ये हैं वो 12 प्रतिभागी, जिनके बीच हो रहा है मिस नॉर्थ इंडिया प्रिंसेस महामुकाबला
अमर उजाला के ओर से आयोजित सलाना इस महाआयोजन का आज आखिरी दिन है। मौका है फेम मिस नार्थ इण्डिया प्रिंसेस 2015 का।
इसमें देश के उत्तरी भाग से हजारों की संख्या में लड़कियों ने भाग लिया था जिसमें से सिर्फ 12 ही आखिरी राउंड तक पंहुची हैं। इन 12 प्रतिभागियों में कांटे की टक्कर होगी क्योंकि कोई भी किसी से कम नहीं है।
सबने खुद को साबित करके यहां तक का सफर पूरा किया है। अब देखना है कि ये आज आखिरी मुकाबले में फेम मिस नार्थ इण्डिया प्रिसेंस के ताज का असली हकदार कौन होगा। आप भी मिलिए उन 12 प्रतिभागियों से जिनमें ये मुकाबला होने वाला है।
शो पाने के लिए बोला झूठ, कहा कि मॉडलिंग आती है
दिल्ली की रहने वाली मनीषा पेशे से एयर होस्ट्रेस रही हैं। लेकिन फैशन का जुनून उन्हें मजबूर करता रहा और आखिरी में नौकरी छोड़कर रैम्प शो के लिए उतर आईं।
मनीषा सबकी तरह ही स्टेज से डर लगता था लेकिन स्कूल से ही सांस्कृतिक कार्यक्रमो में भाग लेती थी और कई बार हारमोनियम बजाया तो स्टेज की डर दूर हो गया। इसके बाद तो मनीषा ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। मनीषा इण्डिया टुडे के कवर पेज पर आ चुकी हैं। इसके अलावा यूटीवी बिंदास के प्रमोशनल एड में भी दिखीं।
फैशन इंडस्ट्री में जाना था पर मां का सपोर्ट नही मिला
मिस नार्थ इण्डिया की प्रतिभागी शगुफ्ता को अपने मन का करियर चुनने से पहले घर की तरफ से परेशानियों का सामना करना पड़ा। शगुफ्ता का कहना है कि मुस्लिम परिवेश होने के कारण और भी कठिनाईयों का सामना करना पड़ा। लेकिन हार नहीं मानी और घरवालों को समझाया और आखिर में बात बन गई। कॉलेज से शुरु किया पहला रैम्प वॉक और उसके बाद शगुफ्ता ने अपना पोर्टफोलियो बनवाया। आज शगुफ्ता पहुंच गई हैं मिस नार्थ इण्डिया के फाइनल में।
जानवरों से बहुत प्यार करती हैं नोएडा कि समीक्षा
हंसराज कॉलेज से मेथ्स की पढ़ाई कि हैं समीक्षा ने। काफी क्रयेटिव हैं। पेंटिग, पियानो और डांस सभी का शौक है। सामाजिक कार्यो में भी हाथ बटांती हैं। काफी फिटनेस फ्रीक हैं समीक्षा और अपनी सेहत को लेकर कभी कोई लापरवाही नहीं करती हैं।
मोदीनगर जैसे छोटे शहर से ताल्लुक रखती हैं प्रिंटी
प्रिंटी ने 12वीं पास करते ही ऐयरहोस्ट्रेस की नौकरी कर ली थी। इस क्षेत्र में जाने के लिए मां ने ही प्रोत्साहित किया था। प्रिंटी की मां ने ही अखबार में एड देखकर जाने को कहा था। प्रिंटी मोदीनगर की अकेली एयरहोस्ट्रेस हैं। उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा कि वो टॉप 12 तक पहुंच चुकी हैं।
घरवालों को मनाने के लिए तीन दिन लगातार फैशनवीक ले कर गई
चड़ीगढ़ की ऊर्जा पिछले पांच महीने से ही मॉडलिंग कर रही हैं। लुधियाना का एक ब्युटी पेजेंट भी जीता है। परिवार वाले पहले तो तैयार नहीं थे बाद में घरवालों को मनाने के लिए एक अनोखा कदम उठाया और फैशन वीक में लेकर गई और बताया कि वो भी कुछ ऐसा ही करेगीं। इसके बाद परिवार उनके इस फैसले पर राजी हुए और उन्हें बढ़ावा दिया।
रॉयबरेली की एकलौती लड़की होगी जो इस इंडस्ट्री में उतरकर आई है
मिस नार्थ इण्डिया की प्रतिभागी शिखा के लिए ये किसी सपने से कम नहीं था। शिखा का बचपन का सपना रहा है कि वो फैशन इण्डस्ट्री में जाएं और एक बैहतरीन मॉडल बनें और अपने इस सपने कि तरफ वो एक एक कदम आगे बढ़ा रही हैं। लेकिन इस पूरे सफर में उनके परिवार को पूरा सहयोग रहा है। उनका परिवार हर तरह से उनके इस सपने को पूरा करने के लिए लगा हुआ है।
इसके अलावा शिखा का कहना है कि उन्होंने फैशन गुरू मार्क रॉबिनसन से भी कैटवॉक सीखा है।
कभी कैमरा फेस नहीं किया, फिर भी नार्थ इण्डिया की फाइनलिस्ट बनी
गाजियाबाद की नूपुर के लिए ये एक अनोखे सफर जैसा है। उन्होनें इससे पहले कभी भी इसतरह से रैम्पवॉक नहीं किया। नूपुर पेशे से मैनेजर हैं और सात साल से नौकरी कर रही हैं। नूपुर को लोगों की मदद करना अच्छा लगता है।
बेटी के इस फैसले से पिता डरे हुए थे, मां ने समझाया
फैशन इंडस्ट्री अनुकृति को हमेशा से ही लुभाती थी। लेकिन परिवार का साथ उसतरह से नहीं मिला। पर मां के सपोर्ट से अनुकृति आगे आईं। ये प्रतिभागी इंजीनियरिंग की स्टूडेंट हैं।
खुद से कॉम्पटीशन रखती हैं काव्या, दूसरों से नहीं
लखनऊ की रहने वाली काव्या का कहना है कि उनका परिवार काफी रुढ़िवादी है। इसके पीछे कारण शायद शहर का माहौल है। लेकिन ये सभी कारण उनके सपने को पूरा करने में उनके आड़े नहीं आई। इसके लिए काव्या ने परिवार को समझाया और तैयार किया। काव्या इसके अलावा लॉ कर रही हैं। काव्या का कहना है कि वो काफी साफ दिल की हैं। वो जो भी हैं बस मुंह पर ही कहती हैं। इस पूरे सफर में उनके दोस्तों ने उनका बखूबी साथ दिया है।
बचपन से टॉम बॉय जैसी रही हैं रुड़की की कृतिका
देहरादून से ग्राफिक्स का कोर्स कर रही हैं। परिवार का हमेशा साथ मिला। खास तौर से भाई का। भाई ने ही मिस नार्थ का फार्म भरा था। कृतिका के परिवार का कहना है कि भले ही ताज ना जीते लेकिन कुछ ना कुछ अच्छा सीखकर आएगी उनकी लड़की।
डिस्कवरी की एक डक्यूमेंटरी में 16 साल की लड़की का किरदार निभा चुकी हैं
जिस शहर से जयंती आती हैं वहां उनके उम्र की लड़कियों की शादी कर दी जाती। लेकिन उनका परिवार उनका बहुत साथ देता रहा। जयंती अपनी इस कामयाबी से खुश हैं। यहां तक की उनके गांव को उनपर बहुत नाज है। उनके गांव में जो भी फेसबुक पर है सभी ने उनकी इस उपलब्धि को शेयर किया है। ये देखकर जयंती काफी खुश हैं।
खुद को मानती हैं अंतर्मुखी
रुद्रपुर से आई अनुकृति खुद को साबित करना चाहती है क्योंकि परिवार वालें चाहते थे कि वो डॉक्टर बने लेकिन इनका तो कुछ और ही सपना था। मिस कुमांउ भी रह चुकी हैं अनुकृति। घर में मां ने सबसे ज्यादा सपोर्ट किया था। खुद अनुकृति का कहना है कि वो काफी अंतर्मुखी हैं। बहुत समय लगता हैं उन्हें लोगों से घुलने मिलने में।