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मैगी ही नहीं, इन्होंने भी किया फेवरेट फूड में केमिकल लोचा

Thu, 04 Jun 2015 01:32 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Thu, 04 Jun 2015 01:32 PM IST
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5 companies involved in food scandals

नेस्ले की मैगी पर बवाल दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है। हो भी क्यों ना आखिर उसमें तय मानकों से कहीं अधिक लेड की मात्रा जो पाई गई है। टीओआई में छपी खबर के मुताबिक, नेस्ले पहली और आखिरी ऐसी कंपनी नहीं है जो फूड स्कैंडल में फंसी है इसे पहले भी कई कंपनियां फूड स्कैंडल में फंस चुकी हैं। जानिए, कुछ ऐसी ही मशहूर कंपनियों के बारे में।

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सभी फोटोः गेटी इमेज

मैकडोनाल्ड्स

5 companies involved in food scandals

लोगों को हमेशा अपनी ओर आकर्षित करने वाला मैकडोनाल्ड्स पर कुछ शाकाहारी और हिंदु लोगों ने केस दर्ज करवाया था जिसके चलते अमेरिका के ग्लोबल फास्ट फूड जायन्ट ने मजबूरन इस बात को स्वीकार किया और माफी मांगी थी कि फ्रेंच फ्राइस को अधिक स्वादिष्ट बनाने के लिए उन्होंने थोड़ी सी मात्रा में बीफ़ मिलाया था। केस के बाद मैकडोनाल्ड्स ने ऐसा करना बंद कर दिया।

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बर्गर किंग

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दुनिया में बर्गर बेचने के लिए सबसे मशहूर कंपनी बर्गर किंग को ब्रिटेन में 2013 होर्समीट स्कैंडल के में पकड़ा गया था। बर्गर किंग ने इस बात को स्‍ वीकार किया कि उनके बीफ़ सप्लायर्स में से एक का सैंपल लिया गया था जिसमें घोड़े का मांस पाया गया। दूसरी कंपनिया जैसे नेस्ले जो कि दोबारा स्कैंडल में फंसी है और टेस्को भी इस तरह के स्कैंडल में फंस चुकी हैं।

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कैलॉग्स

5 companies involved in food scandals

2010 में ग्लोबल सीरियल जायन्ट ने अमेरिका में अपने 2 करोड़ 80 लाख कोर्न पॉप्स, हनी स्मैक्‍स, फ्रूट लूप्स और एप्पल जैक्स के डब्बे उस समय वापिस मंगवा लिए थे जब इनके ग्राहकों ने डायरिया और मितली की शिकायत की। ऐसा ग्लोबल सीरियल जायन्ट ने इसलिए किया क्योंकि सीरियल बॉक्स पैक होने के दौरान उनमें पेट्रोल बेस्ड कम्पाउंड लीक हो गया था।

क्‍वेकर ओट्स

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1950 में 2001 तक पेप्सिको के मालिकों के अंडर रही कंपनी अमेरिकन कोन्ग्लोमरेट ने एमआईटी के साथ मिलकर दिमागी तौर पर बीमार बच्चों पर एक प्रयोग किया जिसके तहत बच्चों को रेडियोएक्टिव से युक्त ओटमील खिलाएं गए। उन्‍होंने बच्चों के पेरेंट्स को बताया कि वे उन्हें उच्च स्तरीय पोषण युक्त खाना दे रहें हैं। एमआईटी और क्‍वेकर पर इसके लिए मुकदमा दर्ज हुआ जिसके एवज में इन्हें जुर्माने के तौर पर 1.85 मिलियन डॉलर यानी 11 करोड़ 87 लाख रुपए देने पड़े।

नेस्ले

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एक और सबसे घटिया फूड स्कैंडल हुआ जिसमें स्विस फूड जायन्ट पर आरोप लगा था कि उन्होंने नैतिक मूल्यों को दरकिनार करते हुए अनैतिक रूप से पब्‍लिसिटी पाने के लिए नुकसानदायक बेबी मिल्क को हेल्दी विकल्प के रूप में विकासशील देशों में प्रचारित किया था। लेकिन कंपनी 1976 में इस केस को जीत गई। इस केस के दौरान कंपनी का अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और यूरोप में बहिष्कार कर दिया गया था। इस स्कैंडल के बाद एक नया मार्केंटिग नियम बना जिसे नेस्ले को 1984 में मजबूरी में अपनाना पड़ा।

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