सकारात्मक सोचेंगे तो उम्र बढ़ेंगी
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एल्बर्ट आइन्सटाइन कॉलेज ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने 95 वर्ष से अधिक आयु के 500 अश्केनाजी पारसियों और उनके 700 बच्चों के परीक्षण के आधार पर इस तथ्य का पता लगाया है।
शोधकर्ता नीर ब्राजीलियन बताते हैं, 'जब मैंने यह परीक्षण शुरू किया तो पाया कि इन लोगों की लंबी उम्र के पीछे इनकी सकारात्मक सोच का बहुत योगदान है। इनमें से अधिकतर लोग सकारात्मक और बात को हल्के में लेने के मिजाज वाले हैं। ये लोग भावों को मन में रखने के बजाय खुलकर कह देते हैं।'
साथ ही शोधकर्ता यह भी कहते हैं कि लोगों के व्यक्तित्व संबंधी लक्षण बहुत हद तक उनके जीन्स पर भी निर्भर करते हैं। ऐसे में व्यवहार या व्यक्तित्व का संबंध हमारी उम्र के साथ भी हो सकता है। इस शोध का विस्तृत विवरण 'एजिंग' पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।