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नींद न आने के पीछे कहीं यह वजह तो नहीं है?
Updated Wed, 04 Feb 2015 01:26 PM IST
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एक अध्ययन से पता लगा है कि जितना ज़्यादा समय किशोर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों जैसे टैबलेट और स्मार्टफ़ोन इस्तेमाल करने में बिताते हैं, उनकी नींद को उतना ही नुक़सान पहुंचता है।
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ये अध्ययन 16 से 19 साल के लगभग 10,000 युवाओं पर किए गया।
स्कूल से लौटने के बाद इन उपकरणों के साथ दो घंटे से ज़्यादा समय बिताना नींद नहीं आने या कम नींद आने की वजह बन सकता है।
नॉर्वे के लगभग सभी किशोरों का कहना था कि वह सोने से ठीक पहले इन उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं।
ज़्यादातर किशोरों की शिकायत थी कि उन्हें पांच घंटे से भी कम नींद आती है।
जब किशोरों से पूछा गया कि वह कितना समय इन उपकरणों का इस्तेमाल करने में गुज़ारते हैं तो सामने आया कि अधिकतर लड़कियां साढ़े पांच घंटे टीवी देखने, कंप्यूटर या स्मार्टफ़ोन का इस्तेमाल करने में बिताती हैं, जबकि लड़के उनसे थोड़ा ज़्यादा समय यानी छह से सात घंटे इन उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं।
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लड़कों में ज़्यादा लोकप्रिय कम्यूटर गेम्स हैं तो लड़कियां ज़्यादा वक़्त चैटिंग करती हैं।
जितना ज़्यादा समय किशोर गैजेट्स के इस्तेमाल में बिताते हैं, उनकी नींद में उतना ही ज़्यादा खलल पड़ता है।