बार-बार भूलने की आदत से परेशान रहते हैं?
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कार की चाबी हाथ में है, मगर आप उसे ढूंढते रहते हैं या फिर कॉलेज के दोस्तों के नाम याद करने में परेशानी होती है और खुद को व्यक्त करने के लिए भी शब्द नहीं मिलते, तो सतर्क हो जाएं। ऐसे हालात में आप ′ब्रेन फॉग′ के शिकार हो सकते हैं।
ब्रेन फॉग एक ऐसी बीमारी है, जिसमें कुछ क्षणों के लिए याददाश्त पर कोहरे की तरह एक धुंध सी छा जाती है और कुछ याद नहीं आता।
अगर इस दिमागी उलझन से बचना चाहते हैं तो थोड़ा लाइफस्टाइल बदलें, खानपान ठीक करें और थोड़ी एक्सरसाइज भी करें, फिर देखें दिमाग कैसे दौड़ने लगता है।
क्यों भूल जाते हैं
यह समस्या एकदम नहीं आती, बल्कि कई बातों से मिलकर यह परेशानी खड़ी होती है। जैसे-अपना चश्मा या कोई अन्य चीज रखकर भूल गए हैं, एकाग्र होकर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते या फिर गंभीरता से नहीं सोच पा रहे हैं।
ऐसे कई कारण हैं, जो इशारा करते हैं कि अब आप भुलक्कड़ हो रहे हैं। इन इशारों को समझें और सतर्क हो जाएं।
गलत खानपान की आदत से न केवल मोटापा बढ़ता है, बल्कि इससे हाई-ब्लड प्रेशर और हाई-कोलेस्ट्रॉल भी बढ़ता है। मेडिकल रिसर्च के मुताबिक जंक-फूड भी कमजोर मेमोरी का बड़ा कारण है।
बीमारी और दवाएं
थायरॉइड हार्मोन की कमी, हाइपरटेंशन, प्री-डायबिटीज, फाइब्रोमेल्गिया जैसी बीमारियां कॉग्निटिव सिस्टम को प्रभ्ाावित करती हैं।
इससे एकाग्रता में कमी और मेमोरी लॉस जैसे लक्षण सामने आते हैं। अनिद्रा भी ब्रेन फंक्शन को प्रभावित करती है। अवसाद कम करने वाली और एंटी-बायोटिक दवाएं भी व्यवहार में सुस्ती एवं दिमागी उलझन के लिए जिम्मेदार हैं।
जरूरी है विटामिन
विटामिन बी-12 दिमाग के लिए आवश्यक है। इसकी कमी भूलने की समस्या को बढ़ा सकती है। ब्रेन फंक्शन को सही तरीके से चलाने के लिए विटामिन-ई और विटामिन-सी भी आवश्यक है।
इसके अलावा अंडे, मछली, आटा, मेवा, सोया मिल्क या किसी अन्य खाद्य पदार्थ से एलर्जी के कारण भी ब्रेन फॉग की समस्या हो सकती है।
इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन
ब्रेन में न्यूरॉन को एक्टिव बनाए रखने के लिए सोडियम और पोटैशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स जरूरी हैं। ब्लड में पोटैशियम की कमी इलेक्टि्रकल सिग्नल को प्रभावित करती है, जिसके कारण मस्तिष्क में कन्फ्यूजन पैदा होती है या ब्रेन फॉग की समस्या होती है।
जबकि महिलाओं में भूलने की समस्या आमतौर पर हार्मोन से जुड़ी होती है। 40-50 वर्ष की महिलाओं में माहवारी चक्र में कमी आने पर भी ब्रेन फॉग अपना असर दिखाता है। ऐसे में डॉक्टर हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी से ब्रेन फॉग से उबरने में आपकी मदद कर सकते हैं।
एक्सरसाइज न्यूरोटिक फैक्टर को बढ़ाती है, जिससे दिमाग को ताजगी मिलती है। मेडिटेशन भी दिमागी रूप से मजबूत करता है और स्ट्रेस दूर करता है।
मायो क्लिनिक, यूएसए की एक रिसर्च के मुताबिक रोजाना चार कप कॉफी या चाय, सॉफ्ट ड्रिंक, चॉकलेट लेने से कैफीन की भरपूर मात्रा मिलती है और मूड अच्छा हो जाता है।
कैफीन दिमागी अस्पष्टता, नींद न आना, चिड़चिड़ापन आदि से दूर रखती है। डाइट में ओमेगा थ्री फैटी एसिड, विटामिन बी-12, विटामिन सी, ई, डी को शामिल करें। डाइट में मछली, दूध अंडा, मीट, सोया मिल्क, ऑरेंज जूस, सब्जियों को शामिल कीजिए। धूप सेंकना भी जरूरी है। एल्कोहल से बचें।
ब्रेन फॉग या भूलने की आदत की सबसे बड़ी वजह अनियमित लाइफस्टाइल है। खानपान, लंबी बीमारी, स्ट्रेस, फिजिकल एक्टिविटी न होना इस परेशानी की प्रमुख वजह है।
फिजिकल एक्टिविटी, खानपान का ध्यान रखना जरूरी है। योगा एवं मेडिटेशन करें। पॉजिटिव सोच रखें। खुश रहें। अपनी डाइट में पोषक तत्वों को शामिल कीजिए और तनाव को दूर रखें।