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ऐक्टिंग समय के साथ निखरती है: सोहा अली खान

Wed, 01 Jan 2014 12:25 PM IST
रवि बूले
रवि बूले Updated Wed, 01 Jan 2014 12:25 PM IST
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soha ali khan exclusive interview

पिछले साल 'साहब बीवी और गैंगस्टर रिटर्न्स', 'गो गोवा गॉन' और 'वार छोड़ ना यार' जैसी फिल्में करने के बाद सोहा अली खान 'मि.जो बी.कारवाल्हो' से नए साल की पारी शुरू कर रही हैं। खास बात यह कि 2014 में सोहा को बॉलीवुड में दस साल पूरे हो रहे हैं। सोहा से उनकी ताजा फिल्म और कैरियर को लेकर खास बातचीत की रवि बुले ने...

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'मि.जो बी.कारवाल्हो' में आप एक ऐक्शन हीरो हैं! इंस्पेक्टर शांतिप्रिया फड़निस का रोल निभाना कैसा अनुभव रहा?
वाकई बहुत मजा आया। तमाम बातों को लेकर मेरे अंदर जो गुस्सा, फ्रस्ट्रेशन और खुन्नस थी, वह इस फिल्म में काम करके निकल गई। कई बार जिंदगी में ऐसे मौके आते हैं जब शब्द कम पड़ जाते हैं और आप रिएक्ट भी नहीं कर पाते। ऐसे मौकों के कारण मेरे अंदर जो गुस्सा भरा हुआ था, वह खत्म हो गया है। मैं खुद को बहुत रिलेक्स और लाइट महसूस कर रही हूं।
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अरशद वारसी के साथ आपने पहली बार काम किया। एक इंसान और एक ऐक्टर के रूप में वह आपको कैसे लगे?
अरशद के बारे में मैं पहले से काफी कुछ जानती थी। भाई (सैफ अली खान) उनके साथ काम कर चुके हैं। कुणाल (बॉयफ्रेंड) भी उनके साथ फिल्में कर चुके हैं। ऐसे में दोनों से मैं अरशद के बारे में कई बातें सुन चुकी थी। फिर मैंने भी पाया कि जब वह सेट पर होते हैं तो माहौल एकदम हल्का-फुल्का रहता है। वह सबको हंसाते रहते हैं। सबसे खास बात यह कि वह बहुत शानदार ऐक्टर हैं। खास तौर पर कॉमेडी में। आपको पता होता है कि उनके सामने होने पर टेक बहुत कम होंगे, आपका काम जल्दी हो जाएगा और जल्दी घर जा सकेंगे!
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2014 में आपको बॉलीवुड में एक दशक हो रहा है। खुद को एक ऐक्टर के रूप में कहां पाती हैं?
मैं एक फिल्मी परिवार से हूं, लेकिन कहना चाहूंगी कि एक ऐक्टर होने में इससे कोई फायदा नहीं होता। ऐक्टिंग धीरे-धीरे आती है। यह ऐसी कला और ऐसा प्रोफेशन है जो समय के साथ निखरता है। जब आप ज्यादा से ज्यादा कैमरे के सामने होते हैं और आपको धीरे-धीरे एहसास होता है कि कैमरा मेरा दोस्त है। पहली फिल्म (दिल मांगे मोर) में शूटिंग के दौरान जहां मैं कई गलतियां करती थी और कैमरे के सामने घबराई रहती थी, वहीं अब बहुत सहज रहती हूं।

'मि. जो.बी कारवाल्हो' टाइटल 'जो भी करवालो' जैसा सुनाई देता है। फिल्म में क्या खास करवाया गया आपसे?
यह पूछिए कि डायरेक्टर (समीर तिवारी) ने हमसे क्या नहीं करवाया!  फिल्म में मैं कई बातें पहली बार करती नजर आऊंगी। जैसे ऐक्शन। जैसे कैबरे। पहली बार फिल्म में मैं स्विमसूट पहन कर आ रही हूं। ...और क्या कहूं! मैं इस फिल्म से खुश हूं क्योंकि इससे पहले मैंने ऐसा रोल नहीं किया था। मुझे लगता है कि जो कुछ मैंने इस फिल्म में किया, उसमें बहुत सहज हूं क्योंकि वह सब मेरी जिंदगी का हिस्सा है। पहले मैं बहुत सारे इमोशनल और इंटेंस रोल करती रही हूं। जबकि यह बहुत हल्काफुल्का रोल है। इसमें मेरे व्यक्तित्व के वो रंग दिखेंगे जो अभी तक पर्दे पर नहीं आए।


कैबरे डांस के लिए क्या आपने कोई ट्रेनिंग ली या किसी प्रकार की तैयारी की...?
ऐसा कुछ नहीं हुआ। असल में इंस्पेक्टर शांतिप्रिया एक कैबरे डांसर के अंडरकवर में एक मिशन पर है। ऐसे में उसके लिए जरूरी नहीं था कि वह कैबरे डांस की बारिकियां सीखे। इस डांस के लिए बहुत ही रोचक सिचुएशनल गाना (चुम्मा चाटी) है! गाने के आस-पास बहुत सारी कॉमिक सिचुएशंस हैं। मजेदार बात यह कि फिल्म में 'मि. जो बी.कारवाल्हो' बने अरशद दावा करते हैं कि उन्हें कभी कोई लड़की पटा नहीं पाई। ऐसे में यहां सेक्सी डांस करके इंस्पेक्टर शांतिप्रिया उनका गर्व तोड़ने की कोशिश करती है, मगर नाकाम रहती है।

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