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क्या सोते वक्त आपके साथ भी कुछ ऐसा होता है?
Updated Sat, 24 Jan 2015 08:06 AM IST
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जब हम अपने शरीर को सोने की अवस्था में ले जाते हैं तो हमारा दिमाग़ कुछ हरकतें करता है और इसका नतीजा होता है हमारे हाथों और पैरों का फड़कना। कुछ लोग इन झटकों से चौंक जाते हैं तो कुछ शर्मिंदा भी होते हैं।
जहाँ तक मेरा सवाल है तो मैं इन झटकों से रोमांचित होता हूँ।
हालाँकि कोई नहीं जानता कि इन झटकों की असल वजह क्या है, लेकिन मेरे लिए ये दिमाग़ को नियंत्रित करने की जद्दोजहद का परिणाम है। वो जद्दोजहद जो जागृत अवस्था और सपनों के बीच होती है।
सपनों की दुनिया
सामान्य तौर पर जब हम नींद में होते हैं तो शरीर शिथिल होता है।
यहाँ तक कि सुस्पष्ट सपनों के दौरान भी हमारी मांसपेशियां शिथिल और आराम से रहती हैं और इनमें आंतरिक जोश की कोई झलक नहीं मिलती है।
नींद के दौरान बाहरी दुनिया से आप आतौमर पर अलग-थलग रहते हैं, प्रयोगों से भी पता चला है कि नींद के दौरान अगर आपकी पलकें खुली हुई भी हों और इनमें टॉर्च की रोशनी चमकाई जाए तब भी आपके सपनों में कोई खलल नहीं पड़ता।
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लेकिन सपने देखने वालों और बाहरी दुनिया के बीच दरवाज़े पूरी तरह बंद नहीं होते। सपने देखने वाले दिमाग़ को दो तरह की गतिविधियां प्रभावित करती हैं और उनमें से हरेक के पास कहने के लिए अलग कहानी होती है।
दिमाग की लड़ाई
नींद के दौरान जो सबसे सामान्य गतिविधि होती है वह है पुतलियों की हरकत। जब हम सपने देखते हैं तो सपने के अनुसार ही हमारी आंखें हरकत करती हैं।
मसलन, अगर हम सपने में टेनिस का मैच देख रहे हैं तो हमारी आंखें हर वॉली पर बाएं से दाएं चलेंगी। सोते हुए आदमी की आंखों में हलचल देखने से साफ पता चल जाएगा कि वह सपना देख रहा है।
नींद में हाथ-पैरों का फड़कना आमतौर पर बच्चों में देखा गया है। जब हमारे सपने बेहद सरल होते हैं तो उनसे कोई आभास नहीं मिलता कि सपनों की दुनिया में क्या हो रहा है।
मसलन यदि आप सपने में बाइक चला रहे हों तो आपके पैर गोल-गोल नहीं घूमेंगे।
ये झटके इस बात का संकेत हैं कि गतिशील अवस्था का अभी दिमाग़ पर नियंत्रण है और शिथिल अवस्था ने अब इसे अपने नियंत्रण में लेना शुरू कर दिया है।
दो सिस्टम
दिमाग़ में सोने के लिए कोई ऑन-ऑफ़ का स्विच नहीं है, बल्कि दो परस्पर विरोधी सिस्टम हैं जो बारी-बारी से दिमाग़ का नियंत्रण अपने पास लेते रहते हैं।
कुछ लोगों का कहना है कि उनके शरीर में तब झटके आते हैं, जब वे सपने में गिर रहे होते हैं या किसी उलझन में होते हैं।
लेकिन यह दुर्लभ घटना होती है और इसे स्वप्न संयोजन कहा जाता है, जहां कोई बाहरी वस्तु जैसे अलार्म घड़ी आपके सपनों में तैयार होती है।
जब ऐसा होता है तो यह वास्तविक कहानी गढ़ने की हमारे दिमाग़ की क्षमता को दिखाता है।
जद्दोजहद
निंद्रा और अनिंद्रा के बीच की इस जद्दोजहद में दिमाग़ अपने संक्रमण दौर से गुजरता है।
जगने की अवस्था में हम बाहरी घटनाओं की पहचान करते हैं, जबकि सपना देखने की अवस्था में दिमाग़ अपनी गतिविधियों से घटनाओं की पहचानने की कोशिश करता है।
जब हम नींद में होते हैं तो हमारी दो तरह की हलचलों में समरूपता होती है।
पुतलियों का तेज़ी से चलना हमारे सपने में होने का संकेत है, जिसे जागती हुई आँखों से देखा जा सकता है। जबकि शरीर के झटके जगी हुई अवस्था के संकेत है, जो सपनों की दुनिया में घुसने की तैयारी में हैं।
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जहाँ तक मेरा सवाल है तो मैं इन झटकों से रोमांचित होता हूँ।
हालाँकि कोई नहीं जानता कि इन झटकों की असल वजह क्या है, लेकिन मेरे लिए ये दिमाग़ को नियंत्रित करने की जद्दोजहद का परिणाम है। वो जद्दोजहद जो जागृत अवस्था और सपनों के बीच होती है।
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सपनों की दुनिया
सामान्य तौर पर जब हम नींद में होते हैं तो शरीर शिथिल होता है।
यहाँ तक कि सुस्पष्ट सपनों के दौरान भी हमारी मांसपेशियां शिथिल और आराम से रहती हैं और इनमें आंतरिक जोश की कोई झलक नहीं मिलती है।
नींद के दौरान बाहरी दुनिया से आप आतौमर पर अलग-थलग रहते हैं, प्रयोगों से भी पता चला है कि नींद के दौरान अगर आपकी पलकें खुली हुई भी हों और इनमें टॉर्च की रोशनी चमकाई जाए तब भी आपके सपनों में कोई खलल नहीं पड़ता।
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लेकिन सपने देखने वालों और बाहरी दुनिया के बीच दरवाज़े पूरी तरह बंद नहीं होते। सपने देखने वाले दिमाग़ को दो तरह की गतिविधियां प्रभावित करती हैं और उनमें से हरेक के पास कहने के लिए अलग कहानी होती है।
दिमाग की लड़ाई
नींद के दौरान जो सबसे सामान्य गतिविधि होती है वह है पुतलियों की हरकत। जब हम सपने देखते हैं तो सपने के अनुसार ही हमारी आंखें हरकत करती हैं।
मसलन, अगर हम सपने में टेनिस का मैच देख रहे हैं तो हमारी आंखें हर वॉली पर बाएं से दाएं चलेंगी। सोते हुए आदमी की आंखों में हलचल देखने से साफ पता चल जाएगा कि वह सपना देख रहा है।
नींद में हाथ-पैरों का फड़कना आमतौर पर बच्चों में देखा गया है। जब हमारे सपने बेहद सरल होते हैं तो उनसे कोई आभास नहीं मिलता कि सपनों की दुनिया में क्या हो रहा है।
मसलन यदि आप सपने में बाइक चला रहे हों तो आपके पैर गोल-गोल नहीं घूमेंगे।
ये झटके इस बात का संकेत हैं कि गतिशील अवस्था का अभी दिमाग़ पर नियंत्रण है और शिथिल अवस्था ने अब इसे अपने नियंत्रण में लेना शुरू कर दिया है।
दो सिस्टम
दिमाग़ में सोने के लिए कोई ऑन-ऑफ़ का स्विच नहीं है, बल्कि दो परस्पर विरोधी सिस्टम हैं जो बारी-बारी से दिमाग़ का नियंत्रण अपने पास लेते रहते हैं।
कुछ लोगों का कहना है कि उनके शरीर में तब झटके आते हैं, जब वे सपने में गिर रहे होते हैं या किसी उलझन में होते हैं।
लेकिन यह दुर्लभ घटना होती है और इसे स्वप्न संयोजन कहा जाता है, जहां कोई बाहरी वस्तु जैसे अलार्म घड़ी आपके सपनों में तैयार होती है।
जब ऐसा होता है तो यह वास्तविक कहानी गढ़ने की हमारे दिमाग़ की क्षमता को दिखाता है।
जद्दोजहद
निंद्रा और अनिंद्रा के बीच की इस जद्दोजहद में दिमाग़ अपने संक्रमण दौर से गुजरता है।
जगने की अवस्था में हम बाहरी घटनाओं की पहचान करते हैं, जबकि सपना देखने की अवस्था में दिमाग़ अपनी गतिविधियों से घटनाओं की पहचानने की कोशिश करता है।
जब हम नींद में होते हैं तो हमारी दो तरह की हलचलों में समरूपता होती है।
पुतलियों का तेज़ी से चलना हमारे सपने में होने का संकेत है, जिसे जागती हुई आँखों से देखा जा सकता है। जबकि शरीर के झटके जगी हुई अवस्था के संकेत है, जो सपनों की दुनिया में घुसने की तैयारी में हैं।