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रोज की एक कॉफी और कोल्ड ड्रिंक सेहत को कैसे असर करती है, जान लीजिए

Tue, 10 Nov 2015 05:18 PM IST
Updated Tue, 10 Nov 2015 05:18 PM IST
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effects of col drink and coffee on our health

खान-पान की चीजों को लेकर भी खतरे कम नहीं होते। कोई चीज कितनी फायदेमंद या हानिकारक है, इसे लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति रहती है। कॉफी और डाइट सॉफ्ट ड्रिंक में मौजूद स्वीटनर से भी कोई खतरा हो सकता है?

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डर यह होता है कि ज्यादा कॉफी पीने से दिल का दौरा पड़ सकता है। वास्तविकता यह है कि इसको लेकर ज्यादा सबूत नहीं हैं कि कॉफी पीने से मौत का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि इससे उलट बात जरूर सही है।
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2012 में 'न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन' ने 13 साल के दौरान करीब चार लाख लोगों के स्वास्थ्य पर आधारित रिपोर्ट प्रकाशित की। इसमें वैज्ञानिकों ने पाया कि जो लोग रोजाना तीन से छह कप कॉफी पी रहे थे उनमें इन 13 सालों के दौरान मरने की आशंका 10 फीसदी कम हो गई।
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कई बीमारियों को दूर करती है कॉफी

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इतना ही नहीं, इससे दिल का दौरा और हृदय की दूसरी बीमारियों के अलावा स्ट्रोक, डायबिटीज और संक्रमण का खतरा कम हो जाता है। 2014 में करीब दस लाख लोगों के स्वास्थ्य के बारे में जारी अध्ययन में भी यही अंदाजा मिला।

इसमें कहा गया कि कॉफी नहीं पीने वालों की तुलना में रोजाना चार कप कॉफी पीने वालों में मरने का खतरा 16 फीसदी कम होता है। हालांकि यह सब केवल विश्लेषणात्मक शोध ही है। अब तक ये पता नहीं चल पाया है कि कॉफी हमारे दिल की सुरक्षा करती है या कोई और वजह है जो मालूम नहीं है।

मुमकिन है कि स्वस्थ लोग कॉफी के प्रति कहीं ज्यादा आकर्षित होते हों लेकिन अगर आपको कॉफी की लत पड़ जाए तो भी वह हानिकारक नहीं है। कॉफी अमृत भले नहीं हो लेकिन सुबह-सुबह आप आराम से कॉफी पीने का आनंद तो ले सकते हैं।

डाइट सॉफ्ट ड्रिंक्स का असर

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डाइट सॉफ्ट ड्रिंक्स को लेकर डर है कि इसमें मौजूद कृत्रिम चीनी से कैंसर का खतरा बढ़ता है। वास्तविकता यह है कि हम जानते हैं कि ज्यादा चीनी से मोटापा, डायबिटीज और हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ता है। लेकिन डाइट ड्रिंक्स में मौजूद कृत्रिम स्वीटनर का क्या असर होता है?

 
एक आम डर यह है कि ये ट्यूमर बढ़ाते हैं। लेकिन अमरीका के नैशनल कैंसर इंस्टीट्यूट में हुए शोध के मुताबिक कृत्रिम चीनी के तौर पर सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले एसपारटेम के इस्तेमाल से ना तो ब्रेन कैंसर का खतरा बढ़ता है और न ल्यूकेमिया और न ही लिंफोमा जैसी समस्या होती है।

वैसे इस कृत्रिम चीनी के इस्तेमाल से टाइप 2 की डायबिटीज का खतरा बताया जाता है लेकिन इसकी भी पुष्टि नहीं हुई है। यानी कृत्रिम स्वीटनर चीनी के मुकाबले में स्वास्थ्य के लिए बेहतर हो सकता है।

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