देव आनंद का बेटा होना जिम्मेदारी: सुनील आनंद
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बीते जमाने के सुपरस्टार अभिनेता देव आनंद के बेटे सुनील आनंद साल 2001 में आखिरी बार पर्दे पर नज़र आए। अब 14 साल बाद सुनील फिल्मी दुनिया में अपनी पारी फिर से शुरू करना चाहते हैं।
साल 1984 में फ़िल्म 'आनंद और आनंद' से अपने कैरियर की शुरुआत करने वाले सुनील अब एक अंग्रेजी फिल्म में हीरो के तौर पर आ रहे हैं। हालांकि आनंद परिवार के लिए हैरानी की बात नहीं है क्योंकि साल 2011 तक खुद देव आनंद एक हीरो के तौर पर अभिनय की दुनिया में सक्रिय रहे।
सुनील आनंद भी इसी परंपरा को आगे बढा रहे हैं लेकिन क्या इतने बड़े नाम का बोझ वो अपने कंधो पर उठा पाएंगे?बीबीसी से हुई खास बातचीत में उन्होंने ऐसे ही कई सवालों के जवाब दिए।
कहां रहे 14 साल ?
इसके जवाब में सुनील आनंद बिल्कुल देव साहब के अंदाज में कहते हैं, "मैं कहीं नहीं गया था। बस अपने पिताजी का साथ दे रहा था। मैं उनकी छाया बन गया था और हर फ़िल्म में कैमरे के पीछे उनकी मदद कर रहा था।
"लेकिन 2011 में 'चार्जशीट' के बाद इतने वर्षों में नवकेतन फिल्म्स की ओर से कोई फिल्म नहीं आई, ऐसा क्यों ? इस पर सुनील का कहना था, "डैड चाहते थे कि नवकेतन फ़िल्म्स का नाम दुनिया में गूंजे और मैं इसी की तैयारी में था।
अब मैं 'वेगाटोर मिक्सर' के साथ आ गया हूं।"
हॉलीवुड फिल्म में दिखाई देंगे
कभी 'हम दोनों', 'गाइड' और 'ज्वेल थीफ' जैसी कमाल की फ़िल्में बनाने वाली नवकेतन फ़िल्म्स के बैनर से अब एक हॉलीवुड फिल्म आ रही है जिसका नाम है 'वेगाटॉर मिक्सर'।
इसमें सुनील एक एनआरआई अमेरीकी का किरदार निभा रहे हैं। इस उम्र में हीरो बनने के लिए उन्होंने कितनी मेहनत की, इस पर वह कहते हैं, "मैंने इस रोल के लिए लंबे समय तक मार्शल आर्ट्स की ट्रेनिंग ली है और अब फिल्म बनकर तैयार है। बस साउंड मिक्सिंग बाकी है।"
इस फिल्म में तकरीबन पूरा कास्ट विदेशी मूल का है और सिर्फ़ हीरो के तौर पर सुनील और विलेन के तौर पर भारतीय मूल के दीन बक्शी मौजूद हैं।
अंग्रेजी में बनी इस फिल्म की शूटिंग अमेरीका में हुई है। ऐसे में सुनील इसे एक भारतीय बैनर की हॉलीवुड फिल्म मानते हैं।
'देव साहब का नाम बहुत भारी है'
इस फिल्म के सह निर्माता और देव आनंद साहब के दोस्त रहे दीन बक्शी ने बताया, "सुनील एक अच्छे इंसान हैं, लेकिन देव साहब का नाम इतना बड़ा है कि उसके आगे हम सब छोटे हो जाते हैं।
"वह आगे कहते हैं, "देव साहब से सुनील की तुलना होना स्वाभाविक है। ये वैसा ही है जैसे अमिताभ जी से अभिषेक की तुलना और ये कभी-कभी बहुत मुश्किल भी हो जाता है।
मैं सुनील का इस फिल्म के लिए साथ देने इसलिए आया क्योंकि देव साहब से मैंने वादा किया था कि उनकी अंग्रेज़ी फिल्म बनाने में साथ दूंगा और इसलिए यह फ़िल्म देव साहब को समर्पित है।"पूरी तरह से देव साहब का अंदाज कॉपी कर चुके सुनील से जब हमने पूछा कि क्या देव साहब के जाने के बाद उनकी कमी महसूस होती है?
वह कहते हैं, "उनका नाम बहुत बड़ा और भारी है जिसे आगे ले जाना बड़ी ज़िम्मेदारी का काम है। लोगों को मुझसे कुछ जयादा ही उम्मीदें हैं जिन्हें पूरा करने की मैं बस कोशिश ही कर सकता हूं।"
फिल्म 'वेगाटोर मिक्सर' को इसी साल रिलीज किया जाना है और नवकेतन फ़िल्म्स की आर्थिक स्थिति काफी हद तक इस फिल्म पर टिकी है।