फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Lifestyle Archives ›   social media snatching sleep from children

सोशल मीडिया से बच्चों की नींद का गजब है कनेक्शन, जानें क्या?

Wed, 16 Sep 2015 12:22 PM IST
Updated Wed, 16 Sep 2015 12:22 PM IST
विज्ञापन
social media snatching sleep from children

शोध के मुताबिक बच्चों की नींद टूटने की वजह सोशल मीडिया का इस्तेमाल है।

विज्ञापन


कार्डिफ़ विश्वविद्यालय की टीम ने पाया कि हर पांच बच्चों में से एक से ज़्यादा ने रात में उठ कर सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया और इसके चलते अगले दिन स्कूल में उन पर थकान हावी रही।

पूरे वेल्स के अलग अलग स्कूलों के 848 बच्चों का सर्वे किया गया और इसमें पाया गया कि हर तीन बच्चे में से एक बच्चा लगातार थका हुआ था।

लेकिन इसकी तुलना में उन बच्चों का संख्या कहीं ज़्यादा थी जिन्होंने सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं किया और उन सभी बच्चों के जागने का समय एक ही था।

ऐसे रहे सर्वेक्षण

social media snatching sleep from children

पहला सर्वेक्षण 12 से 13 साल के 412 बच्चों पर किया गया। इनमें 22 फ़ीसदी बच्चे ऐसे थे जो कि सोशल मीडिया के इस्तेमाल के चलते हर रात जगाते थे।

14 प्रतिशत बच्चे ऐसे थे, जिनकी नींद कम से कम हफ़्ते में कम से कम एक बार टूटती थी।

आयु वर्ग: 14 से 15 साल

दूसरा सर्वेक्षण 14 से 15 साल के 436 बच्चों पर किया गया। इस सर्वे के मुताबिक ऐसे बच्चों की संख्या 23 प्रतिशत थी जो कि सोशल मीडिया के इस्तेमाल के चलते जागते थे।

इस आयु वर्ग में 15 प्रतिशत बच्चे ऐसे थे जो कि हफ़्ते भर में कम से कम एक बार सोशल मीडिया का इस्तेमाल के चलते जागते थे।

ये शोध कार्डिफ़ विश्वविद्यालय के डॉ किम्बर्ले हॉर्टॉन ने किया है। उनका कहना है, 'लगता है अब वक्त आ गया है कि रात के दौरान सोशल मीडिया के इस्तेमाल को बढ़ावा ना दिया जाए।

शोध में पाया गया कि सही वक्त पर बिस्तर पर ना जाने और ना सोने के चलते ही बच्चे हमेशा थके रहते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed