खुशहाल जिंदगी के लिए महिलाएं आजमाएं ये बदलाव
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मन में हर समय घर-परिवार की चिंता, अपनों की हर खुशी और जरूरत का ख्याल! लेकिन क्या इतनी ही शिद्दत के साथ आप अपने लिए भी सोचती हैं? जबकि जिंदगी के सफर में आपको भी केयर की जरूरत है। जब आप खुद को प्यार करेंगी, तभी दूसरे भी आपकी कद्र करेंगे।
पानी से खेलना, चित्रकारी करना, मिट्टी की कलाकृति बनाना, सखी संग हंसी-ठिठोली करना, बचपन की कुछ ऐसी यादें हैं, जो वक्त और जिम्मेदारी के साथ-साथ पीछे छूट जाती हैं। इन सब के बीच अगर कुछ याद है, तो वह है घर-परिवार की जिम्मेदारी, बच्चों की खुशी व भविष्य की चिंता, सगे-संबंधियों की चिंता...। अपना और अपनी रुचियों का तो ध्यान ही नहीं रहता महिलाओं को।
अपने लिए वक्त निकालना तो दूर, सोचना भी नहीं चाहती हैं महिलाएं। ऐसा करके वे अपने साथ उपेक्षित व्यवहार करने लगती हैं। जबकि, हकीकत यह है कि अगर हम खुद से प्यार नहीं करेंगे, तो कोई भी हमारी कद्र नहीं कर सकता।
फिल्म ′जब वी मेट′ की करीना का चर्चित डायलॉग `मैं अपनी फेवरिट हूं′ तो याद है न आपको! जिंदगी को लेकर करीना का यही अंदाज जाने-अनजाने में बहुत कुछ सिखाता है। परिवार की जिम्मेदारी और उनकी जरूरत का ध्यान रखना बेशक आपकी प्राथमिकता होनी चाहिए, लेकिन अपनी जिंदगी भी जीना जरूरी है।
रोजमर्रा की कुछ बातें हैं, जिन्हें अपनी जिंदगी में जगह देने के बाद आप एक नया बदलाव महसूस करेंगी और जिंदगी पहले से कहीं ज्यादा खुशनुमा हो जाएगी। तो आप भी जुट जाइए अपनी फेवरेट बनने की कोशिश में।
खुद को स्वीकारें
हम में से ज्यादातर लोग खूबसूरत नैन-नक्श की ख्वाहिश के साथ ही सर्वगुण संपन्न होना चाहते हैं। जो हम वास्तव में नहीं होते, वही बनने की कोशिश करते हैं।
हम सोचते हैं कि ऐसा होने पर हम सभी के चहेते बन जाएंगे। जबकि वास्तव में हमारी खुशी तो हमारी सोच पर निर्भर होती है। हम खूबसूरत बनकर खुश नहीं होंगे, बल्कि जैसे हैं उस रूप में खुद को स्वीकार कर खुश रहेंगे।
खुद को स्वीकारने में सबसे बड़ी बाधा तब आती है, जब हम दूसरों से अपनी तुलना करने लगते हैं या उसके जैसा दिखने की कल्पना करने लगते हैं। यह सोच हमें किसी दूसरे जैसा तो नहीं बनाती, उल्टा हमें अपने जैसा भी नहीं रहने देती।
इसलिए आज ही अपने दिखावटी मुखौटे को उतार फेंकिए और अपने अनोखेपन को गले लगाइए। ऐसा करके ही आप खुद में एक आत्मविश्वास जगा पाएंगी। अपने साथ-साथ परिवार और समाज के लिए पहले से कहीं ज्यादा बेहतर कर पाएंगी।
न काटे परफेक्शन का कीड़ा
जिंदगी में हर कोई परफेक्ट बनना चाहता है। हो सकता है परफेक्शन की लत आपको भी हो। अच्छी बेटी से लेकर अच्छी पत्नी और बहू बनने तक आप कितने समझौते करती होंगी।
लेकिन सच्चाई यह है कि कोई भी इंसान हमेशा परफेक्ट नहीं हो सकता। हम अपने अंदर छुपी कुछ बुराइयों को पहचानकर, उन्हें दूर कर सकते हैं, लेकिन परफेक्ट नहीं हो सकते।
जिन चीजों की विशेषता आप में नहीं है, उसके लिए परेशान न हों, बल्कि उसे स्वीकार करें। ग्रूमिंग एक्सपर्ट रीता गंगवानी का मानना है कि कोई इंसान किसी दूसरे जैसा नहीं हो सकता।
जिंदगी में अपने प्रति अच्छा भाव आपको अपने अन्य कामों में भी बेहतर प्रदर्शन का मौका देता है। जैसे ही खुद से प्यार करने लगते हैं, तो हम दिल से जीने लगते हैं और जिंदगी को ज्यादा उदार तरीके से देखने लगते हैं। हमारे व्यवहार में एक खास तरह की सकारात्मकता झलकने लगती है।
बेशक एक जैसे लगते हैं, लेकिन होते अलग हैं। आपको भी कुदरत ने सबसे अलग बनाया है, तो औरों से तुलना करके आप क्यों परेशान होती हैं?
मन में अपराध बोध नहीं
सच! जिंदगी में आपने जो भी गलतियां की हैं, उन्हें कुछ भी करके आप बदल नहीं सकतीं। लेकिन आगे की जिंदगी को खूबसूरत बनाना आपके हाथों में है। इसलिए सकारात्मक रवैये के साथ जिंदगी में आगे बढ़ने का फैसला करें।
हर समय अपराध-बोध में रहकर अपने बारे में गलत सोचेंगी, तो आप कभी खुश नहीं रह पाएंगी। इसलिए बीते समय में की गई गलतियों के लिए खुद को माफ करें और उससे सबक ले आगे बढ़ें। वर्तमान पर अपना पूरा ध्यान लगाएं।
अपनी तारीफ तो बनती है
′दूसरों की तारीफ क्षणिक खुशी देती है, जबकि हम खुद अपनी तारीफ करें, तो वह ज्यादा सुकून देगी।′ यह कहना है ग्रूमिंग एक्सपर्ट रीता गंगवानी का। हम अक्सर दूसरों से अपनी तारीफ की अपेक्षा रखते हैं।
ऐसा नहीं होने पर कई बार निराश भी होते हैं, लेकिन अब नहीं। खुद की सराहना के लिए दूसरों का मुंह ताकना बंद कीजिए। आज से अपनी अच्छी आदतों की तारीफ करना खुद सीखें। यह शुरुआत आप अपने छोटे-छोटे कामों की तारीफ से कर सकती हैं। वास्तव में सफल वही लोग होते हैं, जो खुद अपना सम्मान करते हैं।
हालांकि लुक सब कुछ नहीं होता, लेकिन आपकी पर्सनैलिटी को यह काफी हद तक प्रभावित करता है। पहनावे और रहन-सहन के तौर-तरीकों से आपके व्यक्तित्व की झलक मिलती है। इसलिए कपड़े खरीदते समय अपनी पसंद को तवज्जो दें।
फैशन के पीछे भागने के बजाय अपना अलग ड्रेसिंग सेंस डेवलप करें। इससे आपका आत्मविश्वास तो जागेगा ही, साथ ही आपकी बॉडी लैंग्वेज में भी परिवर्तन आएगा। अच्छी ड्रेस के साथ हल्का-सा मेकअप भी करें।
रचनात्मकता को निखारें
न चाहते हुए भी अगर आप नौकरी कर रही हैं, तो जाहिर-सी बात है इस स्थिति में आप बिल्कुल भी खुश नहीं रह सकेंगी। ऐसे में आपको तनाव भी हो सकता है। इस स्थिति से बचने के लिए अपने स्पेशल टैलेंट की खोज करें।
यह कविता लेखन से लेकर, पेंटिंग, सिलाई, कुकिंग या सिंगिंग कुछ भी हो सकता है। संभव हो, तो अपने इस पैशन को ही अपना प्रोफेशन बना लें।
अब खुद को समझाएं कि आप खास हैं और किसी उद्देश्य के लिए काम कर रही हैं। जब आप मनपसंद गतिविधियों में शामिल होंगी, तो खुशियां अपने आप आपके पास आएंगी।
दूसरों के लिए भी कुछ करें
कभी-कभी व्यस्तता के चलते या अन्य कारणों से हम आसपास के माहौल में सक्रिय नहीं रह पाते। जिंदगी जैसे खुद तक सिमट कर रह जाती है। ऐसे में हम आत्मकेंद्रित होकर रहने लगते हैं और बाकी लोगों के लिए वक्त ही नहीं निकाल पाते।
इससे बचने के लिए सजगता बहुत जरूरी है। परिवार के लोगों को तो अपनापन महसूस कराएं ही, साथ ही आस-पड़ोस का भी ध्यान रखें। ताकि मदद की जरूरत होने पर वह बिना किसी संकोच आपसे कुछ कह सकें।
आपके इस व्यवहार से आपको भी आत्मसंतुष्टि मिलेगी। जैसे ही इन बातों को आप अपने जीवन में उतार लेंगी, तो खुद में एक बड़ा परिवर्तन भी महसूस करेंगी।
जो इंसान खुद से प्यार नहीं करता, वह कभी दूसरों को भी प्यार नहीं कर सकता। कोई भी हीन, दुखी, निराश या बीमार इंसान दूसरों को दिल से खुशियां कैसे बांट सकता है? महिलाओं पर पूरे घर की जिम्मेदारी होती है, ऐसे में जरूरी है कि आप खुद को सबसे खास मानकर चलें। अपना भी उतना ही ख्याल रखें, जितना औरों का रखती हैं।
एक कहावत है कि हर औरत महारानी लक्ष्मी बाई होती हैं। युवावस्था में वह महारानी होती है, फिर लक्ष्मी बनकर दूसरों के घर जाती है। उसके बाद बाई बन जाती है। इसलिए इतनी व्यस्त न हो जाएं कि बाई बनकर रह जाएं। इसके लिए जरूरी है खुद से प्यार करना और अपनी इच्छाओं, भावनाओं की कद्र करना। तभी दूसरे भी आपको उचित सम्मान और प्यार दे पाएंगे।