यही नहीं सानिया मिर्जा हों या अना इवानोविच या फिर रोहन बोपन्ना, इंडियन टेनिस प्रीमियर लीग के मुकाबले के दौरान ये सभी सिर्फ फेडरर से बातें कर ही मंत्रमुग्ध हो रहे थे।
स्विट्जरलैंड के इस दिग्गज ने भी दिखाया कि उन्हें टेनिस कोर्ट का बादशाह यूं ही नहीं कहते हैं। न तो यह कोई ग्रैंड स्लैम था और न ही एटीपी मुकाबला, यह था तो मसालेदार आईपीटीएल, लेकिन 17 बार के ग्रैंड स्लैम विजेता ने वह टेनिस खेली जो वह अपने हर अच्छे दिन खेलते हैं। कहने को यह मुकाबला इंडियन एसेस और सिंगापुर स्लैमर्स के बीच था लेकिन सच्चाई यह है कि अकेले फेडरर ने ही सिंगापुर को हरा दिया। वाकई क्या नहीं था फेडरर की टेनिस में चीते की तेजी से नेट पर पहुंचना, उनका पारंपरिक बैकहैंड स्ट्रोक, खूबसूरत पासिंग शॉट्स और कई एस भी। सिर्फ यही नहीं अपने तीनों मुकाबले जीतने के बाद उन्होंने गेल मोंफिल्स के साथ अपने डांस के अंदाज दिखाकर दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
शुरुआत नहीं हुई थी अच्छी
हालांकि इंडियन एसेस की शुरुआत अच्छी नहीं रही। एक और महान खिलाड़ी पीट सैम्प्रास को पैट राफ्टर के हाथों 2-6 से हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद फेडरर ने मोर्चा संभाला। पहले उन्होंने सानिया मिर्जा के साथ मिलकर ब्रूनो सोएरेस को 6-0 से हराया। इसके बाद रोहन बोपन्ना के साथ मिलकर ल्यूटन हेविट और निक किरगियोस को 6-1 से हराया।
अगला मुकाबला सिंगल्स का था और उनके सामने उन्हें कई मौकों पर हराने वाले थॉमस बर्डिच थे लेकिन उन्होंने यह मुकाबला भी 6-4 से जीता। अंतिम महिला सिंगल्स में इवानोविच ने डेनिएला हंतुचोवा को सुपर टाईब्रेक में 6-5 से हराकर इंडियन एसेस को 26-16 से जीत दिलाकर आईपीटीएल में घरेलू टीम की बढ़त बनाए रखा।