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झड़ते बालों से परेशान हैं तो जानें वजहें और उपचार

Tue, 23 Sep 2014 03:34 PM IST
Updated Tue, 23 Sep 2014 03:34 PM IST
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hair loss causes symptoms and treatment

आप महंगे से महंगा शैंपू और कंडिशनर इस्तेमाल करते हैं फिर भी कम उम्र में ही सिर के झड़ते बाल आपको 'अंकल' या 'आंटी' बना देते हैं।

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बाल झड़ने की समस्या वैसे तो बेहद आम है लेकिन अगर सेहतमंद जीवनशैली और बालों की देखभाल के बाद भी इस पर नियंत्रण न हो सके तो यह गंजेपन की शुरुआत हो सकती है।

पुरुषों और महिलाओं में गंजापन यानी एलोपेसिया की समस्या आज जितनी आम है, इसके उपचार के प्रति सजगता उतनी ही कम है। कई बार इसके लक्षणों को समझने में ही हमें इतना अधिक समय लग जाता है कि उपचार मुश्किल और अधिक खर्चीला हो सकता है।
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विभिन्न शोधों और कॉस्मेटिक सर्जन डॉ. मोहन थॉमस से बातचीत के आधार पर जानिए पुरुषों और महिलाओं में गंजेपन के कारण, लक्षण और उपचार की विधियां।

पुरुषों में गंजापन का कारण

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पुरुषों में गंजेपन के मामले पिछले कुछ सालों में इतने बढ़े हैं कि करीब 50 प्रतिशत पुरुषों को समय से पहले गंजेपन की समस्या होती है जबकि 80 प्रतिशत पुरुष 70 साल की उम्र तक पूरी तरह गंजे हो जाते हैं।

पुरुषों में एलोपेसिया यानी गंजापन का मुख्य कारण जीन्स व मेल सेक्स हार्मोन हैं। ऐसे में पुरुषों में मांग के पास व सिर के मध्य भाग में बाल झड़ने से गंजेपन की शुरुआत होती है।

एलोपेसिया के दौरान पुरुषों के सिर की वे कोशिकाएं (हेयर फोलिकल) प्रभावित होती हैं जिनसे बाल निकलते हैं। इसमें तेजी के साथ हेयर फोलिकल सिकुड़ने लगते हैं जिससे बाल पतले होते जाते हैं और फिर गिरने लगते हैं।

इस दौरान हेयर फोलिकल से नए बाल निकलने बंद तो हो जाते हैं लेकिन ये कोशिकाएं जीव‌ित रहती हैं, यानी इसके उपचार की पूरी गुंजाइश है।

महिलाओं में गंजेपन का कारण

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करीब एक तिहाई महिलाएं एलोपेसिया की समस्या से जूझती हैं जबकि मेनोपॉज के बाद दो तिहाई महिलाओं को सिर के किसी विशेष हिस्से में गंजेपन का सामना करना पड़ता है।

महिलाओं में एलोपेसिया की वजहें पुरुषों की तुलना में अधिक हैं। पुरुषों की तरह ही महिलाओं में एंड्रोजन हार्मोन के कारण भी बाल झड़ने लगते हैं। इसमें सिर में मांग के आसपास के बालों का झड़ना शुरू होता है जो धीरे-धीरे सिर के पूरे भाग के गंजेपन में बदल जाता है।

इसके अलावा, कोई विशेष स्वास्थ्य समस्या, शारीरिक व मानसिक तनाव, मेनोपॉज के बाद हार्मोनल बदलाव, मेडिकल हिस्ट्री, किसी खास तरह का उपचार आदि भी संबंधित हैं।

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इन लक्षणों को देखने के बाद उपचार में देर न करें

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पुरुषों और महिलाओं में गंजेपन के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। आमतौर पर पुरुषों में गंजेपन की शुरुआत में बाल इस तरह से झड़ते हैं कि सिर पर बालों का हिस्सा 'M' आकार में नजर आता है। धीरे-धीरे बालों का झड़ना अधिक हो जाता है और यह आकार बदलकर 'U' हो जाता है।

महिलाओं के मामले में यह पैटर्न अलग है। आमतौर पर महिलाओं के सिर के बिल्कुल मध्य भाग से बाल झड़ने शुरू होते हैं, खासतौर पर बालों की मांग के आसपास का भाग और धीरे-धीरे सिर के सभी हिस्से से बाल झड़ने शुरू हो जाते हैं।

उपचार की प्रचलित विधियां

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एलोपेसिया के उपचार का सबसे पहला चरण है लक्षणों के आधार पर इसकी पहचान। इस दौरान मरीज की मेडिकल हिस्ट्री का पूरा ब्यौरा लिया जाता है।

इस दौरान गंजेपन का पैटर्न, सूजन या संक्रमण का परीक्षण, थायरॉइड और आयरन की कमी की पहचान के लिए ब्लड टेस्ट और हार्मोनल टेस्ट आदि की मदद से इसकी जांच हो सकती है। इसके उपचार के लिए इन दवाओं और विधियों का इस्तेमाल स्थिति के गंभीरता के आधार पर किया जाता है।

मिनोक्सिडिल - इस दवा को हाई ब्ल़ प्रेशर के उपचार के लिए तैयार किया गया था लेकिन इसका असर बाल झड़े के उपचार पर भी सामने आया। इसके बाद, कई शोधों में इसे गंजेपन के उपचार में प्रभावी माना गया है।

फूड एंड ड्रग्स एसोसिएशन ने इस दवा को महिलाओं में गंजेपन के उपचार के लिए प्रभावी माना है और डॉक्टरी सलाह पर उनका इस्तेमाल एंड्रोजन एलोपेसिया के उपचार ‌में किया जाता है।

एंड्रोजन प्रतिरोधी दवाएं - चूंकि एलोपेसिया के अधिकतर मामलों में शरीर में एंड्रोजन हार्मोन की अधिकता एक प्रमुख कारण है, इसलिए इसे कम करने की दवाओं का इस्तेमाल भी उपचार के लिए किया जाता है। कुछ मामलों में इन दवाओं से उन महिलाओं को फायदा मिला है, जिन पर मिनोक्सिडिल का प्रभाव नहीं हुआ।

आयरन की पूर्ति - कुछ मामलों में बाल झड़ने की रोकथाम महज आयरन युक्त सप्लीमेंट से ही हो जाती है। विशेष रूप से महिलाओं में गंजेपन के उपचार के लिए आयरन की गोलियां अधिक प्रभावी हैं।

प्लेटलेट रिच प्लास्मा थेरेपी (पीआरपी) - इस थेरेपी के दौरान सर्जरी की मदद से शरीर के रक्त की ही प्लेटलेट्स से उपचार किया जाता है जिससे त्वचा को एलर्जी की रिस्क नहीं रहता और बाल उगने शुरू हो जाते हैं।

मेसोथेरेपी - इस थेरेपी के दौरान स्काल्प की त्वचा पर विटामिन और प्रोटीन को सुई की मदद से डाला जाता है। इससे हेयर फोलिकल्स को ठीक कर दोबारा बाल उगाने की कोशिश की जाती है।

लेज़र लाइट - कम पावर की लेजर लाइट की मदद से बालों की जड़ों मे ऊर्जा का संचार बढ़ाते हैं जिससे बाल मजबूत हों और दोबारा उग सकें।

हेयर ट्रांस्प्लांटेशन - इस विधि से बालों को एक स्काल्प से दूसरे स्काल्प में स्थानांतरित किया जाता है। इस दौरान एक व्यक्ति के सिर से दूसरे के सिर में बाल इस तरह लगाए जाते हैं कि जिस ह‌िस्से से बाल निकाले गए हों वे दूसरे के सिर में उसी हिस्से पर लगाए जाएं। इसके साथ-साथ बाल झड़ने की रोकथाम से जुड़े अन्य उपचारों को भी किया जाता है।

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