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इन नौ वजहों से अपना वजन कम नहीं कर पाते हैं भारतीय

Fri, 20 Feb 2015 03:59 PM IST
Updated Fri, 20 Feb 2015 03:59 PM IST
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Indians fail to loss their wait due to this

त्योहार का मतलब खाना पीना और मस्ती करना। हर दूसरे और तीसरे दिन पड़ने वाले त्योहार हमें खाने के लिए लालायित करते हैं। खासकर उत्तर भारतीय राज्यों में त्योहार का मतलब ढेर सारे पकवान हैं।

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औरतें सुबह से ही कढ़ाई में तेल से डूबी चीजें बनाती रहती हैं और लोग खाते रहते हैं। ऐसे ही त्योहारों के चलते लोग बाग डाइट प्लान को फॉलो नहीं कर पाते।

मजेदार बात ये है कि भारत में उपवास का मतलब भू्खा रहना कतई नहीं है। उपवास के दौरान लोग और दिनों से ज्यादा खाते हैं। फलाहार के नाम पर आलू, पनीर, केले, साबुदाना, व्रत के आटे और चावल से बनी चीजें काफी गरिष्ठ हैं।
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भारत में हर दिन किसी न किसी देवता का उपवास चलता है। अब कोई कितना भी उपवास रख ले लेकिन उसके बढ़ते वजन में कोई कमी नहीं आने वाली।

मां का प्यार - बेटा बस एक और पराठा!

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परिवार में लाडले बच्चों के लिए डाइट प्लान को फॉलो करना युद्ध फतह करने जैसा है। मां अपने लाडले और लाडली के लिए घी से तर खाना बनाती है और मनुहार कर कहती है - बस एक और पराठा विद एक्सट्रा मक्खन।

मां का प्यार दिखता है लेकिन ये पराठा और मक्खन शरीर का क्षेत्रफल बढ़ा रहा है, ये किसी को नहीं दिखता। आप गौर करेंगे तो अपने आस पास पाएंगे कि जिन घरों में इकलौते बेटे और बेटियां हैं, वो जरूरत से ज्यादा हैल्दी हैं।

इकलौते बच्चे पर मां बाप का प्यार खाने के जरिए दिखता है और बच्चे आटे की बोरी जैसे हो जाते हैं। मां बाप अपने गोल मटोल बच्चों को देखकर ऐसे खुश होते हैं जैसे उनका बैंक बैलेंस हो।

दिल का रास्ता पेट से ही जाता है

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हर भारतीय दुल्हन को बताया जाता है कि पति के दिल का रास्ता पेट से ही होकर गुजरेगा। सो नई दुल्हनियां अपने हाथों से बना बना कर पतिदेव को खिलाकर खुश होती हैं और पतिदेव प्रेम के चलते अपने डाइट प्लान की ऐसी तैसी कर डालते हैं।

आपने भी अधिकतर ऐसे लोग देखे होंगे जो शादी के बाद मोटे हो गए हों। ऐसे लोग लाख चाहें लेकिन ‌पहले की तरह पतले नहीं हो पाएंगे। दूसरी खास बात कि शादी से पहले लड़कियां ये सोच कर खान पान पर कंट्रोल करती हैं कि मोटी हो गई तो शादी कैसे होगी।

लेकिन शादी होते ही चाट पकोड़ी और शाही दावतें डाइट प्लान को चौपट कर डालती हैं और पतली दुबली नाजुक सी लड़की किसी पहलवान की तरह दिखने लगती है। आपने भी ऐसी कई लड़कियां देखी होंगी जो शादी के बाद मुटा गई।

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पांच बार खाना पड़ता है भारी

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सुबह का नाश्ता जमकर खाना चाहिए। बंदा दिन भर नौकरी पर खटता है, सुबह का नाश्ता तो बनता है। दोपहर में तीन मंजिला लंच बॉक्स दफ्तर जाता है। शाम को दफ्तर से आने के बाद चाय पानी और कुछ चाट पकोड़े तो बनते हैं।

फिर रात में बंदा डिनर तो करेगा ही। इन सबके बीच में ब्रंच भी बनता है। यानी चुटर मुटर खाने पीने को भारतीय बुरा नहीं मानते। अब पांच बार खाकर कोई कितना फैलेगा, ये कल्पना की जा सकती है।

भारत के हर शहर में शाम के समय चाट पकोड़ी टिक्की गोलगप्पों और बर्गर की दुकान पर भीड़ मिल जाएगी। इसके अलावा फास्ट फूड के दीवाने भी बढ़े हैं। इनको चुनौती देने के लिए चाइनीज आइटम भी बाजार में कूद पड़े हैं।

मजे की बात ये है कि चाईनीज आइटम को इन दुकानों पर भारतीय अंदाज में बनाया और तला जा रहा है। यही ट्रेंड जनता के डाइट प्लान को पलीता लगा रहा है।

पंजाब और यूपी का खाना बड़ा जायकेदार

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उत्तर भारतीय खाना इतना गरिष्ठ होता है कि कोई भी इसे खाकर गोलगप्पे की तरह फूल सकता है। पंजाब का तड़केदार मसाले वाला खाना खाकर तो आप खली की तरह हो जाएंगे।

दरअसल भारतीय परिवेश में 90 फीसदी भोजन तलकर बनाया जाता है। खास बात ये है कि उत्तर भारत में तो चावल भी पुलाव के रूप में खाकर हम सेहत का कबाड़ा कर रहे हैं।

आमतौर पर सलाह दी जाती है कि रात का भोजन हलका ही करना चाहिए। लेकिन इसके उलट भारतीय परिवारों में रात के भोजन को लजीज और गरिष्ठ बनाने पर खासी मेहनत की जाती है।

सुबह भले ही कोई दफ्तर जाने की जल्दी में सही नाश्ता न करे लेकिन दिन ढलते ढलते लोगों के भोजन की पसंद बदलती जाती है। रात के भोजन में अधिकतर लोग दो सब्जी, दाल, रोटी, चावल, रायता, सलाद सब कुछ लेना पसंद करते हैं। उसके बाद कुछ मीठा तो होगा ही।

कुछ मीठा हो जाए

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कुछ मीठा हो जाए...ये भारतीय जनमानस की परंपरा बन चुकी है। भारतीय मीठा पसंद हैं और हर मौके पर मीठा खिलाने की फिराक में रहते हैं।

आप सेहत का हवाला देकर लाख इनकार करना चाहें लेकिन अपनी खुशी और मौके का बहाना बनाकर आपके मुंह में लड्डू ठूंसने वाले बहुत मिलेंगे।

देखा जाए तो लोग मिठाई खाने के मौके तलाशते हैं। दफ्तरों में भी पहली सैलरी पर, प्रमोशन पर और यहां तक कि नई कार लेने पर भी लोग मिठाई खिलाते हैं।

शादी हो या घर में बच्चे का आगमन, आपके पड़ोसी और रिश्तेदार मिठाई का डिब्बा लेकर घर पहुंच जाएंगे। भगवान के प्रसाद के तौर पर भी मिठाई का चलन है।

और कुछ नहीं तो वीकेंड पर कुछ मीठा प्लान करने के चक्कर में लोग बाग चॉकलेट का भोग लगाते हैं। औरतें वैसे भी मीठा ज्यादा पसंद करती हैं और उन्हें खुश करने की खातिर चॉकलेट की खपत जमकर होती है।

यानी आप कितना भी बचना चाहें..दूसरो की खुशी के चलते आप सेहतमंद रहने की खुशी नहीं पा पाएंगे।

ऑनलाइन ऑर्डर का लुत्फ लेना नहीं भूलते

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जबसे भारत में ऑनलाइन ऑर्डर की सुविधा शुरू हुई है, लोगों के खाने पीने की टेंडेंसी बढ़ गई है।अब ये सोचकर लोग घर पर नहीं बैठे रहते कि कौन बाजार जाएगा।

अब तो मोबाइल पर खाना बुक कराइए और डिलीवरी लीजिए। पिज्जा हट और डोमिनोज जैसे पिज्जा कंपनियां जमकर कमाई कर रही हैं और जनता चरबी की परत के तले दबती जा रही है।

रेडी टू ईट के चलन ने भी लोगों को चटखारा पसंद बना दिया है। जो लजीज व्यंजन आप बाजार या रेस्टोरेंट जाकर नहीं खा सकते उन्हें बस पैकेट में ले आइए और गर्म करके लुत्फ उठाइए।

इस आदत ने ताजे खाने की अहमियत खत्म सी कर दी है और लोगों को आरामपसंद बनाने के साथ साथ डाइट के प्रति लापरवाह बना दिया है।

सेहत की अपनी अपनी परिभाषा होती है

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भारत में सेहत और सुंदर की परिभाषा दूसरे देशों से कुछ अलग हट कर है। यहां मोटे ताजे और गोल मटोल व्यक्ति को ही स्वस्थ और सुंदर माना जाता है।

डाइट प्लान का फॉलो कर रही किसी युवती को देखकर औरतें मजाक उड़ाती हैं। ससुराल आई पतली लड़की को देखकर सास ताना मारती है....मायके में खाने को नहीं मिलता था क्या?

शादी के बाद भी अगर कुछ समय बाद लड़की मोटी नहीं हुई तो समझा जाता है कि लड़की ससुराल में खुश नहीं है। शादी के बाद लड़की का मोटा होना खुशहाली की निशानी बताया जाता है।

वहीं लड़के का मोटा होना भी इस बात की गवाही मानी जाती है कि उसकी बीवी एक बेहतर बीवी है।

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