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नींद में चलने वाले को उठाना खतरनाक? पढ़िए ये खास खबर

Sat, 05 Dec 2015 11:34 AM IST
Updated Sat, 05 Dec 2015 11:34 AM IST
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it is dangerous to raise a sleepwalker

कभी-कभार मैं मध्य रात्रि में अपने बिस्तर से उठ जाती हूं। गहरी नींद में ही, मैं अपने कमरे या फिर फ्लैट में इधर-उधर घूमती हूँ।

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दरअसल ये मेरे साथ ही नहीं होता। पांच में से एक बच्चे को नींद में चलने की आदत होती है। करीब 40 फीसदी बच्चे कम से कम एक बार तो ऐसा करते ही हैं।

जब हमारी उम्र बढ़ने लगती है तो यह कम हो जाता है, लेकिन एक से ढाई फ़ीसदी वयस्क ऐसा करते हैं।

नींद में चलने वाले कुछ लोग कल्पना कर रहे होते हैं कि वे भयावह स्थिति से बचकर निकले हैं।

दूसरे लोग ज्यादा शांत होते हैं और वे अपनी अलमारी और दराज में कुछ चीज ढूंढने की कोशिश करते हैं।

अपने बचपने में मैं नींद में चलते हुए घर में पहली मंजिल से सीढ़ियों से उतरकर नीचे आ जाती थी। वहाँ मेरे माता-पिता टीवी देख रहे होते थे और वो मुझे आराम से मेरे बिस्तर तक वापस ले जाते थे।

ऐसे लोग को नींद में चलते हुए जगाया जाए तो उन्हें अच्छा नहीं लगेगा

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जिनका सामना नींद में चलने वाले लोगों से हुआ होगा, उन्हें ये मालूम होगा कि ये बड़ी ही विचित्र स्थिति होती है। ऐसी स्थिति जिसमें इंसान नींद में भी होता है और जगा भी होता है।

लेकिन नींद में चलने वाले लोगों के बारे में एक सलाह बार-बार सुनी जाती है। वो ये कि नींद में चलने वालों को जगाना खतरनाक होता है, ऐसा करना उनके लिए नुकसानदेह होता है।

हालांकि यह पूरी तरह सही नहीं है। इस बात में तो कोई शक नहीं है कि अगर ऐसे लोग को नींद में चलते हुए जगाया जाए तो उन्हें अच्छा नहीं लगेगा।

हम ये नहीं जानते हैं कि दिमाग नींद में चलने का निर्देश क्यों देता है। लेकिन जब हम नींद में होते हैं तब क्या हो रहा होता है, इसके बारे में हम काफी कुछ जानते हैं।

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नींद में लोग तभी चलते हैं जब वो नींद की आरईएम की स्थिती में होते हैं

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रात की नींद कई चरणों की होती है। जब हम सोने का कोशिश करते हैं तो पहली तो हल्की नींद आती है जो 20 मिनट के बाद गहरी होने लगती है।

लेकिन इसके बाद ये फिर कुछ हल्की होती है और फिर हम बहुत गहरी नींद में पहुँच जाते हैं और इस अवस्था को रेपिड आई मूवमेंट (आरईएम) कहा जाता है।

ये चरण नींद के दौरान रात में कई बार दोहराया जाता है। हर बार बहुत गहरी नींद यानी रेपिड आई मूवमेंट की अवधि बढ़ती जाती है, जब तक कि सुबह हमारी नींद टूटती नहीं है।

आरईएम यानी बहुत गहरी नींद के समय ही हम सबसे ज्यादा सपने देखते हैं। इस चरण के दौरान शरीर पूरी तरह शिथिल रहता है ताकि हम कहीं अपने सपनों में चल रही गतिविधियों के मुताबिक हरकतें करना शुरु न कर दें।

लेकिन नींद में लोग तभी चलते हैं जब वो नींद की आरईएम की स्थिती में होते हैं। ये बहुत ही अजीब भ्रम की स्थिति है।

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इटली के मिलान हुआ एक अध्ययन

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दिमाग इतना तो सक्रिय होता है कि वह आपको चलने का आदेश देता है लेकिन इतना सक्रिय नहीं होता कि आपको पूरी तरह जगने के लिए कहे।

इटली के मिलान स्थित निगुआरडा अस्पताल में हाल में हुए एक अध्ययन में नींद में चलने वाले लोगों के दिमाग का अध्ययन किया गया।

इसमें यह देखा गया कि उनके दिमाग का कुछ हिस्सा सक्रिय होता है, जबकि कुछ हिस्से नींद में होते हैं। ये दर्शाता है कि नींद में चलने की वजह इन दो स्थितियों में असंतुलन की स्थिति ही है।

ये भी मिथक है कि लोग नींद में अपने हाथ सीधे रखकर यानी आगे फैलाए हुए, चलते हैं। उनकी आखें में ऐसा भाव होता है कि जैसे वो सामने खड़े व्यक्ति को भी देख न पा रहे हों, और किसी भी हरकत से उनकी तवज्जो पाना बहुत मुश्किल होता है।

अपरिचित जगहों में चलने से आदमी खतरे में हो सकता है

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आम तौर पर ये लोग बत्ती नहीं जगाते और अपनी याददाश्त से ही घर में चक्कर लगाते हैं।

एक मिथक ये भी है कि नींद में चलते हुए आप खुद को घायल नहीं कर सकते। अपरिचित जगहों में ऐसी स्थिति में चलने से आदमी खतरे में हो सकता है।

इसका सबसे बेहरीन उदाहरण है कि यदि आपका घर से बाहर जाने का दरवाजा खुला है तो आप सड़क पर निकल जाएँगे और इस अवस्था में ये खतरनाक हो सकता है।

यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में स्लीप क्लिनिक के प्रोफेसर मैथ्यू वॉकर ने एक बार मुझे बताया कि उनका एक मरीज नींद में ही अपने घर से बाहर निकला, कार तक पहुंचा और नींद में भी गाड़ी चलाता रहा।

इसके अलावा 2005 में 15 साल की एक लड़की का मामला सामने आया जब वह 130 फीट ऊंची क्रेन के ऊपर नींद में चलते हुए पहुँच गई और वहाँ सोई पाई गई।

अगर यह रोज रात होने लगे तो मुश्किलें हो सकती हैं

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ऐसे मामले कभी कभार होते हैं। बच्चों के बड़े होने पर अमूमन नींद में चलने की मुश्किल खत्म हो जाती है।

अगर यह रोज रात होने लगे तो मुश्किलें हो सकती हैं। नींद की बीमारी से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसी सूरत में माता-पिता को एक सप्ताह तक वह समय नोट करना चाहिए जब बच्चा नींद में चलने लगता है। और इसके बाद उस समय से 15 मिनट पहले बच्चे को जगा देना चाहिए। इसे कई बार मदद मिलती है।

अगर किसी जान पहचान वाले के साथ ऐसी मुश्किल हो तब आपको क्या करना चाहिए?

पहले तो ये जान लें कि वो इतनी नींद में होंगे कि आपको नोटिस ही नहीं करेंगे। अगर आप कोशिश करेंग तो भी नहीं। अगर आप गहरी नींद में चल रहे इस शख़्स को जगा भी देते हो तो वो इतनी बुरी तरह से झुंझला जाएगा जैसे गहरी नींद में अचानक अलार्म बजने से लोग झुंझला कर नींद से उठते हैं।

कई बार नींद में चलने वालों को ख़तरे की आवाज सुनाई देती है। एक बार ऐसी स्थिति में मेरी भी नींद टूट गई थी। मैंने ख़ुद को किचन में नंगे पांव पाया और मेरे आसपास बिखरा हुआ था कांच। मैं नींद में चलते हुए एक ग्लास में पानी भरने की कोशिश कर रही थी लेकिन मैने उसे नल से टकरा दिया था और वह टूट गया था।

नींद में चलने वालों को जगाने से उन्हें हार्ट अटैक नहीं होगा और न ही वो कोमा में चले जाएँगे। लेकिन उनके साथ सबसे अच्छा बर्ताव तो यही है कि उन्हें नींद से जगाया नहीं जाए और उन्हें धीरे-धीरे बिस्तर तक पहुंचा दिया जाए। गहरी नींद के बाद उन्हें ये अनुभव सुबह तक याद भी नहीं होगा।

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