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वेतन में वृद्धि या प्रोजेक्ट पास कराने के लिए अपनाएं ये तरकीबें

Fri, 10 Jul 2015 06:44 PM IST
Updated Fri, 10 Jul 2015 06:44 PM IST
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How To Handle Office Problems

क्या आप अपने दफ्तर में जो चाहते हैं, वह हासिल कर लेते हैं? नहीं, तो जानिए, आपको क्या करना होगा।

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लिंक्डइन के एक सर्वे के मुताबिक पूरी दुनिया में लगभग 35 प्रतिशत कर्मचारी दफ्तर से संबंधित नेगोसिएशन या कामकाजी बातचीत से घबराते हैं।

लगभग 2000 लोगों पर हुए सर्वे के अनुसार पुरुष इस बारे में स्त्रियों के मुकाबले में ज्यादा घबराते हैं। इसका राज तो मात्र इतना है कि आप अपनी बात दूसरों को समझाने में कितने कामयाब रहते हैं।

बिजनेस स्कूल के पाठ्यक्रमों में आपको बातचीत या कामकाजी नेगोसिएशन में भी कुशल बनाया जाता है। हममें से ज्यादातर लोग इस बातचीत में पुराने तौर तरीके ही अपनाते हैं जिनमें से अधिकतर अब काम भी नहीं आते हैं। उनकी जगह नए और बेहतर विकल्प आ गए हैं।
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वर्जीनिया स्थिति लीडरशिप कोच क्रिस्टी हेजेस कहती हैं, "हम अपना दिमाग- हम क्या चाहते हैं- ऐसी बातों पर ज्यादा लगाते हैं। हम दूसरों की जरूरत और इच्छा को समझने में ज्यादा समय नहीं लगाते।"
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जानते हैं वो 6 तरकीबें जिनसे आप दफ्तर में प्रोजेक्ट को पास करा सकते हैं या फिर वेतन में वृद्धि की बातचीत कर सकते हैं।

मनोवैज्ञानिक की तरह सोचिए

How To Handle Office Problems

इस पर ध्यान मत दीजिए की सामने वाला क्या कह रहा है। बल्कि ध्यान इस पर होना चाहिए कि वह क्या सोच रहा है। ये कहना है कॉरपोरेट मामलों को सुलझाने वाली लॉस एंजिलिस स्थित फर्म विल्सन इल्सर के इयान स्टीवर्ट का।

इयान की मानें तो यह ना केवल लेन-देन के मामले में कारगर होता है, बल्कि नई साझेदारी शुरू करने और दूसरों की जरूरत को समझने में भी कारगर होता है।

मांग जरूरत से अधिक की रखें

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आप जितना चाहते हैं, उससे कहीं ज्यादा की मांग कीजिए। हालांकि सैलरी के मामले में ये कारगर भले ना हो लेकिन दूसरे मामलों में यह कारगर हो सकता है।

ज्यादातर मामलों में आप जितना मांगते हैं उससे कम की मांग पूरी की जाती है। इयान स्टीवर्ट कहते हैं, "अगर आप बहुत ज्यादा की मांग करते हैं और उसके बाद उससे कम पर मान जाते हैं तो इसे आपकी उदारता माना जाता है और उस पर विचार किया जाता है।"

कई मामलों में पहले मांग रखना फायदे का सौदा होता है। क्रिस्टी हेजेस कहती हैं, "अगर आप पहला ऑफर देंगे तो नतीजा अच्छा निकलता है।"

टाइमिंग की अहमियत

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बातचीत कब शुरू करनी है, ये जानना भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि आप क्या मांग रहे हैं।

बेल्जियम की एक्जीक्यूटिव रेक्रूटमेंट फर्म रॉबर्ट हाफ के प्रबंध निदेशक फ्रेडरिक ब्रगमैन कहते हैं कि किसी प्रोजेक्ट की कामयाबी के बाद कुछ मांग करना ठीक होता है या फिर सालाना रिव्यू के बाद कुछ मांग रखना सही है।

वह कहते हैं, "नियोक्ता उस वक्त आपसे बातचीत के लिए तैयार होते हैं।"

सांस्कृतिक मान्यताओं की परवाह ना करें

How To Handle Office Problems

हम दुनिया भर के लोगों के साथ काम करते हैं। एक ही जगह पर कई जगहों की संस्कृतियों का मिश्रण देखने को मिलता है।

ऐसे में संस्कृतियों में अंतर को महत्व ना दें। समानता पर ध्यान देने की कोशिश करें।

बार्सिलोना, स्पेन के आईईएसई बिजनेस स्कूल में उद्यमशीलता विषय पर लेक्चरर कानदार्प मेहता कहते हैं, "बातचीत शुरू करने से पहले संस्कृति को अलग ही छोड़ना सही है।"

दोस्ताना व्यवहार रखें

How To Handle Office Problems

दूसरे पक्ष के साथ अच्छा संबंध बनाने की कोशिश कीजिए। अपने बारे में कुछ निजी जानकारी भी शेयर करनी चाहिए।

बच्चों के प्रिय खेल, हॉली डे प्लान जैसी बातें करनी चाहिए, ताकि आप अपनी मांग ज्यादा मानवीय ढंग से कह सकें। क्रिस्टी हेजेस कहती हैं, "निजी जानकारी शेयर करने से पॉजिटिव रिजल्ट मिलने की संभावना ज्यादा होती है।"

जिसके साथ संवाद कर रहे हैं, उसके प्रति निगेटिव भाव नहीं रखना चाहिए।

फेवर की मांग

How To Handle Office Problems

वैसे तो एक्सपर्ट्स की राय में कुछ हासिल करने के लिए कुछ देना पड़ता है।

लेकिन अमरीका की यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन रॉस स्कूल ऑफ बिजनेस के प्रोफेसर जॉर्ज साइडल कहते हैं कि ये जरूरी नहीं है।

आप दूसरों से फेवर भी मांग सकते हैं। तार्किक रूप से ये बेमतलब सी मांग लग सकती है। लेकिन जब आप किसी से फेवर मांगते हैं तो एक संपर्क, एक रिश्ता कायम होता है और उस व्यक्ति से आपको भविष्य में भी फेवर मिलने की संभावना होती है।

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