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सर्दियों में उदासी, सीजनल एफेक्टिव डिसॉर्डर तो नहीं
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
Updated Tue, 20 Nov 2012 10:15 AM IST
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ठंड में आलस, थकान और उदासी अक्सर हमें अवसाद की स्थिति तक पहुंचा देती है। वैसे तो अवसाद के पीछे कई वजहें हो सकती हैं लेकिन अगर आप सर्दियों में डिप्रेस महसूस करते हैं और दूसरे मौसम की अपेक्षा सर्दियों में आपका व्यवहार हमेशा उदासीन रहता है तो हो सकता है कि आपको सीजनल एफेक्टिव डिसॉर्डर (सैड) की समस्या हो।
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सर्दियों में अक्सर दिन के समय सूर्य का प्रकाश हमें कम मिलता है जिससे कई बार हमारी दिनचर्या और सोने व उठने का चक्र प्रभावित होता है। ऐसे में हमारे मस्तिष्क में 'सेरोटोनिन' नामक केमिकल प्रभावित होता है जिससे हमारा मूड बिना वजह खराब ही रहता है। कई बार यह स्थिति हमें अवसाद का शिकार बना सकती है इसलिए इसके लक्षणों को पहचानकर इसका उपचार कराना चाहिए।
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इन्हें हो सकती है यह समस्या
- जो लोग उन जगहों पर रहते हैं जहां ठंड कम पड़ती हो और बहुत अधिक ठंड वाले इलाके में आ जाएं।
- महिलाओं में इस बीमारी की आशंका अधिक रहती है।
- 15 से 55 वर्ष की आयु वाले लोगों में इसकी आशंका अधिक रहती है।
- सीजनल एफेक्टिव डिसॉर्डर से पीड़ित व्यक्ति के बहुत अधिक संपर्क में रहने वाले व्यक्ति को भी यह बीमारी हो सकती है।
ये हैं लक्षण
- इस दौरान व्यक्ति बिना किसी कारण बहुत अधिक दुखी रहता है और उसके मूड अचानक बदलते रहते हैं।
- रोजमर्रा की गतिविधियों में उसकी रुचि पूरी तरह खत्म हो जाती है।
- कार्बोहाइड्रेट युक्त चीजों जैसे रोटी, ब्रेड या पास्ता आदि खाने का उसका हमेशा मन करता है।
- वजन तेजी से बढ़ता है।
- दिन के समय भी वह बहुत अधिक सोता है।
ऐसे हो सकता है उपचार
आमतौर पर डॉक्टर सैड के मरीजों का उपचार दो तरह की लाइट थेरेपी से करते हैं- ब्राइट लाइट ट्रीटमेंट और डॉन सिमुलेशन। ब्राइट लाइट ट्रीटमेंट के तहत रोगी को लाइटबॉक्स के सामने रोज सुबह आधे घंटे तक बैठाया जाता है।
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दूसरी विधि में सुबह सोते वक्त रोगी के पास धीमी लाइट जलाई जाती है जो धीरे-धीरे तेज होती जाती है। सूर्योदय जैसा वातावरण तैयार किया जाता है। इसके अलावा योग, अवसाद हटाने वाली दवाओं और कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी से भी इस बीमारी का उपचार किया जाता है।