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'न' शब्द से डरना नहीं, इसे समझना सीखें
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
Updated Wed, 19 Dec 2012 05:22 PM IST
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'न' शब्द सुनते ही मन में निराशा और तरह-तरह के डर व आशंकाओं का घर कर लेना बहुत ही स्वाभाविक है। 'न' सुनने के बाद जो डर सबसे ज्यादा सताता है वह है हारने का। हारना न भला किसे पसंद है।
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कक्षा में दो नंबर से पहले स्थान पर नहीं आ पाए, कड़ी मेहनत का बावजूद भी क्रिकेट का मैच जीतते जीतते हार गए, नौकरी के इंटरव्यू के दौरान फाइनल दौर में पहुंचकर भी नौकरी हाथ से निकल गई, बिजनेस में घाटा हुआ, शेयर मार्केट में स्टॉक्स डूब गए और न जाने ही कितने सारे हार के तरह-तरह के रूप हमें हर समय घेरे रहते हैं।
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सच तो यह है कि जिंदगी के सफर में कितनी बार भी हार से सामना हो, उससे न तो जिंदगी का सफर रुक जाता है और न ही आगे बढ़ने के रास्ते खत्म होते हैं; जरूरत सिर्फ हार के प्रति अपने नजरिए को बदलने की है। ऐसे में आप हार के प्रति अपने नजरिए को बदलने और अपनी हार को जीत में बदलने के लिए कुछ जरूरी उपायों पर जरूर गौर करें।
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हार के प्रति बदलें सोच
हार और जीत को अक्सर हम एक ही सिक्के के दो पहलू मानते हैं। इन्हें लेकर हमारी सोच कुछ ऐसी होती है-
हार <- आप -> जीत
यानी हम जो भी कदम उठाएंगे उसमें या तो हमारी हार है या फिर हमारी जीत। लेकिन वास्तविकता में शीर्ष पर पहुंचने वाले लोग हार और जीत को कुछ इस तरह देखते हैं-
आप -> हार -> जीत
यानी अगर आप जो कदम उठाते हैं, उसमें हो सकता है कि शुरुआती समय में आपको हार का सामना करना पड़े लेकिन अगर आप सही दिशा में बढ़ रहे हैं तो हार के आगे जीत आपका इंतजार कर रही है।
'न' की वजह तलाशें
लोगों के मुंह से निकलने वाला 'न' शब्द मन को टीस देता है लेकिन ध्यान से देखा जाए तो उनके 'न' की वजह क्या है, यह जानने पर सफलता का रास्ता और आसान हो जाता है। किसी भी बड़े लक्ष्य को पाने के लिए छोटे-छोटे टार्गेट में मिलने वाली हार और आलोचना पर अगर ध्यान से विचार किया जाए तो इससे आगे की रणनीति तय करने में आसानी होती है और आपका अगला कदम अधिक मजबूत होता है।
लक्ष्य का निर्धारण
अपनी सफलता के लिए तो हम सभी अपने अलग-अलग लक्ष्य तय करते हैं लेकिन असफल होने की स्थिति में हमारे पास क्या विकल्प होगा, इसके बारे आप कितना सोचते हैं? लक्ष्य निर्धारित करते वक्त जितना जरूरी है सफलता के बारे में सोचना, उतना ही जरूरी है असफलता के बारे में सोचना। आप सफल होंगे तो आपका अगला कदम क्या होगा, इसका निर्धारण जितना जरूरी है उतना ही जरूरी यह तय करना है कि किसी कदम पर असफल हुए तो उसके बाद आप क्या करेंगे।
नकारात्मकता दूर करें
सफलता मिलने की खुशी आपका मनोबल बढ़ाती है और आप अधिक सकारात्मक हो जाते हैं जबकि छोटी सी असफलता भी आपको नकारात्मक विचारों के घेरे में डाल देती है। अगर आप अपनी हार को एक सबक के रूप में देखेंगे तो यह नकारात्मकता कम होगी और आगे बढ़ने की इरादा और भी पुख्ता होगा।
रिस्क लेने में कैसा डर
आपको अपने लक्ष्य के शुरुआती दौर में हो सकता है असफलता का सामना करना पड़े लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आप रिस्क लेने से कतराएं। आगे बढ़ने के लिए रिस्क लेना बहुत जरूरी है। अपनी हार से सबक लें और जीत के लिए रिस्क लें, आप जरूर सफल होंगे।