4000 पदों पर दरोगा भर्ती का रास्ता साफ
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तर प्रदेश प्रदेश में चार हजार 10 पदों पर उपनिरीक्षकों की भर्ती का रास्ता साफ हो गया है। भर्ती प्रक्रिया का नियम बीच में बदलने के कारण अभ्यर्थी मामले को लेकर हाईकोर्ट चले गए थे। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने नौ दिसंबर 2013 को नियम बदलने संबंधी शासनादेश को रद्द करते हुए पुराने नियम से ही परीक्षा कराने का निर्देश दिया था। इस आदेश को प्रदेश सरकार ने विशेष अपील में चुनौती दी थी।
शुक्रवार को न्यायमूर्ति सुनील अंबवानी और न्यायमूर्ति डा. सतीश चंद्रा की खंडपीठ ने विशेष अपील खारिज करते हुए एकल पीठ के आदेश को बहाल रखा। सरकार को निर्देश दिया है कि 19 मई 2011 को जारी विज्ञापन के नियमों के अनुसार ही परीक्षा कराई जाए।
इस आदेश के बाद सिविल पुलिस के 3698 और पीएसी में 312 उपनिरीक्षकों की भर्ती का रास्ता साफ हो गया है।
अभ्यर्थियों ने दी थी न्यायालय में चुनौती
उल्लेखनीय है उपनिरीक्षक भर्ती प्रारंभिक परीक्षा में 39315 अभ्यर्थी सफल घोषित किए गए थे। इनको शारीरिक दक्षता परीक्षा के लिए बुलाया गया। शारीरिक परीक्षा के दौरान एक अभ्यर्थी सत्येंद्र कुमार यादव की दौड़ के दौरान मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद सरकार ने शारीरिक परीक्षा के नियमों में बदलाव करते हुए दौड़ की दूरी दस किलोमीटर से घटा 4.8 किलोमीटर कर दी।
पुराने नियम पर परीक्षा दे चुके अभ्यर्थियों ने इसे न्यायालय में चुनौती दी। कहा गया कि तीस हजार लोगों की पुराने नियम से परीक्षा लेने के बाद कुछ बचे लोगों के लिए नियम शिथिल कर देना अनुचित है। एकल न्यायपीठ ने परीक्षा के बीच में नियम बदलने को मनमाना और अतार्किक करार देते हुए तीन सितंबर 2013 और 24 सितंबर 2013 के शासनादेश को रद कर दिया।
विशेष अपील पर सुनवाई कर रही खंडपीठ ने एकल जज के निर्णय को सही करार देते हुए कहा कि सरकार को विवेकाधिकार का प्रयोग मूल उद्देश्य को समाप्त करने के लिए नहीं बल्कि उसकी पूर्ति के लिए करना चाहिए।
नियमों में इस तरह हुआ बदलाव
भर्ती के लिए शारीरिक पात्रता परीक्षा हेतु पुराने नियम के अनुसार पुरुष अभ्यर्थियों को दस किलोमीटर की दौड़ 60 मिनट में और महिलाओं पांच किलोमीटर दौड़ 35 मिनट में तय करनी थी।
एक पुरुष अभ्यर्थी की मृत्यु के बाद सरकार ने नियमों में परिवर्तन करते हुए पुरुष अभ्यर्थियों के लिए 4.8 किलोमीटर दौड़ 35 मिनट में और महिलाओं के लिए 2.4 किलोमीटर 20 मिनट में पूरी करने का लक्ष्य रखा गया। नया नियम लागू होने तक करीब 30 हजार अभ्यर्थी पुराने नियम से परीक्षा दे चुके थे।