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तकनीक का ज्यादा इस्तेमाल उड़ा रहा है नींद
लंदन/एजेंसी
Updated Tue, 27 Nov 2012 05:39 PM IST
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आजकल बहुत से लोग नींद की समस्या से जूझ रहे हैं और निद्रा विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी वजह तनाव और तकनीक का अधिक प्रयोग करना है। विशेषज्ञों का दावा है कि अनिद्रा के शिकार लोगों के मुकाबले अनिद्रा के शिकार लोग टुकड़ों में नींद लेते हैं और उनकी नींद रात में कई बार उचटती है। ऐसा उन दिनों में खासकर होता है जब वे ज्यादा व्यस्त होते हैं या किसी तरह के तनाव से गुजरते हैं।
एक भारतीय मूल के विशेषज्ञ ने इसे ‘फिजी स्लीप’ की संज्ञा दी है। लंदन के कैपियो नाइटिंगेल अस्पताल में निद्रा विशेषज्ञ और ‘टायर्ड बट वीयर्ड’ पुस्तक की लेखिका डॉ. नेरिना रामलखन ने कहा कि यह कोई वैज्ञानिक शब्द नहीं है लेकिन मरीजों का कहना है कि वे अपने सिर में कुछ इसी तरह की समस्या का अनुभव करते हैं। वे सोते तो हैं लेकिन चैन की नींद नहीं होती। इसमें उनका दिमाग बहुत क्रियाशील रहता है जिससे बेचैनी बनी रहती है।
डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार इस तरह की अवस्था को अनिद्रा की समस्या की छोटी बहन कहा जा सकता है लेकिन यह अनिद्रा की तरह हानिकारक नहीं होती। अर्ध अनिद्रा से पीड़ित लोग हर रात कम से कम 30 मिनट जागते रह जाते हैं या उनके लिए एक घंटे तक सोना असंभव हो जाता है क्योंकि उनका दिमाग इधर उधर भटक रहा होता है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक के ज्यादा इस्तेमाल के कारण लोगों में अर्ध अनिद्रा की स्थिति तेजी से बढ़ रही है। लोगों की थकान से संबंधित परेशानियों को दूर करने वाली एक सलाहकार संस्था ‘द एनर्जी प्रोजेक्ट’ के अध्यक्ष जीन गोम्स ने कहा कि हमने 30,000 पीड़ितों पर पांच साल तक शोध किया, संभवत : तकनीक ही इसका प्रमुख कारण है।
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एक भारतीय मूल के विशेषज्ञ ने इसे ‘फिजी स्लीप’ की संज्ञा दी है। लंदन के कैपियो नाइटिंगेल अस्पताल में निद्रा विशेषज्ञ और ‘टायर्ड बट वीयर्ड’ पुस्तक की लेखिका डॉ. नेरिना रामलखन ने कहा कि यह कोई वैज्ञानिक शब्द नहीं है लेकिन मरीजों का कहना है कि वे अपने सिर में कुछ इसी तरह की समस्या का अनुभव करते हैं। वे सोते तो हैं लेकिन चैन की नींद नहीं होती। इसमें उनका दिमाग बहुत क्रियाशील रहता है जिससे बेचैनी बनी रहती है।
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डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार इस तरह की अवस्था को अनिद्रा की समस्या की छोटी बहन कहा जा सकता है लेकिन यह अनिद्रा की तरह हानिकारक नहीं होती। अर्ध अनिद्रा से पीड़ित लोग हर रात कम से कम 30 मिनट जागते रह जाते हैं या उनके लिए एक घंटे तक सोना असंभव हो जाता है क्योंकि उनका दिमाग इधर उधर भटक रहा होता है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक के ज्यादा इस्तेमाल के कारण लोगों में अर्ध अनिद्रा की स्थिति तेजी से बढ़ रही है। लोगों की थकान से संबंधित परेशानियों को दूर करने वाली एक सलाहकार संस्था ‘द एनर्जी प्रोजेक्ट’ के अध्यक्ष जीन गोम्स ने कहा कि हमने 30,000 पीड़ितों पर पांच साल तक शोध किया, संभवत : तकनीक ही इसका प्रमुख कारण है।