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ऐतिहासिक 'सैंट मेरीज चर्च' पर बनी फिल्म जल्द होगी रिलीज

Fri, 10 Jul 2015 09:52 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजला, दिल्ली Updated Fri, 10 Jul 2015 09:52 PM IST
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दक्षिण एशिया के प्राचीनतम गैरिसन चर्च पर बनी पहली डॉक्युमेंट्री फिल्म 12 जुलाई को रिलीज होने जा रही है। “सैंट मेरीज़... द हेरिटेज इन रुइंस” नामक इस फिल्म के निर्देशक विश्वजीत मुखर्जी हैं। फिल्म का निर्माण वाराणसी के डबल्यु एच स्मिथ मेमोरियल स्कूल की अनीता पौलिन डे एवं प्रदीप कुमार डे ने किया है। रविवार को रथयात्रा स्थित कन्हैयालाल गुप्ता होटल के सभागार में संध्या 6 बजे से फिल्म का प्रीमियर किया जाएगा। इस अवसर पर फिल्म के निर्देशक विश्वजीत मुखर्जी भी मौजूद होंगे। साथ ही काशी के विशिष्ट लोगों की उपस्थिति में डॉक्युमेंट्री फिल्म पर परिचर्चा भी होगी। प्रीमियर में विख्यात इतिहासकार, डॉ. ओ. पी केजरीवाल मुख्य अतिथि होंगे। साथ ही अन्य विशेषज्ञों द्वारा सैंट मेरीज़ चर्च के जिर्णोद्धार एवं काशी के विकास पर भी प्रकाश डाला जाएगा।

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खंडहर में तबदील हो चुके इस दो सौ साल पुराने गिरजाघर को संरक्षित करने के उद्देश्य से यह डॉक्युमेंट्री फिल्म बनाई गई है। फिल्म के माध्यम से इस ऐतिहासिक धरोहर के जिर्णोद्धार हेतु लोगों को जागरुक किया जाएगा। वाराणसी कैंट में 11.15 एकड़ ज़मीन के बीच खड़ी इस इमारत से जेम्स प्रिंसेप, एनी बेसेंट एवं महारानी एलिज़ाबेथ जैसे महान नाम जुड़े हैं। गौरतलब है कि काशी ही प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र भी है। मौजूदा सरकार देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख पहचान दिलाने की पुरज़ोर कोशिश कर रही है। इस दिशा में वाराणसी में कई कार्य विकास की तरफ बढ़ते दिख रहे हैं, फिर चाहे वह गंगा की सफ़ाई हो या मंदिरों का पुनरोद्धार। अत: इस डॉक्युमेंट्री फिल्म के माध्यम से सरकार को भी इस दिशा में ध्यान देने का अनुरोध किया जाएगा। काशी के सर्वस्व विकास के लिए सभी धरोहरों का विकास ज़रूरी है। इस फिल्म में काशी की ऐसी ही एक धरोहर की तस्वीर है जो अपनी पहचान खो रही है।
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निर्देशक विश्वजीत मुखर्जी की यह तीसरी डॉक्युमेंट्री फिल्म है। इससे पहले उन्होंने बनारस की असि नदी पर केंद्रित एक डॉक्युमेंट्री बनाई थी जिसमें नदी की दुर्दशा का बखान है। काशी के ही पंचगंगा फाउंडेशन नामक संस्था ने इस फिल्म का निर्माण किया था। नवंबर 2014 में जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने “असि... द लॉस्ट रिवर” नामक इस डॉक्युमेंट्री फिल्म का विमोचन बनारस में किया। फिल्म के परिणाम स्वरूप बनारस में गंगा के साथ साथ असि नदी के जिर्णोद्धार का भी काम शुरु हो चुका है। ज्ञात हो कि इस “असि... द लॉस्ट रिवर” को दिल्ली अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोतस्व में सर्वश्रेष्ट डॉक्युमेंट्री का पुरस्कार भी मिला है। विश्वजीत की पहली निर्देशित फिल्म “ऑरवेल... बट वाई” है। “एनिमल फार्म” और “1984” जैसी विश्व विख्यात उपन्यासों के लेखक ऑर्ज ऑरवेल के जन्मस्थान पर बनी इस पहली डॉक्युमेंट्री फिल्म का निर्माण रोटरी मोतिहारी लेक टाउन ने किया है।


फिल्म में खंडहर में तबदील होते लेखक के घर को बचाने की कोशिश के बारे में दिखाया गया है। साथ ही इस बात पर भी ज़ोर दिया गया है कि ऑरवेल जन्मस्थान का विकास किस तरह से मोतिहारी शहर के विकास में सहायक होगा। यह फिल्म अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी काफी चर्चित रही। जनवरी 2014 में लेखक की पुण्यतिथि पर बिहार सरकार के कैबिनेट मंत्री विजय कुमार चौधरी ने इस फिल्म का विमोचन मोतिहारी में किया। फिल्म के परिणाम स्वरूप राज्य सरकार द्वारा लेखक के जन्मस्थान का नवीकरण किया गया। डॉक्युमेंट्री देखने के बाद स्वयं जॉर्ज ऑरवेल के पुत्र रिचर्ड ब्लेयर ने विश्वजीत को ई मेल कर बधाई दी और अपने पिता के जन्मस्थान पर आने की इच्छा ज़ाहिर की।

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पिछले 9 सालों से दिल्ली में रह रहे 25 वर्षीय लेखक व डॉक्युमेंट्री फिल्मकार का जन्म मोतिहारी में हुआ। दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास और फिर भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी) से अंग्रेज़ी पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद विश्वजीत ने ज़ी न्यूज़ और एबीपी न्यूज़ जैसे चैनलों में प्रोडक्शन का काम किया। मगर अपने अंदर की प्रतिभा को जगाने के लिए उन्होंने नौकरी छोड़ कर कुछ नया करने की सोची। डॉक्युमेंट्री फिल्मकार के साथ ही विश्वजीत एक सफल टिप्पणीकार एवं कवी भी हैं। हिंदी के प्रमुख अख़बारों में फिल्मों एवं सामाजिक विषयों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं। एक क्रांतिकारी के घर पैदा हुए, क्रांतिकारी सोच के साथ विश्वजीत अपने क्षेत्र में एक अलग पहचान बना रहे हैं। इन दिनों वह अपनी अगली डॉक्युमेंट्री फिल्म पर काम कर रहे हैं।

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