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जीनत अमानः उफ, उस दौर में यह जलवे

Tue, 20 Nov 2012 10:12 AM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Tue, 20 Nov 2012 10:12 AM IST
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zeenat aman- begin new trend in films
जिन कपडों को पहनकर आज की नायिकाएं अपने को बोल्ड और बिंदास होने की बात कहती हैं जीनत अमान ने वैसी पोशाकें फिल्मों में उस दौर में पहनी जब नायिकाएं सलवार कमीच और साड़ी से इतर कुछ और नहीं सोच पाती थीं। वह पहनती भी थीं तो पर्दे पर सहज नहीं दिखती थीं।
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जीनत ने नायिकाओं को लेकर बॉलीवुड में बनी-बनाई परंपराओं को तोड़ा। 19 नवंबर 1951 में जन्मीं जीना तमान ने 1970 में फिल्म 'हरे राम हरे कृष्णा' से मेन स्ट्रीम के सिनेमा में शुरुआत की। फिल्म दर फिल्म जीनत अपने रोल में बिदांस होती गईं।
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70 दशक में उन्होंने लोकट ब्लाऊज और बैकलेस पहनावों से फिल्म इंडस्ट्री में सनसनी मजा दी थी। फिल्म इंडस्ट्री में उस समय जीनत अमान को सबसे सुंदर बदन वाली नायिका कहा गया। अलग-अलग किस्म की भूमिकाएं करनी वाली जीनत ने हिंदी फिल्मों की पारंपरिक नायिका से इतर कुछ और गढ़ने का प्रयास किया।
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अलग-अलग किस्म की भूमिकाएं

'सत्यम शिवम सुंदरम' से अपने बोल्ड किरदार की वजह से खासी चर्चा में आईं जीनत 'दम मारो दम गाने' से युवाओं के बीच लोकप्रिय हुईं। जीनत ने 'हीरालाल पन्नालाल', डॉन, दोस्ताना, 'कुर्बानी', 'शालीमार', 'अली बाबा चालीस चोर', 'लावारिस', 'दौलत' के अलावा कई फिल्मों में अलग-अलग तरह की भूमिकाएं निभाईं।

इन फिल्मों के सफल होने की कई वजहों में एक बड़ी वजह जीनत का बोल्ड अंदाज भी रहा है। जीनत ने फिल्म इंडस्ट्री में एक अलग दर्शक वर्ग तैयार कर लिया था।

दूसरी पारी भी

2000 के बाद जीनत अमान ने फिल्मों की अपनी दूसरी पारी भी शुरू की। 2003 में वह 'बूम' फिल्म में दिखीं तो 2006 में 'जान', 2007 में 'चौराहे', 2008 में 'अगली और पगली' जैसी फिल्मों में दिखीं। यह फिल्में सफल नहीं हुईं। लिहाजा जीनत की दूसरी पारी बहुत सफल और लंबी नहीं रही।


व्यक्तिगत जीवन

1951 में जन्मीं जीनत ने 1970 में 'मिस एशिया पैशफिक' का खिताब जीता। जीनत की मां हिंदु थीं और पिता मुस्लिम। जीनत ने 1985 में मजहर खान के साथ शादी की। 1998 में मजहर के न रहने के बाद जीनत अपने दो बेटों अजान और जहान के साथ रहती हैं।
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