हड्डियों में दर्द को हल्के में न लें, हो सकता है यह रोग
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हमारी हड्डियां कैल्शियम, फॉस्फोरस, विटामिंस और मिनरल्स से बनी होती हैं। इनमें से किसी भी पदार्थ की कमी हड्डियों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। इसके अलावा आजकल की जीवनशैली भी हड्डियों की सेहत के लिए किसी खतरे से कम नहीं है।
ऐसे में यदि आपकी हड्डियां दर्द या सूजन के जरिए आपको संकेत दे रही हैं, तो उसे सामान्य मानकर नजरअंदाज करने की बजाय समय रहते डॉक्टर से सलाह लें।
दर्द में छिपा है बीमारी का राज
हड्डियों में होने वाला दर्द, सूजन या दर्द वाले स्थान के गर्म या ठंडा होने जैसे लक्षण गंभीर बीमारी की तरफ संकेत करते हैं। जानकारों की मानें तो अक्सर रात में हड्डियों में होने वाला दर्द बोन ट्यूमर हो सकता है। ट्यूमर बढ़ने के साथ-साथ दर्द भी बढ़ता रहता है।
टीबी भी आज के समय में एक आम, लेकिन खतरनाक बीमारी बन गई है। यदि टीबी ग्रस्त व्यक्ति को हड्डी में दर्द हो रहा है या सूजन है, तो यह बोन संबंधी टीबी हो सकता है।
संक्रमण के कारण स्वस्थ व्यक्ति भी इस बीमारी की चपेट में आ सकता है। इसे सेकेंड्री इंफेक्शन भी कहा जाता है। शहरों में रहने वाले लोगों की दिनचर्या में शारीरिक श्रम न के बराबर होता है। ऐसी स्थिति में ऑस्टियोपोरोसिस होने का खतरा रहता है, जिससे हड्डियां कमजोर होने के साथ-साथ असहनीय दर्द भी होता है। ऐसे में जरा-सी चोट लगने से हड्डियां डैमेज हो जाती हैं। आजकल का ऑफिस कल्चर भी हड्डियों के गंभीर रोगों को दावत देता है। लगातार काम करना, तनाव, कुर्सी पर बैठे रहने से सरवाइकल, बैक पेन, जोड़ों में दर्द जैसी समस्याएं बेहद कम उम्र में ही सामने आने लगी हैं।
शुरुआत में साधारण महसूस होने वाले ये दर्द यदि बढ़ जाएं या इन पर ध्यान न दिया जाए, तो व्यक्ति पैरालाइज्ड भी हो सकता है। पैरों में होने वाला दर्द थकान से भी हो सकता है या फिर इसके पीछे कोई दूसरा कारण भी हो सकता है। यदि व्यक्ति धूम्रपान करता है, तो इस दर्द को गंभीरता से लेना चाहिए। धूम्रपान से भी हड्डियों की नसों में खून की सप्लाई रुक जाती है और दर्द होने लगता है, इसे बर्जर डिसीज कहते हैं। उपचार न होने पर हड्डियां कमजोर हो सकती हैं।
बोन डिसीज के कारण
- अनुवांशिक
- संक्रमण
- खानपान सही न होना
- शारीरिक श्रम का अभाव
- ज्यादा समय तक घरों में रहना
- व्यायाम न करना।
- विटामिन-डी की कमी
इलाज
शुरुआती स्तर पर यदि बोन 'टीबी की पहचान हो जाए, तो इसे दवाओं से नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन ज्यादातर मामलों में सर्जरी ही विकल्प होता है। बोन संबंधी टीबी में 99 प्रतिशत रोग दवाओं से सही हो जाते हैं, यदि बीमारी की पहचान देर से हुई है, तो सर्जरी करनी होती है।
बच्चों में रिकेट्स रोग होने पर दवाओं और विटामिन की खुराक से उपचार संभव है, लेकिन यदि हाथ-पैर टेढ़े-मेढ़े हो जाते हैं, तो उस स्थिति में सर्जरी ही विकल्प है।
बर्जर डिसीज में खून को पतला करने की दवाई दी जाती है और धूम्रपान पूरी तरह से छोड़ना ही इसके लिए प्रभावी उपचार भी हो सकता है। सरवाइकल या बैक पेन की स्थिति में व्यायाम और फिजियोथेरेपी जैसे उपायों से इसे दूर किया जा सकता है।
डॉक्टर कहते हैं
मेरठ के आर्थोपेडिक्स डिपार्टमेंट एलएलआर मेडिकल कालेज में प्रोफेसर डॉ. परवेज अहमद बताते हैं कि हड्डियां शरीर के ढांचे को मजबूत रखती हैं, इसलिए इनका ध्यान रखना जरूरी होता है। यदि शरीर के किसी भी हिस्से में दर्द या सूजन है, तो उसे नजरअंदाज न करें। खुद ही डॉक्टर न बनें। लगातार दर्द है तो तुरंत चिकित्सक से सलाह लें।
रोजाना व्यायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। संतुलित भोजन जिसमें, आयोडिन और मिनरल्स की प्रचुर मात्रा भी हो, उसे डेली डाइट में शामिल करें। दर्द को अनदेखा करने से यह बड़ी बीमारी बन सकता है।