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देर से उठने की आदत का क्या है नुकसान?

Tue, 08 Oct 2013 08:17 AM IST
अमर उजाला, दिल्ली
अमर उजाला, दिल्ली Updated Tue, 08 Oct 2013 08:17 AM IST
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difference in brain of night owls and early birds

'अर्ली टू बेड एंड अर्ली टू राइज़' यह कहावत यूं ही नहीं बनी है। टू बेड एंड अर्ली टू राइज़' यह कहावत यूं ही नहीं बनी है। सुबह उठने के कितने भी फायदे हम हमेशा से सुनते आ रहे हों लेकिन बात जब सोने के तौर-तरीकों की होती है तो इसका संबंध न सिर्फ हमारी जीवनशैली से है बल्कि हमारे दिमाग और हार्मोन्स से भी है।

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जर्मनी के शोधकर्ताओं ने अपने शोध में एमआरआई के आधार पर यह अंदाजा लगाया है कि जल्दी उठने वालों और देर से उठने वाले लोगों के दिमाग में क्या अंतर हो सकता है।
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अमूमन नींद के मामलें में तीन तरीके के लोग होते हैं। पहले जो सुबह जल्दी उठते हैं, दूसरे जो देर से उठते हैं और तीसरे जो दोनों परिस्थितियों में रह सकते हैं। नींद के मामले में सिर्फ इनका व्यवहार ही अलग नहीं है बल्कि इन दिमाग में भी एक बड़ा अंर है जिसका पता हाल में हुए एक शोध में चला है।
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शोध में पाया गया कि जो लोग स्वाभाविक तौर पर देर से उठते हैं उनके मस्तिष्क में व्हाइट मैटर सबसे बुरी स्थिति में होता है, विशेष रूप से दिमाग के उस हिस्से में जहां से अवसाद और दुख के भाव पैदा होते हैं।

यही वजह है कि देर से उठने वाले लोगों को अवसाद और तनाव अधिक होता है। यह शोध साइंस डायरेक्ट जर्नल में प्रकाशित हुआ है।

अब अगर आप भी रोज देर से उठते हैं तो अपनी यह आदत बदल ही लें।

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