सुअरों की मदद से हो सकेगा इंसानों में अंगों का ट्रांसप्लांट, जानिए कैसे
अब जल्द ही सुउर के अंगों को इंसानों में इस्तेमाल करने की तकनीक सामने आ सकती है। इसी पर काम कर रहे हावर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जॉर्ज चर्च और उनके साथियों ने क्रिस्पर नाम की तकनीक का इस्तेमाल कर सुअर के सेल में मौजूद डीएनए में बदलाव करने की कोशिश की है ताकि उन्हें इंसानों में प्रयोग किए जाने लायक बनाया जा सके।
बीबीसी की खबर के अनुसार शुरुआती दौर के काम में उन कमियों को और इंफेक्शन को दूर करने क प्रयास जारी हैं जो सुअर के डीएन में मौजूद होते हैं। अगर यह प्रयोग सफल रहा तो इससे इंसानो में अंगों के ट्रांसप्लांट में मदद मिलेगी। हालांकि अभी कई सालों की रीसर्च की और जरूरत है।
काफी समय से वैज्ञानिक सुअरों के टिशू में बदलाव करने की मुसीबत से जूझ रहे हैं ताकि इंसानी शरीर उसे आसानी से अपना सके लेकिन इम्मूयन सिस्टम हर बार उसे नकार देता है।
मेडिकल साइंस में क्रांति ला सकेगा यह कदम
क्रिस्पर एक नई वैज्ञानिक तकनीक है जो वैज्ञानिकों को सुअर के डीएनए के साथ कांट छांट करने और उसमें बदलाव करने में मदद करती है। प्रोफेसर चर्च ने सुअर के सेल में पाए गए पॉर्काइन एंडोजिनस रेट्रोवायरस नाम के वायरस के असर को कम करने के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल किया है।
यह खास वायरस इंसानों में संक्रमण पैदा कर सकता है। प्रोफेसर का दावा है कि अगर यह खोज सफल रही तो जानवरों के अंगों को इंसानों में इस्तेमाल किया जा पाएगा। इस प्रक्रिया को जीनोट्रांसप्लांटेशन कहते हैं और यह अंग ट्रांस्प्लांट से जुड़ी कई मुसीबतों का हल साबित होगा।