मिर्गी होने के इन कारणों के बारे में जानते हैं आप?
भारत में मिर्गी की समस्या बहुत आम बात हो गई है। 'विश्व मस्तिष्क दिवस' के मौके पर जानिए, क्यों होती है मिर्गी।
दिमाग से जुड़ी बीमारियों में मिर्गी एक बेहद आम बीमारी है। इससे जुड़ी जागरूकता के प्रचार-प्रसार के लिए ′वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ न्यूरोलॉजी′ ने ′विश्व मस्तिष्क दिवस′ 22 जुलाई पर मिर्गी को इस साल की थीम के तौर पर चुना है।
दुनिया भर में पांच करोड़ से ज्यादा लोग मिर्गी के शिकार हैं और यह समस्या लगातार बढ़ रही है। भारत समेत दुनिया के तमाम देशों में मिर्गी की बीमारी आम है। शायद यही कारण है कि इस बार ′वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ न्यूरोलॉजी′ ने ′विश्व मस्तिष्क दिवस′ पर मिर्गी को थीम बनाया है। यह रोग दिमाग में इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी (विद्युत प्रवाह) की गड़बड़ी के कारण होता है।
मिर्गी आने के कारण
मिर्गी आने का कारण जेनेटिक होने के अलावा सिर में चोट लगना, इन्फेक्शन, ट्यूमर, कोई सदमा, मानसिक तनाव, स्ट्रोक आदि हो सकता है।
यदि किसी बच्चे को मिर्गी की शिकायत है, तो कोई मानसिक कमी भी इसका कारण हो सकती है। आमतौर पर मिर्गी आने पर रोगी बेहोश हो जाता है। यह बेहोशी चंद सेकेंड, मिनट या घंटों तक हो सकती है। दौरा समाप्त होते ही मरीज सामान्य हो जाता है।
यदि किसी की बेहोशी दो-तीन मिनट से ज्यादा है, तो यह जानलेवा भी हो सकती है। उसे तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए । कुछ लोग मिर्गी आने पर रोगी को जूता, प्याज आदि सुंघाते हैं, इसका मिर्गी के इलाज से कोई संबंध नहीं है।
अगर किसी को एक से ज्यादा बार दौरा पड़ता है, तो उसे मिर्गी माना जाता है। डॉ. ईईजी और सिटी स्कैन से मस्तिष्क की जांच कर मिर्गी के कारणों का पता लगाते हैं और इसका इलाज करते हैं। अमूमन रोगी को 18 महीने से तीन साल तक मिर्गी के इलाज संबंधी दवा खानी होती है।