अमेरिका के लिए अब खतरनाक नहीं रहा कोलेस्ट्रोल, लेकिन क्यों?
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करीब चार दशक तक कोलेस्ट्रोल को कोसने वाले अमेरिका ने अब कह दिया है कि खून में कोलेस्ट्रोल बढ़ने का खाने पीने से कोई संबंध नहीं होता। न कोई अच्छा कोलेस्ट्रोल होता है और न बुरा, और न ही इसका दिल के रोगों से कोई लेना देना है।
क्या वाकई कोलेस्ट्रोल दिल के लिए खतरनाक नहीं रहा या मामला कुछ और है?
कई कार्यकर्ता इसे अब तक का सबसे बड़ा मेडिकल घोटाला तक कह रहे हैं।
वसा उतना बुरा नहीं जितना सोचते थे
अमेरिकी डाइटरी गाइडलाइन्स 2015-20 की मानें तो सेचुरेटेड फैट वाले खाद्य पदार्थ जैसे अंडा, चीज, मीट, चावल, आलू, पिज्जा, पास्ता, सैंडविच और बर्गर आदि सेहत खासकर दिल के लिए उतने बुरे नहीं है जितने समझे जा रहे थे। इतना ही नहीं फूड डिपार्टमेंट ने कोलेस्ट्रोल को दिल की बीमारी के लिए खतरनाक तक मानने से इनकार कर दिया है।
हैरानी की बात है कि पिछले चार दशक में अमेरिका ही सेचुरेटेड फेट (संतृप्त वसा) और कोलेस्ट्रोल को सेहत के लिए खतरा मानकर दुनिया भर में इसका प्रचार कर रहा था।
70, 80, 90 और 2010 के दशक में अमेरिका लोगों से कहता रहा है कि उन्हें कोलेस्ट्रोल युक्त या वसायुक्त खाना नहीं खाना चाहिए क्योंकि इससे मोटापा आता है और आखिरकार इससे दिल संबंधी और दूसरी कई बीमारियां होती हैं।
अमेरिकी धारणा के बलबूते ही विश्व स्तर पर कोलेस्ट्रोल कम करने वाली दवाओं की भरमार और जबरदस्त बिक्री हुई। लेकिन अब अमेरिका पलट गया है।
कोलेस्ट्रोल अब बुरा क्यों नहीं
कहा जा रहा है कि अमेरिकी फूड डिपार्टमेंट ने पिछले साल मार्च में कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा कराए गए एक हैल्थ सर्वे को आधार बनाया है। पिछले साल कैंब्रिज यूनिवर्सिटी द्वारा 53000 लोगों पर किए गए एक शोध में ये बात सामने आई कि सेचुरेटेड फैट का सेवन करने वाले और न करने वाले दोनों ही तरह के लोगों की ह्रदय संबंधी समस्याएं एक जैसी होती है।
शोध में शामिल किए गए पचास फीसदी लोगों ने सेचुरेटेड फैट का सेवन किया और पचास फीसदी ने नहीं। लेकिन दोनों ही समूहों की ह्रदय संबंधी गतिविधियां और बीमारियां एक जैसी पाई गईं।
एक रिपोर्ट में कहा गया है, "अब इस बात के सबूत मिले हैं कि खाने में शामिल कोलेस्ट्रोल और सीरम यानी ख़ून में पाए जाने वाले कोलेस्ट्रोल का कोई सीधा संबंध नहीं होता."
शोध में निष्कर्ष निकाला गया कि सेचुरेडेट फैट दिल के लिए प्रचलित धारणाओं जितना खतरनाक नहीं हैं। लेकिन ट्रांसफैट का अधिक सेवन दिल की धमनियों में रुकावट का कारण बन सकता है।
एक जर्नल में छपे एक लेख में इस शोध का हवाला देते हुए कैंब्रिज यूनिवर्सिटी ने ये भी कहा था कि सेचुरेटेड फैट को लेकर पुरानी अवधारणा में बदलाव होने से खान पान के नियमों में बदलाव होना चाहिए ताकि लोग सेचुरेटेड फैट में मौजूद ओमेगा 3 और फैटी एसिड जैसे तत्वों का लाभ उठा सकें।
इस निर्णय का डॉ़क्टर स्वागत कर रहे हैं। अमेरिकी हृदयरोग विशेषज्ञ डॉ स्टीवन निसेन कहते हैं, "यह सही निर्णय है, अब तक हमने जो गाइडलाइन्स दिए वे गलत थे। वे कई दशकों से गलत थे।"
वे बताते हैं कि शरीर को जितने कोलेस्ट्रोल की जरूरत होती है उसका 20 प्रतिशत ही खाने पीने के जरिए मिलता है और शेष की पूर्ति हमारा लीवर करता है। इसलिए यह कहना गलत है कि खाने पीने का कोलेस्ट्रोल के नियंत्रण से कोई संबंध है।
मोटापा नहीं तो कौन है दिल का असली विलेन
पिछले साल के आंकड़ों ने यह दावा तो किया कि वसा यानी चर्बी दिल के लिए खलनायक नहीं है। लेकिन अब सवाल उठता है कि आखिर दिल के लिए खतरनाक क्या है?
अमेरिकी डाइटरी गाइडलाइन्स में इसी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा है कि आप नियमित तौर पर सेचुरेटेड फैट का सेवन कर सकते हैं बशर्ते उसमें ऊपर से ट्रांस फैट न मिलाया गया हो।
सैचुरेटेड फैट यानी संतृप्त वसा हमें पशुओं से प्राप्त होने वाले आहार जैसे दूध, अंडा, चीज, मक्खन, मीट इत्यादि में मिलती है।
सैचुरेटेड फैट वाली खाद्य वस्तुओं को प्रोसेस्ड करके बनने वाले खाद्य पदार्थ ट्रांस फैट की श्रेणी में आते हैं। इनमें अधिकतर चीजें पैकेज्ड और रेडी टू ईट श्रेणी में मिलेंगी। चीजबर्गर, फ्रैंच फ्राइज, कैरल्स, आइसक्रीम, पाइ, चिकेन नगेट्स और डॉनट, पिज्जा, केक, पाई, डबलरोटी और बन, पेस्ट्रीज, वनस्पति घी में आपको ट्रांस फैट मिलेगा।
इस बार शुगर यानी शर्करा को सेहत का सबसे बड़ा दुश्मन माना गया है। गाइडलाइन्स में मीठी चीज़ों के साथ साथ नमक का सेवन भी कम से कम करने की सलाह दी गई है।
सबसे बड़ा मेडिकल घोटाला?
हृदय रोगों पर शोध करने वाले एक संस्थान के डॉक्टर जॉर्ज वी मन कहते हैं, "खाने में सैचुरेटेड फैट और कोलेस्ट्रोल का हृदय रोगों से कोई संबंध नहीं होता। यह गलत है और दरअसल पिछली सदी या कई सदियों का सबसे बड़ा मिथक है।"
इस क्षेत्र में काम करने वाले कार्यकर्ता मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर कहते हैं कि अच्छा या बुरा कोलेस्ट्रोल यानी एलडीएल या एचडीएल जैसी कोई चीज ही नहीं होती। उनके अनुसार यह अब तक का सबसे बड़ा मेडिकल घोटाला है.
एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि पिछले चार दशकों में अकेले अमेरिका में कोलेस्ट्रोल घटाने की दवा के नाम पर दवा कंपनियों ने अमेरिकी स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर 15 खरब डॉलर (लगभग 900 खरब रुपए) के वारे न्यारे कर लिए हैं।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि कोलेस्ट्रोल घटाने का जो बड़ा कारोबार अस्पतालों में चल रहा है वह वास्तव में एक बड़ा खतरनाक मामला है और इसके नाम पर चार दशकों में अमेरिका और दुनिया भर में करोड़ों लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ होता रहा है।
इस बार सेहत के लिए खतरा कोलेस्ट्रोल नहीं बल्कि शुगर को कहा गया है।
अगर लॉबिंग वाले कयास सही हुए तो वो दिन दूर नहीं जब शुगर कंट्रोल करने वाली दवाओं की भरमार दुनिया में देखने को मिले। आखिर बाजार भी कोई चीज है ना!