{"_id":"b2c3b29919cb7cba24e4a2f5a29da901","slug":"world-aids-day-naco-aids-drug-america","type":"story","status":"publish","title_hn":"एड्स दिवस पर दो अच्छी खबरें...","category":{"title":"Lifestyle Archives","title_hn":"लाइफस्टाइल आर्काइव","slug":"lifestyle-archives"}}
एड्स दिवस पर दो अच्छी खबरें...
पवन कुमार/नई दिल्ली
Updated Sun, 01 Dec 2013 10:30 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विश्व एड्स दिवस पर आपको बताने के लिए हमारे पास दो अच्छी खबरें हैं। पहली ये कि भारत में एड्स के मरीज अब कम हो रहे हैं वो भी थोड़ी बहुत संख्या में नहीं, तीन साल के भीतर मरीजों की संख्या में करीब तीन लाख की गिरावट आई है।
दूसरी अच्छी खबर ये है कि एड्स के इलाज की पुख्ता तकनीक अमेरिकियों ने ईजाद कर ली है। उम्मीद रखें कि आने वाले वक्त में एड्स का डर भाग जाएगा। फिलहाल भारत ने एड्स से जंग में जो जीत हासिल की है उसकी बात करते हैं।
यहां मरीजों की संख्या को कम करने में सबसे बड़ा हाथ जागरूकता और बेहतर इलाज का है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की संस्था इंस्टीट्यूट ऑफ साइटोलॉजी एंड प्रिवेंटिव ऑनकोलॉजी के निदेशक प्रोफेसर डॉक्टर रवि मेहरोत्रा ने बताया कि नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (नाको) की ओर से चलाए जा रहे कार्यक्रमों की वजह से मरीजों की संख्या कम करने में मदद मिली है। वर्ष 2010 में मरीजों की संख्या 24.1 लाख थी, जबकि 2012 में यह संख्या 21 लाख रह गई। यह गिरावट उल्लेखनीय है।
विज्ञापन
डॉक्टर मेहरोत्रा ने बताया कि अमेरिका के ओरिगॉन नेशनल प्राइमेट रिसर्च सेंटर के वैज्ञानिकों ने इस बीमारी से बचाव और इलाज के नए तरीके की खोज का दावा किया है। अमेरिकी शोध सितंबर-2013 में एक प्रतिष्ठित हेल्थ जर्नल में छपा भी है। उनके दावे को खारिज नहीं किया जा सकता।
फिलहाल इलाज के लिए जो तरीका अपनाया जाता है उसमें 20 तरह की दवाएं और थेरेपी उलब्ध है, लेकिन कई केसों में ये भी नाकाफी साबित होती है। लिहाजा आईसीएमआर भी इलाज के बेहतर और पुख्ता तौर-तरीकों की खोज की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिकियों द्वारा बचाव के लिए जो तरीका खोजा गया है उससे न सिर्फ वायरस को फैलने से रोका जा सकेगा, बल्कि बीमारी होने के बाद भी कारगर बचाव संभव होगा।
पार्टनर पॉजिटिव हो तो
यदि एक पार्टनर को एचआईवी एड्स है तो शारीरिक संबंध बनाने से पहले उसे एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) लेनी होगी। इस थेरेपी के बाद वह सुरक्षित शारीरिक संबंध बना सकता है।
मरीजों की संख्या (सैंपल सर्वे के आधार पर)
राज्य--------अनुमानित संख्या--------पंजीकृत
उत्तर प्रदेश---------109352--------57468
पंजाब--------------56927---------23178
हिमाचल प्रदेश-----8878----------4594
जम्मू कश्मीर------5403----------2573
उत्तराखंड-----------5539----------2846
हरियाणा-----------15852---------9348
दिल्ली-------------34216---------10509
स्रोत : नाको, मार्च-2012
विज्ञापन
दूसरी अच्छी खबर ये है कि एड्स के इलाज की पुख्ता तकनीक अमेरिकियों ने ईजाद कर ली है। उम्मीद रखें कि आने वाले वक्त में एड्स का डर भाग जाएगा। फिलहाल भारत ने एड्स से जंग में जो जीत हासिल की है उसकी बात करते हैं।
विज्ञापन
यहां मरीजों की संख्या को कम करने में सबसे बड़ा हाथ जागरूकता और बेहतर इलाज का है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की संस्था इंस्टीट्यूट ऑफ साइटोलॉजी एंड प्रिवेंटिव ऑनकोलॉजी के निदेशक प्रोफेसर डॉक्टर रवि मेहरोत्रा ने बताया कि नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (नाको) की ओर से चलाए जा रहे कार्यक्रमों की वजह से मरीजों की संख्या कम करने में मदद मिली है। वर्ष 2010 में मरीजों की संख्या 24.1 लाख थी, जबकि 2012 में यह संख्या 21 लाख रह गई। यह गिरावट उल्लेखनीय है।
विज्ञापन
डॉक्टर मेहरोत्रा ने बताया कि अमेरिका के ओरिगॉन नेशनल प्राइमेट रिसर्च सेंटर के वैज्ञानिकों ने इस बीमारी से बचाव और इलाज के नए तरीके की खोज का दावा किया है। अमेरिकी शोध सितंबर-2013 में एक प्रतिष्ठित हेल्थ जर्नल में छपा भी है। उनके दावे को खारिज नहीं किया जा सकता।
फिलहाल इलाज के लिए जो तरीका अपनाया जाता है उसमें 20 तरह की दवाएं और थेरेपी उलब्ध है, लेकिन कई केसों में ये भी नाकाफी साबित होती है। लिहाजा आईसीएमआर भी इलाज के बेहतर और पुख्ता तौर-तरीकों की खोज की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिकियों द्वारा बचाव के लिए जो तरीका खोजा गया है उससे न सिर्फ वायरस को फैलने से रोका जा सकेगा, बल्कि बीमारी होने के बाद भी कारगर बचाव संभव होगा।
पार्टनर पॉजिटिव हो तो
यदि एक पार्टनर को एचआईवी एड्स है तो शारीरिक संबंध बनाने से पहले उसे एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) लेनी होगी। इस थेरेपी के बाद वह सुरक्षित शारीरिक संबंध बना सकता है।
मरीजों की संख्या (सैंपल सर्वे के आधार पर)
राज्य--------अनुमानित संख्या--------पंजीकृत
उत्तर प्रदेश---------109352--------57468
पंजाब--------------56927---------23178
हिमाचल प्रदेश-----8878----------4594
जम्मू कश्मीर------5403----------2573
उत्तराखंड-----------5539----------2846
हरियाणा-----------15852---------9348
दिल्ली-------------34216---------10509
स्रोत : नाको, मार्च-2012