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बीपी की गोलियों से टल सकता है एल्जाइमर का खतरा
वाशिंगटन/एजेंसी
Updated Tue, 08 Jan 2013 05:30 PM IST
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लेकिन ब्लड प्रेशर की दवा एल्जाइमर के खतरे को काफी हद तक कम कर सकती हैं, हाल में
हुए सर्वेक्षण में यह बात साबित हुई है। अमेरिकी शोधकर्ताओं ने अपने शोध के आधार पर
यह दावा किया है कि 1960 के बाद से ब्लड प्रेशर कम करने के लिए जो दवाएं उपयोग में
लाईं जाती हैं, उनसे एल्जाइमर या दूसरे किस्म के मानसिक रोगों की आशंका काफी कम हो
सकती है।
सैन डियागो में अमेरिकन एकैडमी ऑफ न्यूरोलॉजी के सम्मेलन में इस अध्ययन के आधार पर वैज्ञानिकों ने माना कि हाइ बीपी के उपचार में इस्तेमाल आने वाली सभी प्रकार की दवाओं का उपयोग मस्तिष्क संबंधी रोगों के उपचार के लिए किया जा सकता है। इस शौध में 774 जापानी और अमेरिकी लोगों का अध्ययन किया गया जिनमें से 610 लोग ब्लड प्रेशर के लिए दवाएं ले रहे थे।
शोध में पाया गया कि जो लोगद बेटा ब्लॉकर्स और हाइ बीपी की दवाएं लेते हैं उनमें मस्तिष्क संबंधी रोग व एल्जाइमर की आशंका कम रहती है। इस बारे में पैसेफिक हेल्थ रिसर्च एंड एजुकेशन इंस्टिट्यूट के शोधकर्ता डॉ. लॉन व्हाइट बताते हैं, 'शोध के परिणाम वाकई उत्साह बढ़ाने वाले हैं। हाइपरटेंशन के बारे में हम मानते चले आ रहे थे कि इससे अल्जाइमर का रिस्क बढ़ जाता है लेकिन इसके उपचार सेे एल्जाइमर के खतरे को कम किया जा सकता है, इसका अंदाजा अब तक नहीं लगाया जा सका था।'
शोध में यह भी माना गया है कि हाइपरटेंशन व हाइ बीपी वाले उम्रदराज लोगों में दिल की बीमारी के साथ-साथ एल्जाइमर जैसे मस्तिष्क रोगों का खतरा अधिक होता है। ऐसे में इस शोध के परिणाम एल्जाइमर के उपचार में उम्मीद की किरण साबित होंगे।
सैन डियागो में अमेरिकन एकैडमी ऑफ न्यूरोलॉजी के सम्मेलन में इस अध्ययन के आधार पर वैज्ञानिकों ने माना कि हाइ बीपी के उपचार में इस्तेमाल आने वाली सभी प्रकार की दवाओं का उपयोग मस्तिष्क संबंधी रोगों के उपचार के लिए किया जा सकता है। इस शौध में 774 जापानी और अमेरिकी लोगों का अध्ययन किया गया जिनमें से 610 लोग ब्लड प्रेशर के लिए दवाएं ले रहे थे।
शोध में पाया गया कि जो लोगद बेटा ब्लॉकर्स और हाइ बीपी की दवाएं लेते हैं उनमें मस्तिष्क संबंधी रोग व एल्जाइमर की आशंका कम रहती है। इस बारे में पैसेफिक हेल्थ रिसर्च एंड एजुकेशन इंस्टिट्यूट के शोधकर्ता डॉ. लॉन व्हाइट बताते हैं, 'शोध के परिणाम वाकई उत्साह बढ़ाने वाले हैं। हाइपरटेंशन के बारे में हम मानते चले आ रहे थे कि इससे अल्जाइमर का रिस्क बढ़ जाता है लेकिन इसके उपचार सेे एल्जाइमर के खतरे को कम किया जा सकता है, इसका अंदाजा अब तक नहीं लगाया जा सका था।'
शोध में यह भी माना गया है कि हाइपरटेंशन व हाइ बीपी वाले उम्रदराज लोगों में दिल की बीमारी के साथ-साथ एल्जाइमर जैसे मस्तिष्क रोगों का खतरा अधिक होता है। ऐसे में इस शोध के परिणाम एल्जाइमर के उपचार में उम्मीद की किरण साबित होंगे।