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मर्दों से भरे दफ्तर में औरतों की सेहत को हो सकते हैं ये नुकसान

Mon, 31 Aug 2015 10:08 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Mon, 31 Aug 2015 10:08 AM IST
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 Male-dominated workplaces 'can make women ill

पुरुषों के साथ दफ्तर में काम करना महिलाओं के लिए घातक हो सकता है। एक नए शोध के अनुसार ये दावा किया गया है कि उन दफ्तरों में महिलाओं के लिए काम करना सेहत के लिए बुरा हो सकता है जिन दफ्तरों में पुरुष बहुतायत में हैं।

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अमेरिका की इंडियाना यूनिवर्सिटी की एक टीम ने लंदन और अमेरिका में उन महिलाओं पर शोध किया जो कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री के विज्ञान, तकनीकि, इंजीनियरिंग आदि विभागों में कार्यरत हैं। इन दफ्तरों में 85 प्रतिशत या उससे ज्यादा पुरुष कर्मचारी कार्यरत हैं।
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शोध में बताया गया कि ज्यादा पुरुषों वाले ऐसे माहौल में कम महिला कर्मचारियों की स्थिति टोकन की तरह हो जाती है। ऐसे में महिलाओं के साथ अलग तरह के व्यवहार से दिमाग पर दबाव पड़ता है और हार्मोन्स में असंतुलन पनपता है।
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हार्मोन्स शरीर की उस कार्यप्रणाली का अहम हिस्सा होते हैं जो तनाव और रोग-प्रतिरोधक क्षमता के लिए जवाबदेह होती है। हर्मोन्स के असंतुलन की वजह से महिला कर्मचारियों में तनाव पनपता है जो बाद में दिल और दिमाग की गंभीर बीमारियों को जन्म देता है।

दिल और दिमाग की बीमारियों से गुजरना पड़ सकता है

 Male-dominated workplaces 'can make women ill

शोध में मिले आंकड़ों के मुताबिक लंदन में मौजूदा वक्त में 11 प्रतिशत महिलाएं कंस्ट्रक्शन इंड्रस्‍टी में कार्यरत हैं, जिनमें दो प्रतिशत महिलाओं को मैनुअल कामों में लगाया जाता है। इनमें से 15.5 प्रतिशत महिला कर्मचारी विज्ञान, तकनीकी, इंजीनियरिंग आदि विभागों में काम करती हैं।

शोध के अनुसार पुरुषों वाले दफ्तरों में कई दफा महिला कर्मचारियों को यौन शोषण और काम के प्रति अत्यधिक मानसिक दबाव से गुजरना पड़ जाता है, जो उनके लिए बाद में सामाजिक अलगाव का कारण बनता है।

इस तरह के लंबे अनुभव से गुजरने के बाद महिलाओं में दिल और दिमाग की बीमारियों की तादाद ज्यादा देखी गई है।

दोहरी चुनौती है चिंता का सबब

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शोध के अनुसार ज्यादातर महिलाओं के लिए घर और दफ्तर में समय देना उनके लिए परेशानी का कारण बनता है। देखा जाए तो महिलाओं को दोहरी चुनौती से गुजरना होता है। जहां घर भी संभालना होता है और करियर के लिए भी चिंता करनी होती है।

शोध के अनुसार 80 प्रतिशत महिलाओं को लगता है कि वे अधूरी सी जिंदगी गुजार देती हैं। 18 प्रतिशत महिलाओं का मानना है कि दोहरी चुनौती महिलाओं को ज्यादा परिपक्व बनाती है।

शोधार्थियों के मुताबित सेहतमंद जीवन के लिए महिलाओं को खुद के लिए पर्याप्त समय निकालना चाहिए। शोध के मुताबिक आज महिलाओं की स्थिति पहले के मुकाबले काफी ठीक है। कई क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी से काम जल्दी और अच्छे से हो जाता है। लेकिन महिलाओं को चिंतनीय स्थिति से गुजरना पड़ जाता है।

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