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तनाव दूर करने के लिए कारगर है यह उपाय

Fri, 13 Feb 2015 08:33 AM IST
Updated Fri, 13 Feb 2015 08:33 AM IST
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meditation can help in releiving stress

क्या आपने 'ध्यान' के बारे में नवीनतम अध्ययन को पढ़ा है? शायद नहीं, क्योंकि जब तक इस लेख को आप पढेंगे तब तक इस बारे में कोई और लेख आ चुका होगा।

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रिपोर्टों के अनुसार - ध्यान से ऊर्जा बढ़ती है, एकाग्रता बढ़ाने में मदद मिलती है, तनाव और चिंता दूर होती है, लचीलापन बढ़ता है और संभवतः आपके जीवन और आपके दिमाग़ में सकारात्मक बदलाव आते हैं।
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बेशक, हर व्यक्ति को ध्यान की ताक़त में विश्वास नहीं है, लेकिन यदि आप विश्वास कर भी लें तो सबसे बड़ी बाधा है अपनी दिनचर्या में इसे जगह देना।

पहले से ही अपनी व्यस्त दिनचर्या में एक और काम को जोड़ना ही तनाव बढ़ाने जैसा है।

शायद ये पहले अटपटा लगे लेकिन एक क्रांतिकारी सुझाव लीजिए - आप ऑफ़िस में काम के दौरान, ध्यान के लिए कुछ समय निकालें। जी हां, ऑफ़िस में, क्योंकि अक्सर वहाँ तनाव सबसे अधिक होता है।
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अपनी पसंदीदा फिल्मों में से एक 'द रेज़र्स एज़' में बिल मरे जीवन के अर्थ की खोज में कहता है, "किसी पहाड़ के शीर्ष पर बैठकर आध्यात्मिक ज्ञान देना आसान है। किसी ऑफ़िस में बैठकर ऐसा करना ज्यादा कठिन है, लेकिन इसके अधिक फ़ायदे हैं।"

तनाव का असर

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काम से न केवल तनाव होता है, बल्कि तनाव से काम भी प्रभावित होता है। एक तनावग्रस्त, दुखी कर्मचारी अच्छा काम नहीं कर सकता है।

सिर्फ़ ध्यान से आप निगेटिविटी (नकारात्मकता) को संतुलित कर सकते हैं और ऑफ़िस को एक ज्यादा शांत, रचनात्मक एवं उद्यमशील जगह बना सकते हैं।

दूसरा, अगर आप मेरी तरह हैं, तो आप घर की व्यस्त दिनचर्या में ध्यान या किसी अन्य बात को फिट नहीं कर सकते, ख़ासकर अगर आपकी पत्नी और बच्चे हैं और आपको पहले ही अपने पसंदीदा काम के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलता।

मेरे लिए इसका निदान यह था कि मैं ध्यान की प्रैक्टिस अपने ऑफ़िस में ही करूं: एक ऐसी जगह जहां मैं सप्ताह में पांच दिन जाता हूँ और जहां ध्यान की सर्वाधिक ज़रूरत है।

इसके लिए बहुत ज़्यादा समय नहीं चाहिए – हर दिन 10 से 15 मिनट काफी हैं – और यहां तक कि एक-दो मिनट का समय भी उपयोगी होगा।

महत्वपूर्ण यह है कि आप ऐसा करने के लिए ख़ुद को प्रतिबद्ध कीजिए, नहीं तो यह प्रभावी नहीं होगा।

जब मैं सेन फ्रांसिस्को में रहता था तो मैं अधिकतर दिनों में सुबह उठकर सूर्योदय से पहले ध्यान में शामिल होता था।

यह बहुत ही औपचारिक और बौद्ध परंपरा के अनुरूप होता था, यहां तक कि इस बात का भी खयाल रखना पड़ता था कि घर में प्रवेश करने के समय किस पांव को पहले घर के अंदर रखना है।

मुझे यह काफी पसंद था और मुझे इसकी कमी खलती है, पर मैं बाद में इसे फिर शुरू नहीं कर पाया क्योंकि इसे दोहरापाना मेरे लिए काफी मुश्किल था।

जगह का चुनाव

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यदि मुझे ऑफ़िस में ही ध्यान लगाना था, तो फिर मेरे लिए अगला सवाल था कि वहाँ इसे संभव कैसे बनाया जाए।

अपनी इस इच्छा के बारे में जिस व्यक्ति को मैंने सबसे पहले बताया वह था मैरे ऑफ़िस का मैनेजर।

मैंने उसे ईमेल किया, "आपको यह एक अस्वाभाविक आग्रह लग सकता है, पर मुझे आपकी मदद की जरूरत है। मुझे अपने ऑफ़िस में एक ऐसा कमरा चाहिए, जिसमें शीशे नहीं लगे हों और मैं हर दिन 15 मिनट तक इसका इस्तेमाल कर सकूं। मैं ध्यान के लिए इस कमरे का प्रयोग करना चाहता हूं।"

मैनेजर मेरे आग्रह से थोड़ा उलझन में पड़ गया। उसने मुझे कई जगहें दिखाईं और फिर मैंने कभी-कभार इस्तेमाल में आने वाले 'ग्रीन रूम' को चुना। यह सर्वाधिक उपयुक्त कमरा था: छोटा, शांत, इसमें दो कुर्सियां थीं और कोई फोन नहीं था।

समय निकालना

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मैंने हर दिन 30 मिनट का समय मांगा पर इस पूरे समय का मैंने कभी प्रयोग नहीं किया। कई बार मुझे दिन में इसे आगे खिसकाना पड़ता था। लेकिन जहाँ तक संभव होता, मैं ध्यान करता था।

मैं जो भी करता था उसे 10-15 मिनट के लिए टालना बहुत मुश्किल नहीं था, बशर्ते की इस वजह से कोई पहाड़ टूटने वाला न हो।

अगर आप इमरजेंसी रूम में काम करने वाले डॉक्टर नहीं हैं या छोटे बच्चों की देखभाल की ज़िम्मेदारी आप पर नहीं है, तो आप पर भी यह लागू होता है।

मैंने महसूस किया कि यदि मैं किसी बात को लेकर तनाव महसूस कर रहा हूं, तो मैं ध्यान लगाकर उससे तुरंत छुटकारा पा सकता हूँ, और लंबी सांसें भरने के बाद कम तनाव महसूस करता हूँ।

अब ध्यान का समय है

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ज़रूरी है कि आप इसे सामान्य और आसान बनाए रखें। मैंने एक व्याख्यान में हिस्सा लिया, जहाँ ध्यान की तकनीक सिखाई जाती है। उन्होंने खुद के लिए एक दिन में 'एक अच्छी सांस' लेने का लक्ष्य निर्धारित करने की सलाह दी।

मक़सद इस बात को समझना है कि थोड़ा प्रयास भी बड़ा अंतर पैदा कर सकता है। अगर आपको इसमें आनंद आता है तो आप स्वाभाविक रूप से खुशी-खुशी यह अभ्यास लंबे समय तक करेंगे।

यदि आपने पहले ध्यान नहीं किया है और आप इसे शुरू करना चाहते हैं तो इसके लिए पर्याप्त पुस्तकें, लेख और निःशुल्क वीडियो उपलब्ध हैं।
कुछ पुस्तकें आपके लिए इसमें मददगार साबित हो सकती हैं:

सर्च इनसाइड योरसेल्फ़, लेखक - शेड-मेंग तान: एकाग्रचित्तता और खुशहाली पर अपनी पुस्तक में गूगल में ध्यान की शुरूआत करने वाले चादे-मेंग तान ने तकनीकों के बारे में बताया है। इसमें आम शुरूआती तकनीक से लेकर कुछ एड्वांस्ड तकनीकें है। एड्वांस्ड तकनीक में वो आपको अच्छाई फैलाने वाली शक्ति के रूप में देखने को कहते हैं, मानो कि आप कोई बौद्ध महानायक हों।

स्टॉप, ब्रीद एंड थिंक: यह ऐप्प ध्यान की लाइब्रेरी बनता जा रहा है। इसमें जो बताया गया है वह बार-बार करने लायक है और वाचक (नैरेटर) की आवाज़ इतनी सुखद है कि इसे सुनकर मुझे नींद आने लगती है।

द मिरेकल ऑफ़ माइंडफुलनेस, लेखक - थिच न्हाट; इस पुस्तक में एक पूरा अध्याय ध्यान पर है और कई तो इतने छोटे हैं कि 10 सांसों में ख़त्म हो जाएं। यह पुस्तक बहुत ही उपयोगी है।

वन मोमेंट मेडिटेशन, लेखक – मार्टिन बोरोसोन: यह गाइड इस पर आधारित है कि आपको सिर्फ एक मिनट का समय निकालना है। छोटे अध्याय आपको अपने उस मिनट का भरपूर फायदा उठाने का मौका देते हैं। और जब आप इसे साध लेते हैं तो यह 'पावर मिनट' एक 'पावर मोमेंट' में बदल जाता है।

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