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जानिए, क्यों मर्दों से अलग है महिलाओं की 'वायग्रा'

Mon, 31 Aug 2015 04:47 PM IST
Updated Mon, 31 Aug 2015 04:47 PM IST
why female viagra is different than male viagra?

हाल में एक अमेरिकी कंपनी ने महिलाओं के लिए एक दवा बनाई है, ऐड्डी, जो 'फीमेल वायग्रा' के नाम से चर्चा में है।



पर कई डॉक्टरों की राय लेने पर हमने पाया कि महिलाओं में 'सेक्सुअल डिजायर' यानि कामेच्छा बढ़ाने वाली ये दवा दरअसल पुरुषों के लिए बनी दवा 'वायग्रा' से बहुत अलग है।

उनके मुताबिक 'ऐड्डी' को 'फीमेल वायग्रा' कहना ही गलत है। बल्कि पुरुषों के लिए बनी 'वायग्रा' और महिलाओं के लिए बनी 'ऐड्डी' के फर्क जानने पर पुरुषों और महिलाओं की 'सेक्सुअल डिजायर' के बारे में बेहतर समझ बन सकती है।

मकसद

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'वायग्रा' का काम पुरुष की कामेच्छा बढ़ाना नहीं है बल्कि उन्हें 'इरेक्शन' पाने में मदद करना है। वहीं 'ऐड्डी' का मकसद महिलाओं की 'सेक्सुअल डिजायर' बढ़ाना है। 'ऐड्डी' महिलाओं के शरीर में 'ऑर्गैजम' पैदा करने जैसा कोई 'फिजिकल रिऐक्शन' नहीं पैदा करती।

पुरुषों में 'वायग्रा' तभी काम करेगी अगर उनमें पहले से कामेच्छा हो और वे उसे बढ़ाने का खुद प्रयास करें। वहीं 'ऐड्डी' उन महिलाओं के लिए है जिनकी 'सेक्सुअल डिजायर' खत्म या कम हो गई है। ये दवा उसे वापस जगाने में मदद करने का दावा करती है।

खाने का तरीका

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'वायग्रा' या उसके जैसी अन्य दवाओं का इस्तेमाल फौरन नतीजा पाने के लिए किया जाता है। इसीलिए ये दवा यौन संबंध बनाने से पहले खाई जाती है।

पर 'ऐड्डी' की टैबलेट रोजाना खाने की जरूरत होगी क्योंकि महिलाओं की 'सेक्सुआलिटी' ऐसे सीधे-सपाट तरीके से नहीं चलती। और एक टैबलेट खाने से फौरन नतीजा नहीं मिलता।

मेडिकल साइंस की नजर से दोनों दवाएं अलग तरीके से काम करती हैं। 'वायग्रा' जैसी दवा पुरुषों के शरीर में खून का प्रवाह बढ़ाती हैं और मूलत: 'इरेक्टाइल डिसफंक्शन' की बीमारी का इलाज करती है।

वहीं 'ऐड्डी' लगभग उसी तरह काम करती है जैसे 'डिप्रेशन' की दवा। यानि वो महिला के मस्तिष्क के केमिकल संतुलन को बदल कर 'सेक्सुअल डिजायर' बढ़ाने की कोशिश करती है।

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