नजर तो डालिए, आपके आसपास हैं प्यार के रंग हजार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सेंट वेलेंटाइन ने शायद स्वयं प्यार नहीं किया था। लेकिन वे मनुष्य के प्रेम करने के अधिकार को बचाकर रखना चाहते थे। उनके लिए प्रेम के मायने अलग थे, स्त्री-पुरुष से अलग भी प्यार की दुनिया थी। उस दुनिया में आप खुद कहां खड़ी हैं, बात इस पर भी होनी चाहिए।
मेले में मिठाई पर दिल नहीं आया। शरबत बेकार की चीज लगी। उसके हमउम्र बच्चों ने खिलौने खरीदे और हामिद अपनी बूढ़ी दादी के लिए रोटी पकाने का एक चिमटा लेकर घर लौटा था, तो प्यार की एक खूबसूरत कहानी सामने आई थी। एक और कहानी याद आती है।
सुबेदारनी ने कहा था, `तुम्हें याद है, एक दिन तांगे वाले का घोड़ा दही वाले की दुकान के पास बिगड़ गया था। तुमने उस दिन मेरे प्राण बचाए थे। आप घोड़ों की लातों में चले गए थे और मुझे उठाकर दुकान के तख्ते पर खड़ा कर दिया था। ऐसे ही इन दोनों को बचाना। यह मेरी भिक्षा है। तुम्हारे आगे मैं आंचल पसारती हूं।’
चंद्रधर शर्मा गुलेरी की मशहूर कहानी, `उसने कहा था’ में युद्ध पर जा रहे सूबेदार पति और बेटे को लेकर सूबेदारनी आंतकित थी। उसे एक आशा की किरण लहना सिंह के रूप में दिखाई दी और उससे वह दोनों जान की हिफाजत मांग बैठी। बचपन के प्रेम का प्रतिदान लहना सिंह ने दिया।
वह सूबेदार और उसके बेटे के प्राण तो बचा लेता है, लेकिन अपने वतन से दूर वीरगति को प्राप्त हो जाता है। प्यार की ऐसी अनमोल कहानियां आपने भी पढ़ी होंगी। लेकिन क्या ऐसी बाजार में प्यार नहीं मिलता। कार्ड, एसएमएस या महंगे गिफ्ट आपके प्यार को याद दिलाने का बहाना भर हो सकते हैं। स्मृतियों के गुल्लक में झांककर देखें, प्यार के अनगिनत किस्से खुद की जिंदगी में पड़े मिलेंगे।
कहानियां सिर्फ किताबों में होती हैं, निजी जिंदगी में नहीं?
आपका भी जवाब निश्चित रूप से हां में ही होगा। हमारी जिंदगी भी तो ऐसी कहानियों से भरी पड़ी है, लेकिन उस पर सोचने, ध्यान देने और उसे स्मृतियों में सहेजकर रखने की आदत शायद नहीं रही। आज भी मां अपने बेटे या बेटी के लिए सबसे बढ़िया मिठाई का टुकड़ा अलग रख देती है, प्यार यहां भी तो है। बच्चे को चोट लगने पर जब डॉक्टर से पहले उसे मां की याद आती है, तो प्यार जिंदा है।
हर सुबह घर के पीछे आप गिलहरी के लिए चुपके से रोटी रख आती हैं, तो प्यार है। काम पर जाने से पहले आप गुलाब को पानी देना नहीं भूलतीं, तो तय मानिए आपकी जिंदगी में प्यार खिला हुआ है।
आसमान में उड़ती पतंगों को निहारना अच्छा लगता है, तो आपके पास प्यार की ऊंचाई है। सारी हिदायतें तोड़कर बारिश में कभी-कभी आप जान-बूझकर भीग जाती हैं, तो खुद के प्रति आपका प्यार अभी भी जिंदा है। लंच या डिनर टेबल पर हॉस्टल में पढ़ रहे बेटे या बेटी की याद प्यार है।
मफलर घर में भूल गए पति को फोन पर बार-बार ठंड से बचने की हिदायत देना भी प्यार है और प्रियतम के लिए एक खूबसूरत से तोहफे के लिए इधर से उधर भटकना भी प्यार है।
प्यार की तलाश में भटकने की जरूरत नहीं। बाजार में प्यार नहीं मिलता। कार्ड, एसएमएस या महंगे गिफ्ट आपके प्यार को याद दिलाने का बहाना भर हो सकते हैं। स्मृतियों के गुल्लक में झांककर देखें, प्यार के अनगिनत किस्से खुद की जिंदगी में पड़े मिलेंगे। सिर्फ प्रेमी-प्रेमिकाओं के बीच ही प्यार नहीं होता। ढेर सारे रंग हैं प्यार के। अनगिनत चेहरे हैं प्यार के। अनगिनत रिश्ते हैं प्यार के। हां, ये सब तब आपकी झोली में होंगे, जब आप प्यार को अहंकार से मुक्त रख सकें।
क्या है प्यार की कहानी
एक लोककथा है- एक द्वीप पर सभी भावनाएं साथ-साथ रहती थीं। एक दिन समुद्र में तूफान आया और वह द्वीप डूबने लगा। सभी भावनाएं डर गईं। ′प्यार′ ने वहां से निकलने के लिए एक नाव तैयार की। सारी भावनाओं को राहत मिलीं। वे सब उस नाव पर आ गईं, लेकिन अहंकार नहीं आया।
′प्यार′ उसको लेने के लिए नाव से उतर गया। प्यार मनाता रहा, अहंकार अपनी जिद पर अड़ा रहा। उधर द्वीप पर पानी बढ़ता रहा। जब पानी और बढ़ गया, तो सारी भावनाएं नाव को लेकर चली गईं, लेकिन उधर द्वीप पर प्यार ने भी अहंकार के साथ दम तोड़ दिया।
′प्यार′ मर गया केवल ′अहंकार′ के कारण। इसीलिए बड़े-बूढ़े कहते हैं, `अगर अपने अहंकार को जिंदा रखने की कोशिश करोगे, तो प्यार भी मर जाएगा और अगर प्यार को जिंदगी में जिंदा रख सको, तो समझ लो खिली-खिली-सी रहेगी जिंदगी।’ बात सिर्फ बड़ों के मानने की नहीं हैं।
मनोवैज्ञानिक भी कहते हैं कि जिंदगी में जरूरी है प्यार। जर्मन मनोवैज्ञानिक कैरेन हॉर्नी स्वस्थ प्रेम को संयुक्त रूप से जिम्मेदारियां वहन करने और साथ-साथ कार्य करने का अवसर बताते हैं। उनके अनुसार प्रेम में निष्कपटता और दिल की गहराई बहुत जरूरी है।
प्रेम की यह निष्कपटता सिर्फ पति-पत्नी के रिश्तों में या प्रेमी-प्रेमिका के बीच हो जरूरी नहीं। प्यार पर बात करते हुए सुप्रसिद्ध लेखिका अमृता प्रीतम याद आती हैं- `जिसके साथ होकर भी तुम अकेले रह सको, वही साथ करने योग्य है। जिसके साथ होकर भी तुम्हारा अकेलापन दूषित न हो। तुम्हारी तन्हाई, तुम्हारा एकान्त शुद्ध रहे। जो अकारण तुम्हारी तन्हाई में प्रवेश न करे। जो तुम्हारी सीमाओं का आदर करे। जो तुम्हारे एकान्त पर आक्रामक न हो। तुम बुलाओ तो पास आए। इतना ही पास आए, जितना तुम बुलाओ। और जब तुम अपने भीतर उतर जाओ तो तुम्हें अकेला छोड़ दे।
कहां मिलता है सच्चा प्यार
कुछ मनोवैज्ञानिकों ने सच्चे प्यार की परिभाषा कुछ इस प्रकार दी है-`सच्चा प्यार किसी की परवाह करना होता है। किसी के प्रति आकर्षण होता है। किसी के प्रति लगाव होता है। एक जिम्मेदारी होती है। एक घनिष्ठ रिश्ता होता है।
उधर मनोविज्ञानी रोबेर्ट स्टर्न्बर्ग ने इंसानों के बीच प्यार के त्रिभुजाकार सिद्धांत को सूत्रबद्ध किया था। उनका तर्क था कि प्यार के तीन भिन्न प्रकार के घटक हैं- आत्मीयता, प्रतिबद्धता और जोश। आत्मीयता वो तत्व है जिसमें दो मनुष्य अपने आत्मविश्वास और अपनी जिंदगी के व्यक्तिगत विवरण को बांटते हैं। ये ज्यादातर दोस्ती और रोमानी कार्य में देखने को मिलता है।
प्रतिबद्धता एक उम्मीद है कि यह रिश्ता हमेशा के लिए कायम रहेगा। जोश यौन आकर्षण का प्रतीक है। प्यार की गहराई के बारे में मशहूर है कि नापने को तो हमने नाप ली है चांद तक की दूरी, लेकिन दो दिलों के बीच को नापने में सदियां बीत जाती हैं। वरिष्ठ कवि केदार नाथ सिंह की कविता याद आती है- `उसका हाथ अपने हाथ में लेते हुए मैंने सोचा दुनिया को हाथ की तरह गर्म और सुन्दर होना चाहिए।’
प्यार का मनोविज्ञान
सच में प्यार तभी तक प्यार है जब तक उसकी शुद्धता, संवेगात्मक गहनता और विशालता कायम है। मनोवैज्ञानिक मैस्लो भी कहते हैं-`स्वस्थ प्रेम करने वाले एक-दूसरे की निजता स्वीकार करते हैं। आर्थिक या शैक्षणिक कमियों, शारीरिक या बाह्य कमियों की उन्हें चिन्ता नहीं होती जितनी व्यावहारिक गुणों की।’
प्यार एक ऐसा खूबसूरत एहसास है, जिसके बीच में उम्र, जाति, पैसा, पद और प्रतिष्ठा की कोई जगह नहीं होती। एक छोटी-सी कहानी बहुत पहले सुनी थी, हो सकता है आपने भी सुनी हो। फिर भी उसका जिक्र यहां जरूरी है।
हर जगह हैं प्यार के रंग
छोटी बहन ने अपने बड़े भाई से पूछा था-`भाई! ये प्रेम क्या होता है ?’ `तू रोज मेरे बैग से चॉकलेट निकाल कर खा जाती है। मुझे मालूम है, फिर भी मैं रोज वहीं चॉकलेट रखता हूं। बस यही प्यार है,’ भाई ने कहा था। बस...प्यार तो यही है, उसे स्मृतियों के गुल्लक में जमा करने की जरूरत है।
छोटे-छोटे प्यार से मुकम्मल जिंदगी की एक तस्वीर बनती है। इस तस्वीर के कई रंग हैं। बस प्यार की एक मांग है, दूसरों को देने के लिए आपके पास कुछ होना चाहिए, वरना कुछ दिनों के बाद लगेगा कि आप खुद इस रिश्ते को लेकर गंभीर नहीं हैं। आपको अपने रिश्ते को कम-से-कम वक्त तो देना ही पड़ेगा। तभी खिलेगा आपके प्यार का रंग और तभी समाज की मुकम्मल तस्वीर भी बनेगी, क्योंकि किसी का प्यार गुलाब है। किसी का गिलहरी।
कोई इंद्रधनुष का दीवाना है, तो कोई संगीत के सुरों में प्रेम तलाशता है। आसमान में उड़ते परिंदे, दाना चुगते कबूतर और घर के आंगन में मंडराते गौरेये भी हमारे प्यार के हिस्से हो सकते हैं, बशर्ते हम अपनी जिंदगी में प्यार को पहचान लें। इसके बाद जिंदगी में आएगी धूप और उम्मीदों का आसमान।
छोटी बहन ने अपने बड़े भाई से पूछा था-`भाई! ये प्रेम क्या होता है?’
भाई ने कहा, `तू रोज मेरे बैग से चॉकलेट निकाल कर खा जाती है। मुझे मालूम है, फिर भी मैं रोज वहीं चॉकलेट रखता हूं। बस यही प्यार है।’