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कहीं आपका डर फोबिया तो नहीं बन गया

नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क

Updated Wed, 28 Nov 2012 05:21 PM IST
most common phobias
हमारे मन में अक्सर किसी न किसी चीज का डर जरूर होता है। किसी को ऊंचाई से डर लगता है तो किसी को अंधेरे से, कोई भीड़ देखकर घबराता है तो कोई अकेलेपन से कतराता है। कब मन के भीतर छिपा यह डर फोबिया में बदल जाता है पता ही नहीं चल पाता।
हम अपने फोबिया से इतना घबराते हैं कि इसे दूर करने के बजाय इससे बचने के उपाय खोजते रहते हैं। जबकि मनोचिकित्सा की मदद से फोबिया को दूर करने में बहुत आसानी होती है। तो जानिए कि आपके ऐसे कौन से डर हैं जो चिकित्सा की भाषा में फोबिया कहे जाते हैं और उनका उपचार संभव है।

अंधेरा का फोबिया
क्या आप अंधेरे कमरे में जाने से डरते हैं? यह एक तरह का फोबिया है जो एक तरह की मानसिक समस्या हो सकता है। इसमें व्यक्ति किसी स्थिर वस्तु, अंधेरा या बहुत स्थिर वातावरण में जाने से कतराता है। इस फोबिया का उपचार मनोचिकित्सक कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी से किया जा सकता है।   

मकड़े का फोबिया
कुछ लोगों को मकड़े से बहुत डर लगता है। कई बार उनका डर उनपर इस कदर हावी हो जाता है कि वे टीवी या फोटो में तक में मकड़ा देखकर घबरा जाते हैं। उनका यह डर फोबिया कहलाता है। मनोचिकित्सा की भाषा में इसे आर्कनोफोबिया भी कहते हैं। इसमें मकड़ा देखते ही व्यक्ति रोना, चिल्लाना या आवाक हो सकता है या फिर उसे बहुत अधिक पसीना आ सकता है। पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में यह फोबिया अधिक पाया जाता है।

ऊँचाई का फोबिया
कुछ लोगों को बहुत ऊँची जगह पर जाने से डर लगता है। यह भी एक तरह का एक्रोफोबिया है जिसमें ऊँची जगह पर पहुंचते ही व्यक्ति को पैनिक अटैक आ जाता है। ऐसी स्थिति‌ से अगर उन्हें हटाया नहीं गया तो वे घबराहट में उन्हें बुखार या उल्टियां तक आ सकती हैं। हिचकाक की फिल्म 'वर्टिगो' में नायक इसी फोबिया का शिकार था।

भीड़ का फोबिया
कुछ लोग अकेलापन पसंद करते हैं पर कई बार वे अपने अकेलेपन के इतने आदि हो जाते हैं कि जरा सी भीड़ में भी उनका दम घुटने लगता है। वे न सिर्फ भीड़ में जाने से कतराते हैं बल्कि आगे चलकर सामाजिक गतिविधियों में भाग लेने से भी उन्हें डर लगता है। उनका यह डर एक तरह का फोबिया है जिसे सही परामर्श और चिकित्सा से दूर किया जा सकता है।  

कुत्तों का फोबिया
कुत्तों से डरना बेहद आम है लेकिन अगर कोई व्यक्ति कुत्ते के डर से गली में निकलने से ही कतराए तो उसका यह डर फोबिया में बदल रहा है। कई बार इस फोबिया के पीछे की वजह उसका व्यक्तिगत अनुभव भी होते है जैसे कभी उसे किसी कुत्ते न काटा हो आदि।

सुई से डर
बच्चों में सुई का डर तो बेहद आम है लेकिन कई बार बड़े भी सुई से इस कदर डरते हैं कि उनका यह डर फोबिया में तबदील हो जाता है। यहां तक कि सुई के डर से वह डॉक्टरी इलाज तक नहीं करवाना चाहते। यह एक तरह का ट्राइपानोफोबिया है जिसमें पैनिक या सुन्न पड़ने की आशंका अधिक होता है। इसमें दिल की धड़कन बहुत बढ़ जाती है और व्यक्ति बहुत अधिक घबरा जाता है।

जर्म या डस्ट का फोबिया
धूल-मिट्टी और गंदगी से दूरी तो आपको एक सेहतमंद जीवन देती है पर कुछ लोग सफाई के इस कदर आदी हो जाते हैं कि उनके मन में धूल और कीटाणुओं का फोबिया पैदा हो जाता है। यह एक तरह का माइसोफोबिया है। इस दौरान थोड़ी सी धूल होने पर रोगी को घबराहट, सांस लेने में दिक्कत, धड़कन बढ़ना, सीने में दर्द और कंपकंपी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। 
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