क्या आपको भी होता है जैटलैग, मिल गई इसकी जड़
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जेटलैग की समस्या अंतर्राष्ट्रीय यात्राएं करने वालों के लिए आम है। यह लंबी हवाई यात्राओं की वजह से होने वाली थकान है। इसकी वजह से शरीर की दैनिक प्रक्रिया पर भी असर पड़ता है।
यात्रा के आने के बाद कई दिनों तक नींद न आना भी इसी का नतीजा होता है। इस समस्या से न तो बच निकलना आसान है न इसे स्वीकार कर लेना।
लेकिन अब वैज्ञानिकों से इस समस्या की वजह ढूंढ निकाली है और वह हमारे शरीर में ही छुपी हुई है। मॉनट्रियल के मेकगिल और कॉनकॉर्डियन विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने एक ऐसा रीसेट बटन खोज निकाला है जो हमारे शरीर में ही छुपा है।
प्रोटीन ही है समस्या का हल
हमारे शरीर की जैविक घड़ी तब रीसेट हो जाती है जब दिमाग के एक खास तरह के प्रोटीन के साथ फॉस्फेट मिल जाता है।
पीरियड प्रोटीन कहा जाने वाला यह प्रोटीन रोशनी के संपर्क में आने के बाद शरीर में बनने लगता है और फॉस्फेट से मिल जाने पर जैविक घड़ी सामान्य रूप से चलने लगती है।
शोध करने के लिए जब वैज्ञानिकों ने कुछ चूहों के दिमाग के eIF4E पीरियड प्रोटीन में बदलाब किए तो पाया कि इस बदलाव के कारण प्रोटीन फॉस्फेट से जुड़ नहीं पा रहा है। जिससे यह नतीजा निकला कि शरीर के दैनिक संचालन के लिए यह प्रोटीन जरूरी है। वैज्ञानिकों ने जैटलैग का इलाज तो निकाल लिया है लेकिन फिलहाल इसे हकीकत बनने में समय है, तब तक इससे जूझने के लिए दिन में कैफीन और रात में बेनाड्रिल का ही सहारा लीजिए।